कोरोना संक्रमण के मामले उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे है। प्रवासी मजदूरों की वजह से अब उत्तर प्रदेश के गांवों में भी कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। राज्य में अब तक 6983 लोग संक्रमित हुए हैं। इनमें 1820 प्रवासी हैं। वहीं पिछले 24 घंटे में राज्य में कोरोना के 261 नए मरीज मिले है। बुधवार को कोरोना से 5 और मरीजों की मौत हो गई। मेरठ, गाजियाबाद, अलीगढ़, गोरखपुर और मुजफ्फरनगर में एक-एक संक्रमित ने दम तोड़ दिया। इस बीमारी से अब तक 182 संक्रमित लोगों की मौत हो गई है।
सामने आई पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही
इसके साथ यूपी के संत कबीरनगर जिले से एक ऐसे घटना सामने आई है जिसने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। दरअसल, पुलिस ने एक पिता को फोन पर ये जानकारी दी कि अस्पताल में भर्ती उनके बेटे की कोरोना से मौत हो गई है और कुछ ही देर बाद मृतक का शव सील पैक होकर पिता के सामने पहुंच गया। रात भर घरवाले और गांव वाले मातम मनाते रहे। सुबह जब पिता अपने दूसरे बेटे के साथ शव लेकर अंत्येष्टि स्थल पर पहुंचा और कोविड 19 प्रोटोकॉल के तहत शव जलाने से पहले जैसे ही पिता ने मृतक बेटे का चेहरा देखा तो पिता और पुलिस के होश उड़ गए। क्योंकि मृतक उनका बेटा नहीं था, बल्कि वह दूसरे कोरोना मरीज का शव था। ये पूरा मामला महुली थाना क्षेत्र के मथुरापुर गांव का है।
दरअसल, मृतक उनका बेटा नहीं, बल्कि धर्मसिंहवां थाना क्षेत्र का रहने वाला एक युवक था, और कुछ दिन पहले ही मुंबई से बस्ती में आया था, और उसकी तबीयत खराब होने की वजह बस्ती के कैली अस्पताल में इलाज चल रहा था और उसकी रिपोर्ट पॉज़िटिव भी आई थी। उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। दरअसल, दोनों युवकों का एक ही अस्प्ताल में इलाज चल रहा था। मृतक युवक का बेड कुमार (बदला हुआ नाम) के बेड के नजदीक था।
अपर पुलिस अधीक्षक असित श्रीवास्तव का कहना है कि कोरोना से मौत की सूचना मिली थी। कैली अस्पताल बस्ती से हमें जो प्राथमिक सूचना प्राप्त हुई थी। हमको उसमें मृतक का नाम कुमार (बदला हुआ नाम) बताया गया था जोकि थाना महोली का रहने वाला है। डेड बॉडी को कैली अस्पताल से पूरी तरीके से सील बंद करके शव वाहन के जरिए गांव लाया गया। परिजनों को शव के आकार प्रकार देखकर कुछ संदेह हुआ और उसका मुंह खोल कर देखा गया तो वास्तव में मृतक उनका बेटा नहीं था। उसके बाद इसे संशोधित करते हुए डेड बॉडी को शव वाहन से उसके अपने पैतृक गांव में पहुंचाया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने मामले को हलके में लियास्वास्थ्य विभाग भी पूरे मामले को हल्के में ले कर खुद को बचाने की कोशिश की। डिप्टी सीएमओ डॉक्टर मोहन झा का कहना है कि अभी इस पर जांच चल रही है। इसके लिए एक टीम गठित की गई है। लेकिन कभी कभी कन्फ्यूजन हो जाता है अब फ़िलहाल जांच चल रही है। जांच में आरोपी पाया जाएगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।