पिता की मौत के बाद टल सकती है रिंकू-प्रिया की शादी, जून में बजने वाली थी शहनाई!

भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के परिवार पर इस समय गहरा दुख छाया हुआ है। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन 27 फरवरी की सुबह रिंकू के पिता खानचंद सिंह का निधन हो गया। इस घटना ने न केवल परिवार को शोक में डुबो दिया है, बल्कि क्रिकेटर रिंकू और मछलीशहर की प्रिया सरोज की जून में तय शादी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिंकू के पिता का निधन नोएडा के यथार्थ अस्पताल में हुआ, जहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी। पिता की तबीयत खराब होने की खबर पाकर रिंकू ने टी-20 विश्व कप के दौरान टीम का प्रैक्टिस सेशन छोड़कर घर लौटने का फैसला किया।

पिता का समर्थन और रिंकू की सफलता

रिंकू की क्रिकेट सफलता के पीछे उनके पिता का योगदान अहम माना जाता रहा है। बचपन से ही उन्होंने बेटे का हौसला बढ़ाया और हर कदम पर साथ खड़े रहे। इस दुख की घड़ी में खेल जगत और प्रशंसक परिवार के प्रति संवेदना जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग रिंकू के परिवार को सहानुभूति दे रहे हैं।
शादी की तैयारियों में परिवार की व्यस्तता

क्रिकेटर रिंकू और प्रिया सरोज की शादी जून में होनी थी। दोनों परिवार पहले से ही तैयारियों में लगे हुए थे। पिछले साल 8 जून को दोनों की सगाई लखनऊ के एक होटल में करीबी और पारिवारिक मित्रों की मौजूदगी में संपन्न हुई थी।

शादी की मूल तारीख 18 नवंबर 2025 तय की गई थी, लेकिन आईपीएल और अन्य क्रिकेट व्यस्तताओं के कारण कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा। पिता के निधन के बाद अब यह संभावना जताई जा रही है कि शादी की तारीख आगे बढ़ाई जा सकती है।

परिवार की पृष्ठभूमि

रिंकू का परिवार मूल रूप से बुलंदशहर जिले के गांव दानपुर का निवासी है। करीब 25 साल पहले पिता खानचंद रोजगार की तलाश में अलीगढ़ आकर बस गए थे। बुलंदशहर में उनका आज भी पुश्तैनी घर मौजूद है।

अलीगढ़ में बेहद साधारण परिस्थितियों में पले-बढ़े रिंकू ने दो कमरों वाले घर में बचपन बिताया। उनके पिता ने गोविला गैस एजेंसी में काम करते हुए परिवार का भरण-पोषण किया। आर्थिक तंगी के बावजूद खानचंद ने अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने का पूरा प्रयास किया।

बता दे, रिंकू सिंह ने भारतीय क्रिकेट में अपनी एक खास पहचान बनाई है। अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और मैच जिताऊ प्रदर्शन के लिए जाने जाने वाले रिंकू का सफर प्रेरणादायक रहा है। उनके पिता खानचंद ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया और उनके क्रिकेटिंग सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।