पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार अब सरकारी दफ्तरों में अनुशासन और कार्य संस्कृति को मजबूत करने पर जोर देती दिखाई दे रही है। इसी दिशा में राज्य के न्याय विभाग ने कर्मचारियों की समयबद्ध उपस्थिति और कार्यालयीन कार्यों के प्रभावी संचालन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।
कोलकाता स्थित राइटर्स बिल्डिंग से जारी आदेश के मुताबिक न्याय विभाग के सभी कर्मचारियों के लिए सुबह 10:15 बजे तक कार्यालय पहुंचना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई भी कर्मचारी शाम 5:15 बजे से पहले दफ्तर नहीं छोड़ सकेगा। सरकार ने इस फैसले को प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और सरकारी कामकाज में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
राज्य सरकार की ओर से यह आदेश 12 मई 2026 को जारी किया गया और इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात कही गई है। विभागीय नोटिफिकेशन में उल्लेख किया गया है कि कार्यालयों में समयपालन सुनिश्चित करने और फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
सरकार ने अपने आदेश में वित्त विभाग द्वारा 13 दिसंबर 2000 को जारी मेमोरेंडम का भी हवाला दिया है। माना जा रहा है कि पुराने प्रशासनिक नियमों को दोबारा सख्ती से लागू करने की कोशिश की जा रही है ताकि कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके और कामकाज में ढिलाई पर रोक लगाई जा सके।
आदेश में साफ कहा गया है कि यह फैसला विभाग के प्रधान सचिव की मंजूरी के बाद लागू किया गया है। जारी दस्तावेज पर पश्चिम बंगाल सरकार के उप सचिव एस. घोषाल के हस्ताक्षर मौजूद हैं। अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की समय पर मौजूदगी से विभागीय कामों के निष्पादन में तेजी आएगी और आम लोगों को भी सरकारी सेवाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।
नई सरकार बनने के बाद प्रशासनिक सख्ती को लेकर यह पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे शुभेंदु सरकार की कार्यशैली का संकेत भी माना जा रहा है, जहां सरकारी दफ्तरों में अनुशासन और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए जा सकते हैं। सरकार चाहती है कि सरकारी कार्यालयों में कार्य संस्कृति को अधिक प्रोफेशनल बनाया जाए और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए। इसी वजह से विभागीय स्तर पर उपस्थिति और कार्य निष्पादन की निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी भी की जा रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय से सरकारी कार्यालयों में समयपालन और कार्यक्षमता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में नई व्यवस्था से सरकारी मशीनरी को अधिक सक्रिय और परिणाम आधारित बनाने में मदद मिल सकती है। वहीं कर्मचारियों के बीच इस आदेश को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं।