सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर शुरू हुई बहस लगातार तेज होती जा रही है। बेरोजगारी, युवाओं की निराशा और मौजूदा व्यवस्था पर तंज कसने के उद्देश्य से शुरू हुआ यह व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और अब इस मुद्दे पर फिल्म इंडस्ट्री से लेकर संगीत जगत तक की हस्तियां भी खुलकर अपनी राय रख रही हैं। हाल ही में अभिनेता विवेक ओबेरॉय और भजन गायक कन्हैया मित्तल ने इस पूरे विवाद पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी।
गुजरात के वडोदरा में आयोजित एक निजी कार्यक्रम के दौरान जब मीडिया ने अभिनेता विवेक ओबेरॉय से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने काफी संतुलित और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण अपनाया। विवेक ओबेरॉय ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक और हर समूह को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। उनके अनुसार अलग-अलग विचार और विरोध की आवाजें किसी भी मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में विभिन्न मतों का होना जरूरी है और लोगों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
दूसरी ओर हरियाणा के करनाल में भजन गायक कन्हैया मित्तल ने इस अभियान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को विपक्षी विचारधारा से प्रेरित प्रचार अभियान बताया। कन्हैया मित्तल ने कहा कि इस मुहिम को शुरू करने वाला व्यक्ति पहले आम आदमी पार्टी से जुड़ा रहा है और अब विदेश में बैठकर भारत की राजनीति और युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी को वास्तव में देश की चिंता है, तो उसे भारत में रहकर सकारात्मक योगदान देना चाहिए।
कन्हैया मित्तल ने खासतौर पर युवाओं, विशेषकर जेन जी से अपील करते हुए कहा कि अपनी बात रखना गलत नहीं है, लेकिन किसी भी विचारधारा या अभियान के पीछे आंख बंद करके नहीं चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकारों और राजनीतिक दलों से सवाल पूछने हैं, तो हर पार्टी से समान रूप से पूछने चाहिए। किसी एक दल या सरकार को निशाना बनाना उचित नहीं है। युवाओं को किसी के बहकावे में आने के बजाय अपनी स्वतंत्र सोच विकसित करनी चाहिए और अपनी पहचान खुद बनानी चाहिए।
अपने बयान के दौरान कन्हैया मित्तल ने खुद को मजाकिया अंदाज में ‘कॉकरोच’ बताते हुए कहा कि उनके पास संगीत की कोई बड़ी डिग्री नहीं है, लेकिन फिर भी उन्होंने मेहनत और संघर्ष के दम पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को उन युवाओं की चिंता करनी चाहिए जो पढ़ाई और डिग्री हासिल करने के बावजूद रोजगार पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
दरअसल, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान कुछ बेरोजगार युवाओं को लेकर टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी में ‘कॉकरोच’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया पर काफी विवाद खड़ा हो गया। हालांकि बाद में जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया था कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया और उनका इशारा फर्जी डिग्री रखने वाले लोगों की ओर था, न कि सभी बेरोजगार युवाओं की तरफ।
लेकिन सोशल मीडिया पर इस बयान को कई युवाओं ने अपने आत्मसम्मान से जोड़ लिया। इसके बाद अभिजीत दीपके नाम के एक युवक ने व्यंग्य के रूप में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक डिजिटल अभियान शुरू किया। देखते ही देखते यह मुहिम इंटरनेट पर वायरल हो गई और लाखों युवा इससे जुड़ने लगे। इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसके फॉलोअर्स तेजी से बढ़े और हजारों लोगों ने इस अभियान का समर्थन करना शुरू कर दिया।
इस पूरे अभियान के जरिए युवा बेरोजगारी, सरकारी व्यवस्था और मौजूदा राजनीतिक माहौल पर व्यंग्यात्मक तरीके से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। कुछ लोग इसे युवाओं के भीतर बढ़ते असंतोष और गुस्से की नई आवाज मान रहे हैं, जबकि कई लोगों का मानना है कि यह केवल सोशल मीडिया पर चलने वाला एक अस्थायी ट्रेंड है। बावजूद इसके, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ फिलहाल इंटरनेट और सार्वजनिक चर्चाओं का बड़ा मुद्दा बनी हुई है।