देह व्यापार की काली दुनिया का पर्दाफाश, बिहार में दो पतियों संग रैकेट चलाने वाली मास्टरमाइंड महिला गिरफ्तार

बिहार के नवादा और नालंदा जिलों में सक्रिय एक बड़े सेक्स रैकेट के संचालन में शामिल मुख्य महिला सरगना पुलिस की गिरफ्त में आ गई है। ढाई महीने से फरार चल रही इस शातिर महिला को नवादा नगर पुलिस ने बिहार शरीफ से दबोच लिया है। 'नीलम उर्फ नेहा' के रूप में पहचान की गई यह महिला, पुलिस द्वारा 30 जनवरी को नवीन नगर में किए गए एक प्रमुख ऑपरेशन के बाद से वांछित थी।

आरोप है कि यह महिला न केवल इस अवैध धंधे का प्रबंधन करती थी, बल्कि कम उम्र की, निर्दोष लड़कियों को फुसलाकर और डरा-धमकाकर उन्हें देह व्यापार के गंदे दलदल में धकेलने के लिए भी सीधे तौर पर जिम्मेदार थी। उसके पकड़े जाने से इस संगठित अपराध के कई चौकाने वाले राज खुले हैं।

सुनियोजित तरीके से नाबालिगों का शोषण

जनवरी के अंत में नवादा शहर के नवीन नगर मोहल्ले में हुए खुलासे के दौरान, पुलिस ने एक घनी आबादी वाले इलाके में चल रहे इस रैकेट को ध्वस्त किया था। उस समय, दो 16 साल की नाबालिग लड़कियों को यौन शोषण के जाल से मुक्त कराया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए, नवादा के पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान ने इस पूरी जांच की कमान संभाली।

इस मामले में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। नीलम उर्फ नेहा की गिरफ्तारी को इस दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि वही वह व्यक्ति थी जो लड़कियों को बहला-फुसलाकर लाती थी और उनसे जबरदस्ती यह घिनौना काम करवाती थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुक्त कराई गई लड़कियों ने इस बात की पुष्टि की है कि नीलम ही उन्हें नियंत्रित करती थी।

मास्टरमाइंड का पेचीदा जाल और दो पतियों की भूमिका

नीलम उर्फ नेहा की चालाकी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए कई परतें बना रखी थीं। मूल रूप से हिसुआ की निवासी, उसने कागजों पर अपना पता मिर्जापुर के रूप में दर्ज कराया था, लेकिन वह सक्रिय रूप से बिहार शरीफ में रह रही थी और वहां से रैकेट का संचालन कर रही थी।

सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस अवैध धंधे में उसका अतीत और वर्तमान दोनों शामिल थे। उसकी पहली शादी रहुई थाना क्षेत्र के एक गांव में विक्की से हुई थी, और वर्तमान में वह संजीव नामक व्यक्ति के साथ रह रही थी। पुलिस की जांच में सामने आया है कि संजीव और विक्की, दोनों ही इस रैकेट के सक्रिय सदस्य थे। वे दोनों, संजीव के भाई रोशन के साथ मिलकर, लड़कियों को फंसाने और लाने का काम करते थे, जबकि नीलम उन्हें 'मैनेज' करती थी। पुलिस अब इन तीनों फरार सहयोगियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
आधुनिक तकनीक और जालसाजी का इस्तेमाल

पुलिस अधीक्षक धीमान ने इस बात की भी पुष्टि की कि जनवरी के छापे के दौरान, नवीन नगर स्थित ठिकाने से न केवल आपत्तिजनक सामग्री, बल्कि ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान लेने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कई डिजिटल डिवाइस और स्कैनर भी बरामद किए गए थे। ग्राहकों से लिया गया 10,820 रुपये का नकद भुगतान भी मिला था, जो सीधे नीलम उर्फ नेहा के नाम पर पंजीकृत खातों में जाता था।

यही नहीं, जब रैकेट का खुलासा हुआ और लड़कियां पकड़ी गईं, तो नीलम ने कानून को गुमराह करने की एक और कुटिल चाल चली। उसने दो अन्य महिलाओं को 'फर्जी मां और बहन' बनाकर लड़कियों को पुलिस से छुड़ाने के लिए भेजा था, ताकि रैकेट जारी रह सके। इससे पता चलता है कि वह इस अवैध व्यवसाय को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती थी।

ऐसे बनता था शिकार: सार्वजनिक स्थलों पर नज़र

नवादा पुलिस द्वारा उजागर किए गए 'ऑपरेशनल मोड' के अनुसार, इस पूरे काले धंधे की शुरुआत रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और सार्वजनिक पार्कों से होती थी। नीलम के पतियों और सहयोगियों (विक्की, संजीव और संजय) की नज़र ऐसी युवा लड़कियों पर रहती थी जो या तो घर से भागकर आई होती थीं, या किसी प्रेम संबंध में धोखा खाकर अकेली पड़ गई थीं, या जो अत्यधिक गरीबी के कारण असहाय थीं।

उन्हें 'नौकरी' दिलाने या बेहतर भविष्य का लालच देकर वे उन्हें फंसाते थे और फिर सेक्स रैकेट में धकेल देते थे। एक बार जब वे जाल में फंस जाती थीं, तो नीलम उन्हें पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लेती थी। लड़कियों को लाने-ले जाने से लेकर उन्हें डराने-धमकाने और ग्राहकों से मोटी रकम वसूलने तक, हर काम नीलम की देखरेख में होता था। वह इन मजबूरियों का इस्तेमाल करके उनका निरंतर शोषण कर रही थी।