नई दिल्ली। ईंधन की कीमतों के मोर्चे पर उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। लगातार दूसरे महीने वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों के दामों में कटौती दर्ज की गई है। बीते माह के शुरुआती दिनों में जहां देश की राजधानी में वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में उल्लेखनीय गिरावट आई थी, वहीं इस नए महीने की शुरुआत में भी इसके दामों में भारी कमी की गई है। इन बीते दो महीनों की संयुक्त कटौती को देखा जाए तो उन्नीस किलोग्राम वाले इस गैस सिलेंडर के दाम काफी हद तक नीचे आ गए हैं। इस बड़ी राहत के बाद देश के विभिन्न महानगरों जैसे कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में भी वाणिज्यिक सिलेंडरों के दामों में कमी आई है, जिससे व्यापारिक वर्ग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस बीच आम जनता के उपयोग में आने वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों के दाम बिना किसी बदलाव के अपने पुराने स्तर पर ही स्थिर बने हुए हैं।
छोटे सिलेंडरों के दाम भी घटेवाणिज्यिक सिलेंडरों की कीमतों में आई गिरावट के साथ ही छोटे सिलेंडरों का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को भी राहत मिली है। पांच किलोग्राम वाले विशेष श्रेणी के छोटे एलपीजी सिलेंडर के दाम में भी देश की राजधानी में कुछ रुपयों की कमी की गई है, जिसके बाद अब यह सिलेंडर उपभोक्ताओं को कम कीमत पर उपलब्ध हो रहा है। इसके विपरीत यदि घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की बात की जाए, तो दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई में इनके दाम पुराने स्तर पर ही बने हुए हैं। वैश्विक स्तर पर उपजे संकट की शुरुआत के बाद से घरेलू सिलेंडरों के दामों में कुछ मौकों पर बढ़ोतरी अवश्य हुई थी, जिसमें मार्च और जून के महीनों में की गई वृद्धि शामिल है, लेकिन वर्तमान में इसके दाम स्थिर हैं।
पूर्व में आई भारी तेजी और वर्तमान स्थितिअगर पिछले कुछ महीनों के रुझानों पर नजर डालें तो साल के शुरुआती दौर में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में एकमुश्त बहुत बड़ी वृद्धि की गई थी। उस भारी बढ़ोतरी के कारण इतिहास में पहली बार उन्नीस किलोग्राम वाले वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमत एक बड़े आंकड़े को पार कर गई थी। साल के शुरुआती महीनों में जहां इसके दाम काफी कम थे, वहीं बाद में इसमें अप्रत्याशित उछाल देखा गया था।
वैश्विक संकट और भारत की आत्मनिर्भरतावर्तमान वैश्विक
परिस्थितियों के कारण भारत जैसे विकासशील देशों के सामने ऊर्जा सुरक्षा को
लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया था। भारत अपनी एलपीजी आवश्यकताओं की पूर्ति
के लिए काफी हद तक विदेशी आयात पर ही निर्भर रहता है। इस वैश्विक उथल-पुथल
से पहले एक बड़े खाड़ी देश से भारी मात्रा में इसका आयात किया जाता था,
लेकिन संकट शुरू होने के बाद आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई। इस
चुनौती से निपटने के लिए देश के भीतर ही घरेलू स्तर पर एलपीजी के उत्पादन
को बढ़ाने के प्रयास तेज किए गए। इसके साथ ही बाजार में अनुचित गतिविधियों
और कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासनिक नियमों में काफी कड़ाई की गई। इन
सभी प्रयासों का परिणाम अब सामने आने लगा है और बाजार में स्थिति धीरे-धीरे
सामान्य हो रही है।