IPL 2026 में सिर्फ 16 खिलाड़ियों पर भरोसा करती रही RCB, 8 खिलाड़ी पूरे सीजन नहीं खेल सके एक भी मैच

आईपीएल 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरे साल खिताब अपने नाम किया। टीम ने पूरे लीग चरण में बेहतरीन क्रिकेट खेली और 18 अंकों के साथ अंक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। कप्तान रजत पाटीदार की अगुआई में आरसीबी ने पूरे टूर्नामेंट में अपनी प्लेइंग इलेवन में बहुत कम बदलाव किए, जिसका फायदा टीम को स्थिरता और बेहतर तालमेल के रूप में मिला। यही कारण रहा कि बेंगलुरु प्लेऑफ में पहुंचने वाली पहली टीम बनी और अंततः ट्रॉफी भी जीतने में सफल रही।

दिलचस्प बात यह रही कि 24 खिलाड़ियों वाले स्क्वॉड के बावजूद आरसीबी ने पूरे सीजन में केवल 16 खिलाड़ियों का ही उपयोग किया। टीम मैनेजमेंट ने ज्यादातर मुकाबलों में अपने भरोसेमंद खिलाड़ियों को लगातार अवसर दिया और प्रयोग करने से बचती रही। नतीजा यह रहा कि कई खिलाड़ी पूरे सीजन बेंच पर बैठे रहे और उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला।

दो विदेशी खिलाड़ी पूरे सीजन रहे इंतजार में

आरसीबी के स्क्वॉड में शामिल कुछ विदेशी खिलाड़ियों को पूरे टूर्नामेंट में मौका नहीं मिला। इंग्लैंड के बल्लेबाज जॉर्डन कॉक्स को फ्रेंचाइजी ने 75 लाख रुपये में टीम में शामिल किया था, लेकिन वह पूरे सीजन अंतिम एकादश में जगह नहीं बना सके। टीम के बल्लेबाजी संयोजन में लगातार स्थिरता रहने के कारण उन्हें डेब्यू का अवसर नहीं मिल पाया।

वहीं अनुभवी तेज गेंदबाज रिचर्ड ग्लीसन भी पूरे टूर्नामेंट में बेंच पर ही बैठे रहे। टीम के पास जोश हेजलवुड, भुवनेश्वर कुमार और रासिख सलाम जैसे गेंदबाजों का मजबूत संयोजन मौजूद था, जिसके चलते ग्लीसन को मौका नहीं दिया गया।

पांच ऑलराउंडर नहीं खेल सके एक भी मुकाबला

इस सीजन आरसीबी ने अपने पांच ऑलराउंडरों को भी मैदान पर उतारने की जरूरत महसूस नहीं की। स्वप्निल सिंह, सात्विक देसवाल, विक्की ओस्तवाल, विहान मल्होत्रा और कनिष्क चौहान पूरे सीजन प्लेइंग इलेवन से बाहर रहे।

इन खिलाड़ियों में स्वप्निल सिंह का नाम सबसे चर्चित रहा, क्योंकि वह इससे पहले 2024 सीजन में आरसीबी के लिए मैच खेल चुके हैं। हालांकि इस बार टीम के संतुलन और संयोजन में उन्हें जगह नहीं मिल सकी। दूसरी ओर सात्विक देसवाल, विक्की ओस्तवाल, विहान मल्होत्रा और कनिष्क चौहान अभी तक आईपीएल डेब्यू का इंतजार कर रहे हैं। पूरे सीजन उन्हें अवसर नहीं मिलने से उनका पहला मैच खेलने का सपना फिलहाल अधूरा रह गया।
स्थिर टीम संयोजन बना सफलता की बड़ी वजह

आरसीबी की सफलता का एक बड़ा कारण टीम चयन में निरंतरता भी रही। पूरे सीजन टीम मैनेजमेंट ने खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखा और बार-बार बदलाव करने से बचा। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में खिलाड़ियों ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई, जिसके कारण बेंच स्ट्रेंथ को आजमाने की आवश्यकता कम पड़ी।

कई बार देखा गया कि चोट या खराब फॉर्म के कारण टीमों को लगातार बदलाव करने पड़ते हैं, लेकिन आरसीबी के साथ ऐसा नहीं हुआ। यही वजह रही कि कुछ खिलाड़ी पूरे सीजन अवसर का इंतजार करते रह गए, जबकि मुख्य समूह ने टीम को खिताब तक पहुंचाने का काम किया।

अगले सीजन से पहले रिटेंशन पर रहेगी नजर

अब आईपीएल 2027 से पहले होने वाली रिटेंशन और ट्रेड विंडो पर सभी की निगाहें रहेंगी। जिन खिलाड़ियों को इस सीजन एक भी मैच नहीं मिला, उनके भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। फ्रेंचाइजी यह तय करेगी कि किन खिलाड़ियों को अपने साथ बनाए रखना है और किन्हें रिलीज किया जा सकता है।

विशेष रूप से युवा भारतीय खिलाड़ियों के लिए आगामी सीजन काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर उन्हें अगले साल मौका मिलता है तो वे अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं, लेकिन फिलहाल आईपीएल 2026 उनके लिए सीखने और ड्रेसिंग रूम का अनुभव हासिल करने वाला सीजन बनकर रह गया।

फाइनल में भी नहीं बदला आरसीबी का विजयी संयोजन

गुजरात टाइटंस के खिलाफ खेले गए फाइनल मुकाबले में भी आरसीबी ने अपने विजयी संयोजन से छेड़छाड़ नहीं की। कप्तान रजत पाटीदार ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया और उसी टीम को मैदान पर उतारा जिसने पूरे सीजन शानदार प्रदर्शन किया था।

दूसरी तरफ गुजरात टाइटंस ने खिताबी मुकाबले के लिए एक बदलाव किया और आर. साई किशोर की जगह अरशद खान को अंतिम एकादश में शामिल किया। हालांकि यह बदलाव टीम को जीत नहीं दिला सका और आरसीबी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरी बार आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम कर ली।

आईपीएल 2026 में आरसीबी की सफलता ने यह साबित कर दिया कि कभी-कभी स्थिरता और खिलाड़ियों पर भरोसा किसी भी टीम को चैंपियन बनाने का सबसे बड़ा मंत्र साबित हो सकता है। हालांकि बेंच पर बैठे खिलाड़ियों के लिए यह सीजन निराशाजनक रहा, लेकिन आने वाले वर्षों में उनके लिए नए अवसरों के दरवाजे खुल सकते हैं।