मध्य प्रदेश में शराब दुकानें खुलेंगी या नहीं, इसे लेकर सरकार और ठेकेदार आमने-सामने आ गए हैं। ठेकेदार लॉकडाउन में दुकानें नहीं खोलना चाहते, जबकि सरकार ग्रीन जोन वाले 24 जिलों में राजस्व जुटाने दुकानें खोलने का आदेश दे चुकी है। सरकार ने ठेकेदारों को स्पष्ट कर दिया है कि यदि वे जिद पर अड़े रहे तो दूसरे विकल्पों पर विचार करेंगे। संभवत: ठेके रद्द भी किए जा सकते हैं। दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों के 30 शराब ठेकेदारों की याचिका पर सरकार से पूछा है कि जब लॉकडाउन में शराब दुकानें खोलने का समय सरकार ने कम कर दिया है तो इनके ठेकों की पूर्व निर्धारित बिड राशि क्यों नहीं घटाई। कोर्ट ने आबकारी आयुक्त व सरकार को नोटिस जारी कर 19 मई तक जवाब मांगा है। उल्लेखनीय है कि निविदा के वक्त 14 घंटे शराब दुकानें खोलने की अनुमति थी, जबकि सरकार ने अब 4-5 घंटे दुकानें खोलने का आदेश दिया है।
आखिर अब सवाल उठता है कि सरकार शराब की दुकानें खुलवाने पर क्यों जोर दे रही है? तो बता दे, सरकार को दो माह में 1800 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ, मई में एक हजार करोड़ का नुकसान होगा। ऐसे में ठेकेदारों की अलग परेशानी है. ठेकेदारों को मिनिमम गारंटी कोटा में तय शराब खरीदनी पड़ेगी, लेकिन उतने खरीदार नहीं होंगे। एक्साइज ड्यूटी तय चुकाना पड़ेगी। कोटे से स्टॉक बढ़ेगा। मिनिमम कोटा मतलब मई का टारगेट देखा जाए तो 10% के हिसाब से ठेकेदारों को ड्यूटी के एक हजार करोड़ चुकाने होंगे।
सरकार का पक्ष - ग्रीन जोन में सुबह 7 से शाम 7 बजे तक बिके
- ठेकेदार नियमानुसार कोटा उठाएं। ड्यूटी भरें
- रेड जोन में दुकानें नहीं खुलेंगी। रेड जोन के बाहरी क्षेत्र में दिक्कत नहीं
- ठेकेदार नहीं मानें तो दूसरे विकल्पों पर विचार
- ब्लैक में कहीं भी शराब नहीं बेचने देंगे
ठेकेदारों का पक्ष - सरकार को 17 मई तक रुकने में क्या दिक्कत है
- ठेकेदार कोटा उठा लेंगे, खरीदार नहीं आए तो स्टॉक का क्या?
- रेड जोन में शराब बनती है, ग्रीन में खतरा रहेगा
- जितना माल हम बेचें, उनकी ही ड्यूटी ली जाए
- 2 माह नुकसान हुआ। कोटे के बंधन से मुक्त हों