पासपोर्ट और आधार को नागरिकता का वैध प्रमाण बनाने की मांग, शशि थरूर बोले- कानून में हो संशोधन

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड की कानूनी मान्यता को लेकर चल रही बहस के बीच सरकार से कानून में बदलाव करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक किसी व्यक्ति का पासपोर्ट या आधार कार्ड सरकार द्वारा औपचारिक रूप से निरस्त या वापस नहीं लिया जाता, तब तक इन्हें भारतीय नागरिकता का वैध और प्रमाणिक दस्तावेज माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था आम लोगों के बीच भ्रम पैदा कर रही है और इसे दूर करने के लिए स्पष्ट कानूनी संशोधन जरूरी है।

शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने विदेश मंत्रालय के हालिया बयान पर सवाल उठाए। मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा के उद्देश्य से जारी किया जाने वाला दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। थरूर ने कहा कि यह बयान, विशेष रूप से 'पासपोर्ट सेवा दिवस' के अवसर पर सामने आने के कारण, लोगों के बीच आश्चर्य और व्यापक राजनीतिक चर्चा का कारण बना है।

विदेश मंत्रालय की दलील पर उठाए सवाल

शशि थरूर ने कहा कि सरकार अपने पक्ष में पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 का हवाला दे रही है। इस प्रावधान के अनुसार, कुछ विशेष परिस्थितियों और जनहित के मामलों में सरकार गैर-नागरिकों को भी भारतीय पासपोर्ट जारी कर सकती है। हालांकि, उनका तर्क है कि व्यावहारिक तौर पर दशकों से भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता और पहचान के सबसे भरोसेमंद दस्तावेजों में गिना जाता रहा है।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करने से पहले विस्तृत दस्तावेजी जांच, पुलिस सत्यापन और कई स्तरों पर पहचान व नागरिकता का परीक्षण किया जाता है। ऐसे में यदि इतनी कठोर प्रक्रिया के बाद जारी किया गया पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा, तो यह व्यवस्था अपने आप में विरोधाभासी प्रतीत होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता सिद्ध नहीं करता, तो फिर उसकी कानूनी उपयोगिता को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए।
आधार कार्ड को लेकर भी रखी अपनी राय

थरूर ने आधार कार्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आधार केवल पहचान और पते का प्रमाण है, न कि नागरिकता का। उनके अनुसार, इस स्थिति के कारण करोड़ों भारतीय ऐसे हैं जिनके पास सरकार द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज तो हैं, लेकिन फिर भी उन्हें नागरिकता का निर्विवाद प्रमाण नहीं माना जाता। यह स्थिति नागरिकों के लिए अनिश्चितता और भ्रम पैदा करती है।

उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे नागरिकता और पहचान से जुड़े दस्तावेजों की कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो और आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

कानून में बदलाव का दिया सुझाव


इस विवाद का स्थायी समाधान सुझाते हुए शशि थरूर ने सरकार से संबंधित कानूनों में संशोधन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट और आधार कार्ड दोनों को भारतीय नागरिकता का वैध और अंतिम प्रमाण घोषित किया जाना चाहिए, बशर्ते उन्हें सरकार द्वारा औपचारिक रूप से रद्द या निरस्त न किया गया हो।

उनका मानना है कि इस तरह का संशोधन नागरिकों को बार-बार अपनी नागरिकता साबित करने की आवश्यकता से राहत देगा और विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं में भी स्पष्टता आएगी।

गैर-नागरिकों के लिए अलग आधार कार्ड का सुझाव

थरूर ने यह भी कहा कि वर्तमान व्यवस्था में आधार कार्ड भारत में 182 दिनों के निवास के आधार पर जारी किया जाता है, नागरिकता के आधार पर नहीं। इसलिए उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) गैर-नागरिक निवासियों के लिए अलग पहचान वाला आधार कार्ड जारी करे।

उन्होंने कहा कि इससे भारतीय नागरिकों और गैर-नागरिक निवासियों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही, सामान्य आधार कार्ड या वैध भारतीय पासपोर्ट रखने वाले नागरिकों की पहचान और नागरिकता को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं रहेगा। उनके अनुसार, ऐसा कदम पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा तथा अनावश्यक प्रशासनिक और कानूनी विवादों को भी काफी हद तक समाप्त करने में मदद करेगा।