17 साल पुराने वैवाहिक विवाद का हुआ अंत, सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला और पायल के तलाक को दी मंजूरी

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल के बीच लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद का अंत हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दोनों पक्षों की आपसी सहमति के आधार पर विवाह समाप्त करने की प्रक्रिया को मंजूरी देने पर सहमति जताई। इसके साथ ही लगभग 17 वर्षों से अलग रह रहे इस दंपति के बीच लंबे समय से चला आ रहा कानूनी विवाद समाप्त होने की दिशा में बढ़ गया है।

आपसी सहमति से खत्म होगा विवाह


यह मामला उस समय सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा जब उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें विवाह समाप्त करने से इनकार किया गया था। सुनवाई के दौरान उमर अब्दुल्ला और पायल ने संयुक्त रूप से सर्वोच्च न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर बताया कि उन्होंने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने और सभी लंबित विवादों का समाधान कर लिया है।

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायालय को बताया कि दोनों ने अपने मतभेदों को समाप्त करते हुए स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। इसके बाद न्यायालय ने कहा कि वह इस संबंध में उचित आदेश पारित करेगा।

1994 में हुई थी शादी

उमर अब्दुल्ला और पायल की मुलाकात दिल्ली के ओबेरॉय होटल में काम करने के दौरान हुई थी। दोनों ने वर्ष 1994 में विवाह किया था। उनके दो बेटे हैं, जिनके नाम जहीर और जमीर हैं। वर्ष 2011 में उमर अब्दुल्ला ने सार्वजनिक रूप से दोनों के अलग होने की जानकारी दी थी। इसके बाद से दोनों अलग-अलग रह रहे थे।

संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दी गई अर्जी

दोनों पक्षों ने इसी महीने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सर्वोच्च न्यायालय से विवाह को आपसी सहमति से समाप्त करने की अनुमति मांगी थी। यह अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष अधिकार प्रदान करता है। इसी आधार पर न्यायालय ने मामले में आगे की कार्रवाई करने की बात कही।

लंबे कानूनी विवाद का हुआ समापन

दोनों पक्षों के बीच सभी लंबित विवादों के निपटारे के बाद अब इस मामले का शांतिपूर्ण समाधान हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी के साथ उमर अब्दुल्ला और पायल का वैवाहिक संबंध कानूनी रूप से समाप्त होने की प्रक्रिया पूरी होने जा रही है। यह मामला पिछले कई वर्षों से न्यायालय में लंबित था, जिसका अब आपसी सहमति से समाधान निकल आया है।