IPC में बदलाव के बिलों पर संसदीय समिति के सदस्यों ने मांगा और समय, अधीर रंजन ने नाम पर जताई आपत्ति

नई दिल्ली। गृह मामलों की संसदीय समिति ने शुक्रवार को जिन मसौदा रिपोर्ट को नहीं अपनाया है, उनमें आईपीसी में बड़े बदलाव वाले तीन बिल शामिल हैं। (i) भारतीय न्याय संहिता- 2023, (ii) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 और तीसरा भारतीय साक्ष्य विधेयक-2023 शामिल है।

विपक्षी नेता अधीर रंजन चौधरी और विभिन्न विपक्षी दलों के कुछ अन्य सदस्यों ने समिति अध्यक्ष से मसौदा रिपोर्ट पढ़ने के लिए कुछ और समय देने को कहा। कुछ सदस्यों ने विधेयकों के नाम का मुद्दा उठाया। बैठक की अगली तारीख 6 नवंबर, 2023 है। सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस के पी. चिदंबरम समेत कुछ विपक्षी सदस्यों ने समिति के अध्यक्ष बृजलाल को पत्र लिखकर मसौदा रिपोर्ट का अध्ययन करने और अपने विचार दाखिल करने के लिए और समय मांगा है क्योंकि इसमें तीन अलग-अलग विधेयक शामिल हैं।

अब 6 नवंबर को होने वाली बैठक में भारतीय न्याय संहिता-2023 की 246 मसौदा रिपोर्ट, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 247 मसौदा रिपोर्ट और भारतीय साक्ष्य विधेयक-2023 की 248 मसौदा रिपोर्ट पर विचार कर उसे अंगीकार किया जा सकता है। संसदीय समिति ने तीन महीने तक इन तीनों विधेयकों की समीक्षा की और विधि आयोग समेत विभिन्न विशेषज्ञों से 11 बैठकों के दौरान राय ली गई है। इन तीनों विधेयकों को विगत 11 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया था।

इन तीनों बिलों को भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860, आपराधिक दंड प्रक्रिया (CRPC) 1973 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के अंग्रेजों के बनाए कानूनों की जगह लाया जाएगा। तीनों नए बिलों को पेश करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि इन तीनों नए कानूनों से संविधान के तहत नागरिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी।

शाह ने कहा कि ब्रिटिशकाल के इन कानूनों का मकसद न्याय देना नहीं, बल्कि अपने शासन की रक्षा के लिए लोगों को दंडित करना था, लेकिन अब सरकार इन मूलभूत पहलुओं में बदलाव कर रही है। इन कानूनों का मकसद जनता को दंडित करना नहीं, बल्कि न्याय देना है। इस प्रक्रिया में सजा केवल अपराध को रोकने की भावना से आवश्यकतानुसार दी जाएगी।