पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच भारत ने एक बार फिर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। तीन भारतीय नाविकों की मौत की घटना के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बातचीत कर इस मामले पर भारत की गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार से जुड़े जहाजों को किसी भी प्रकार के सैन्य टकराव का निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है।
विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपने अमेरिकी समकक्ष से बात की और कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमला बेहद चिंताजनक है। भारत का मानना है कि वैश्विक व्यापार और समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है और इस प्रकार की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप नहीं मानी जा सकतीं।
ओमान की खाड़ी की घटना के बाद बढ़ा तनावहाल ही में ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर को लेकर हुई घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए थे। जहाज पर भारतीय नागरिकों सहित विभिन्न देशों के चालक दल के सदस्य मौजूद थे। घटना के बाद तीन भारतीय नाविक लापता हो गए थे, जिनकी बाद में मृत्यु की पुष्टि की गई। इस घटनाक्रम के बाद भारत ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित पक्षों के साथ उच्च स्तर पर संवाद शुरू किया।
इससे पहले भी विदेश मंत्री एस. जयशंकर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वैश्विक नीतियों और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका के रुख पर सवाल उठा चुके हैं। फिनलैंड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने रूस से तेल आयात के विषय पर भी अपनी स्पष्ट राय रखी थी। उनका कहना था कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेता है और इस नीति में किसी बाहरी दबाव की भूमिका नहीं हो सकती।
तड़के हुई फोन पर बातचीतसूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह विदेश मंत्री जयशंकर ने सीधे मार्को रूबियो से संपर्क किया और घटना को लेकर भारत की आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में चलने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी भी परिस्थिति में कमर्शियल शिपिंग को संघर्ष का लक्ष्य नहीं बनाया जाना चाहिए।
घटना के बाद जहाज पर मौजूद भारतीय चालक दल के तीन सदस्य लापता बताए गए थे। बाद में खोज एवं बचाव अभियान के दौरान उनके शव बरामद किए गए। केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने तीन भारतीयों की मौत की पुष्टि की थी। मृतकों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पट्नाला सुरेश के रूप में हुई।
जिस टैंकर को बनाया गया निशानाबताया गया कि घटना ओमान की खाड़ी में संचालित एक पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर से जुड़ी थी। जहाज पर कुल 28 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें 24 भारतीय नागरिक थे। इसके अलावा चालक दल में दो पाकिस्तानी, एक रूसी और एक यूक्रेनी नागरिक भी शामिल था।
घटना के बाद व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि लापता लोगों की तलाश जारी रही। बाद में तीन भारतीयों के निधन की पुष्टि होने से पूरे देश में शोक का माहौल बन गया।
अमेरिकी पक्ष ने भी दी थी प्रतिक्रियाइस घटना के बाद अमेरिकी पक्ष ने भी अपनी ओर से प्रतिक्रिया दी थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया था कि संबंधित जहाज के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि जहाज का चालक दल उनके निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था, जिसके चलते यह कदम उठाया गया।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास का क्षेत्र पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है। ऐसे माहौल में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई का असर वैश्विक शिपिंग, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।