नई दिल्ली। राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े कथित गबन और चोरी के मामले को लेकर सियासी बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में अयोध्या से भाजपा के पूर्व सांसद और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे विनय कटियार ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि आने वाले समय में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक की जांच में वित्तीय अनियमितताओं और चोरी से जुड़े कई तथ्य सामने आ चुके हैं। कटियार का आरोप है कि इस पूरे मामले में चंपत राय के साथ-साथ अनिल मिश्रा और विनोद राव की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और यदि आरोप साबित होते हैं तो उन्हें भी जेल जाना पड़ सकता है।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान विनय कटियार ने दावा किया कि इस पूरे मामले को लेकर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगातार बातचीत हो रही है। उन्होंने कहा कि देर रात करीब डेढ़ बजे प्रधानमंत्री ने उनसे फोन पर संपर्क किया और मामले की स्थिति के बारे में जानकारी ली। कटियार के अनुसार प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि आगे क्या स्थिति बन सकती है, जिस पर उन्होंने जवाब दिया कि जांच अपनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रही है और सच्चाई सामने आ जाएगी।
कटियार ने कहा कि जब वह दिल्ली पहुंचे तो उन्होंने देखा कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और विनोद राव भी वहां मौजूद थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करनी थी तो पहले उनसे भी संवाद किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन केवल एक संगठन का नहीं, बल्कि हजारों कारसेवकों और उन लोगों के संघर्ष का परिणाम है जिन्होंने वर्षों तक इसके लिए त्याग और बलिदान दिया। ऐसे में यदि मंदिर से जुड़े धन के उपयोग में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ भी जुड़ा हुआ विषय है।
पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि चढ़ावे के धन में गंभीर स्तर पर गड़बड़ी हुई है और इस वजह से भक्तों का विश्वास प्रभावित हुआ है। उन्होंने दोहराया कि फिलहाल कुछ लोग कानूनी कार्रवाई से बचे हुए दिखाई दे रहे हैं, लेकिन यदि जांच निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़ती है तो भविष्य में उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई संभव है। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसे जवाब देना ही होगा।
चंपत राय का जिक्र करते हुए विनय कटियार ने एक पुराना प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले चंपत राय उनके आवास के पीछे रहने आए थे। उस समय उन्होंने उन्हें सलाह दी थी कि कारसेवकपुरम में रहना अधिक उचित रहेगा या फिर चाहें तो उनके घर पर भी आ सकते हैं। कटियार के अनुसार उनकी इस बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि उसी समय उन्होंने मजाकिया लेकिन गंभीर अंदाज में कहा था कि शायद उनका भाग्य इस समय ठीक नहीं चल रहा है।
विनय कटियार ने विनोद राव पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव के अनुसार विनोद राव का व्यवहार ठीक नहीं रहा। कटियार ने दावा किया कि एक बार जब वह राम मंदिर पहुंचे तो उनसे पूछा गया कि वह किसकी अनुमति लेकर वहां आए हैं। इस घटना के बाद वह वापस लौट गए। उन्होंने कहा कि बाद में उन्होंने फोन कर विनोद राव से कहा था कि उनकी वहां ज्यादा समय तक मौजूदगी नहीं रहने वाली है और उन्हें दूसरी जगह भेज दिया जाएगा।
हालांकि अनिल मिश्रा को लेकर विनय कटियार का रुख कुछ अलग नजर आया। उन्होंने कहा कि अनिल मिश्रा व्यक्तिगत रूप से सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं, लेकिन परिस्थितियों के कारण वह भी इस पूरे विवाद में घिर गए हैं। कटियार ने बताया कि जब वह लखनऊ से दिल्ली पहुंचे थे तो उन्होंने अनिल मिश्रा से फोन पर बात की थी। उस समय वह दक्षिण भारत में अपनी आंखों का इलाज करा रहे थे। उन्होंने उन्हें अपने पास आने के लिए भी कहा था, लेकिन हालात ऐसे बने कि उनका नाम भी विवाद में आ गया।
विनय कटियार के बयानों से यह संकेत मिलता है कि उनके अनुसार केंद्र सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं। उनका मानना है कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता।
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई अन्य नेताओं ने भी हाल के दिनों में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी कुछ समय पहले चढ़ावा मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि इसे साधारण चोरी नहीं बल्कि बेहद गंभीर घटना के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके बयान के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
बताया जाता है कि चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्रा स्वयं अयोध्या पहुंचे थे और पूरे मामले की जानकारी ली थी। उस समय तक विशेष जांच दल का गठन भी नहीं हुआ था। बाद में उन्होंने विभिन्न मीडिया संस्थानों से बातचीत के दौरान मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल उठाए थे। अब एसआईटी की जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे मामले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।