जयपुर। राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और विश्व प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनृत्य घूमर को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश की उपमुख्यमंत्री ने जयपुर में आयोजित एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की कि इस वर्ष आगामी उन्नीस नवंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर एक साथ भव्य घूमर फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। एक प्रमुख सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में घूमर नृत्य की कई मनमोहक और चित्ताकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं, जिनकी वहां उपस्थित जनसमूह ने भूरि-भूरि सराहना की।
नया ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित करने का संकल्पसांस्कृतिक आयोजन की सराहना करते हुए उपमुख्यमंत्री ने पुरानी यादों को ताजा किया और बताया कि पिछले वर्ष उन्नीस नवंबर को आयोजित हुए घूमर महोत्सव ने अपनी भव्यता के कारण एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपनी जगह बनाई थी। उस समय सात संभाग मुख्यालयों पर एक साथ हजारों महिलाओं ने घूमर नृत्य करके एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया था। इस बार राज्य सरकार की योजना इसे और अधिक व्यापक स्वरूप देने की है। सरकार प्रदेश के सभी जिलों में इसे बहुत बड़े पैमाने पर आयोजित करने जा रही है, ताकि पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए एक नया ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया जा सके। पूर्व में भी एक अन्य बड़े आयोजन में पंद्रह हजार से अधिक महिलाओं द्वारा घूमर नृत्य किए जाने पर संसदीय प्रमुख ने इस कला की भूरि-भूरि प्रशंसा की थी।
युवाओं की भागीदारी और लोक कला का संरक्षणउपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि घूमर सिर्फ एक नृत्य शैली नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और परंपरा की आत्मा है। आज की युवा पीढ़ी, विशेषकर युवतियों में अपनी लोक कलाओं के प्रति बढ़ता उत्साह बेहद सुखद और सकारात्मक संदेश देता है। हमारी परंपराओं और लोक धरोहर को जीवंत बनाए रखने के लिए इस तरह के आयोजनों का समय-समय पर होना बेहद जरूरी है, अन्यथा समय के साथ इनका महत्व कम होने का खतरा हमेशा बना रहता है। यह प्रसन्नता की बात है कि ऐसे आयोजन प्रदेश की लोक कला, लोक संस्कृति और पारंपरिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक बहुत ही प्रभावी और सशक्त माध्यम बन रहे हैं।
वैश्विक प्रचार और पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाअपनी बात
को आगे बढ़ाते हुए उपमुख्यमंत्री ने युवाओं से एक विशेष अपील की। उन्होंने
कहा कि आज के तकनीकी युग में युवा वर्ग सामाजिक संचार माध्यमों का उपयोग
करके राजस्थान की इन अनूठी लोक कलाओं और सांस्कृतिक आयोजनों का ज्यादा से
ज्यादा प्रचार-प्रसार करें। ऐसा करने से देश और दुनिया के लोग राजस्थान की
इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से सीधे जुड़ सकेंगे, जिससे राज्य में पर्यटन
को भी बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा। यदि इन महान परंपराओं को समय के साथ आगे
नहीं बढ़ाया गया, तो धीरे-धीरे समाज में इनका महत्व कम होता जाएगा, इसलिए
इसमें युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार की
प्राथमिकता सांस्कृतिक परंपराओं को जनभागीदारी और नवाचार के साथ जोड़कर एक
स्थायी मॉडल विकसित करने की है, ताकि प्रदेश का पर्यटन और ज्यादा व्यापक,
सशक्त और वैश्विक स्तर पर आकर्षक बन सके।