राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने गुरुवार को फरवरी 2026 के खुदरा महंगाई आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के अनुसार, इस महीने देश में CPI आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 3.21 प्रतिशत दर्ज की गई, जो जनवरी में 2.75 प्रतिशत थी। महंगाई में यह बढ़ोतरी मुख्यतः खाने-पीने की वस्तुओं, कपड़ों और हाउसिंग-यूटिलिटी सर्विसेज की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई। गौरतलब है कि ये आंकड़े आधार वर्ष 2024 की नई सीरीज पर आधारित हैं।
खाद्य महंगाई में आई तेज़ी, 3.47% दर्जराष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में खाद्य मुद्रास्फीति 3.47 प्रतिशत तक बढ़ गई, जबकि जनवरी में यह केवल 2.13 प्रतिशत थी। इस दौरान आभूषणों जैसे सोना, चांदी, हीरा और प्लेटिनम की कीमतों में तेजी देखी गई। इसके साथ ही नारियल, टमाटर और फूलगोभी की कीमतें भी बढ़ीं। वहीं, लहसुन, प्याज, आलू, अरहर और लीची की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.37 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में 3.02 प्रतिशत दर्ज की गई।
RBI की MPC बैठक अप्रैल में, रेपो रेट पर असरपिछले सात महीनों में छह महीनों तक CPI आधारित महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के 2-6% लक्ष्य के निचले बैंड पर रही है। हालांकि, RBI ने हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति में प्रमुख पॉलिसी रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इसी कारण, RBI अपनी अप्रैल की शुरुआत में होने वाली अगली MPC बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता है।
देश की मौजूदा महंगाई दर नियंत्रण मेंCPI में खाने-पीने की वस्तुएं महंगाई का एक बड़ा हिस्सा होती हैं। जून 2025 से खाद्य महंगाई नेगेटिव रही और कीमतें एक साल पहले की तुलना में कम दर्ज की गईं। इसके कारण CPI आधारित महंगाई अक्टूबर 2025 में 0.25% के अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गई थी। वहीं, खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई रिकॉर्ड -5.02% पर पहुँच गई थी।