Asia Cup सुपर-4: मैदान से ज़्यादा मैदान के बाहर गर्मी, पाकिस्तान को फिर हराने उतरेगा भारत

एशिया कप 2025 का सुपर-4 मुकाबला एक बार फिर भारत और पाकिस्तान की ऐतिहासिक टक्कर का गवाह बनने जा रहा है, और इस बार सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि मैदान के बाहर का ड्रामा भी उतना ही केंद्र में है। पिछले रविवार को हुए मुकाबले के ठीक आठ दिन बाद, दोनों टीमें फिर से दुबई में आमने-सामने होंगी, लेकिन इस बार हैंडशेक विवाद, मनोवैज्ञानिक दवाब और राजनीतिक इशारों ने खेल के पारंपरिक रोमांच से ज़्यादा सुर्खियां बटोरी हैं।

पिछले मैच के बाद भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव और उनकी टीम द्वारा पाकिस्तान खिलाड़ियों से हाथ न मिलाने का फैसला चर्चा का केंद्र बना। इस पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एशियन क्रिकेट काउंसिल में औपचारिक शिकायत की, और पूरे हफ्ते मीडिया की सुर्खियां इसी विवाद के इर्द-गिर्द घूमती रहीं। इतना ही नहीं, पाकिस्तान की टीम ने अगले मैच में मैदान पर आने में देरी की, और तो और, रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट को हटाने की मांग तक कर दी गई। लेकिन पाइक्रॉफ्ट को हटाया नहीं गया और वही अब रविवार के मुकाबले में भी रेफरी की भूमिका में होंगे।

Unequal मुकाबला या नया अध्याय?

क्रिकेट की सबसे हाई-वोल्टेज प्रतिद्वंद्विता में यह सुपर-4 मुकाबला एक बार फिर भारत की ताकत और पाकिस्तान की अस्थिरता के बीच का संघर्ष बनता दिख रहा है। भारत टूर्नामेंट में अब तक अजेय रहा है, जबकि पाकिस्तान लगातार अपने संयोजन और रणनीति को लेकर असमंजस में है। हालांकि, एशिया कप जैसे टूर्नामेंटों में परिस्थितियां जल्दी पलट सकती हैं, खासकर दुबई की धीमी पिचों पर, जहां अक्सर लो स्कोरिंग मुकाबले देखने को मिलते हैं।

पिछली बार जब पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी चुनी, तो वो फैसला उनके खिलाफ गया। रविवार को दोनों टीमें नई शुरुआत के साथ उतरेंगी, लेकिन अतीत का दबाव और वर्तमान की रणनीति इस मुकाबले को खास बना रहे हैं।

सूर्यकुमार यादव – दबाव में संयम का इम्तिहान

भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव इस बार न सिर्फ अपने नेतृत्व और बल्लेबाज़ी को लेकर चर्चा में हैं, बल्कि उनकी हैंडशेक से परहेज़ और स्पोर्ट्समैन स्पिरिट के परे की बातें भी बहस का मुद्दा बन चुकी हैं। उन्होंने पिछले मैच में नाबाद 47 रन बनाकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी और मैच का समापन एक छक्के से कर, उसे पहलगाम आतंकी हमले के शहीदों को समर्पित किया था।

उन्होंने एक साक्षात्कार में स्वीकार किया कि बाहर की आवाजें बंद करना आसान नहीं होता, और यही चुनौती इस बार भी उनके सामने है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि टीम इन बातों को नजरअंदाज कर मैदान पर फोकस बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

भारत की रणनीति – अनुभवी वापसी और संयोजन का संतुलन

भारत ने ओमान के खिलाफ कुछ खिलाड़ियों को आराम दिया था, जिसमें जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। अब इन दोनों की वापसी से टीम को डेथ ओवर्स और स्पिन विभाग में बड़ी मजबूती मिलेगी। अभिषेक शर्मा का फॉर्म शानदार है, वहीं संजू सैमसन के अर्धशतक ने उन्हें प्लेइंग इलेवन में मजबूती से स्थापित किया है।

अक्षर पटेल की चोट चिंता का विषय है। यदि वो फिट नहीं होते, तो भारत को तीन स्पिनरों की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। वैकल्पिक रूप से वॉशिंगटन सुंदर या रियान पराग जैसे विकल्प मौजूद हैं, लेकिन दोनों अक्षर की भूमिका को पूरी तरह नहीं निभा सकते।

शुभमन गिल, हार्दिक पंड्या, और शिवम दुबे अब तक ज्यादा बल्लेबाज़ी का मौका नहीं पा सके हैं, लेकिन अगर भारत को टॉप ऑर्डर में जल्दी झटका लगता है, तो इन खिलाड़ियों की परीक्षा होनी तय है।

पाकिस्तान – आत्मविश्वास की कमी, असंतुलन की चुनौती

पाकिस्तान की टीम अब अनिश्चितता की ताकत नहीं, बल्कि गुणवत्ता की कमी का शिकार लग रही है। साइम अयूब की लगातार नाकामी और मज़ाक़िया तुलना सईद अनवर से सईद अजमल बनने तक पहुंच चुकी है। फखर ज़मान और शाहीन अफरीदी ही वो दो खिलाड़ी हैं, जिनसे उम्मीदें बची हैं।

टीम में लगातार हो रहे बदलाव, बल्लेबाज़ी क्रम की उलझन और गेंदबाज़ी में अति-निर्भरता—इन सबने पाकिस्तान को कमजोर बना दिया है। हालांकि हैरिस रऊफ को एक अतिरिक्त तेज़ गेंदबाज़ के रूप में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है, खासकर उनकी यूएई के खिलाफ शानदार गेंदबाज़ी को देखते हुए।

पिच रिपोर्ट – स्पिन का बोलबाला, चेज़ करने वालों को फायदा

दुबई की पिच पर हमेशा से स्पिनरों को मदद मिलती रही है और भारत इसका फायदा उठाने की स्थिति में है। यदि अक्षर फिट होते हैं, तो कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती और अक्षर की तिकड़ी विरोधियों को बांधने में सक्षम है। दुबई की पिचों पर पीछा करने वाली टीम को थोड़ा फायदा मिलता रहा है, लेकिन हाल के मुकाबलों में यह पैटर्न कुछ संतुलित हो चुका है।

संभावित प्लेइंग इलेवन

भारत:


अभिषेक शर्मा, शुभमन गिल, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), तिलक वर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, हार्दिक पंड्या, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती

पाकिस्तान:

साहिबज़ादा फरहान, साइम अयूब, फखर ज़मान, सलमान आगा (कप्तान), हसन नवाज़, खुशदिल शाह, मोहम्मद हारिस (विकेटकीपर), मोहम्मद नवाज़, शाहीन अफरीदी, हारिस रऊफ, अबरार अहमद

रविवार का यह मुकाबला सिर्फ दो देशों के क्रिकेटर्स की भिड़ंत नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, रणनीतिक सूझबूझ और राष्ट्रीय गर्व की परीक्षा है। भारत के पास संतुलित टीम, आत्मविश्वास और हालिया प्रदर्शन की बढ़त है, जबकि पाकिस्तान दबाव में, अंदरूनी उलझनों और आउट-ऑफ-फॉर्म खिलाड़ियों के साथ मैदान में उतरेगा।

कौन इस टक्कर में बाज़ी मारेगा—वो तय होगा मैदान पर, लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं कि मुकाबला केवल स्कोरबोर्ड तक सीमित नहीं रहेगा।