बारिश और जगह-जगह जमा पानी के बीच देश के कई हिस्सों में डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में इस साल डेंगू के मरीज मिले हैं। हालांकि, उपलब्ध सरकारी आंकड़े पूरे साल की स्थिति को एक साथ नहीं दिखाते। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल के अनुसार 28 फरवरी 2026 तक देश में 6,927 डेंगू मामले और 10 मौतें दर्ज की गई थीं। इसके बाद अलग-अलग राज्यों और शहरों से स्थानीय स्तर पर नए मामलों की जानकारी सामने आई है।
पश्चिम बंगाल में 10 सितंबर तक 5,432 लोगों की डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव आने की जानकारी सामने आई है। राज्य में स्वास्थ्य विभाग ने अलग-अलग इलाकों में निगरानी और जांच बढ़ाई है। वहीं, कोलकाता में 13 सितंबर तक 461 डेंगू मामले दर्ज किए गए और शहर के एक वार्ड को हॉटस्पॉट के तौर पर चिन्हित किया गया।
तमिलनाडु में भी सरकारी आंकड़ों में 28 फरवरी तक 2,873 मामले दर्ज थे, जबकि केरल में इसी अवधि तक 670 और महाराष्ट्र में 786 मामले सामने आए थे। मध्य प्रदेश में 94 और राजस्थान में 120 मामले दर्ज किए गए थे। ये आंकड़े फरवरी तक के हैं, इसलिए इन्हें सितंबर की मौजूदा स्थिति का आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
कोयंबटूर में भी डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी की सूचना है। 13 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जिले में मामले पिछले साल की तुलना में 476 अधिक बताए गए और केवल कोयंबटूर कॉरपोरेशन क्षेत्र में 849 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई। स्थानीय अधिकारियों ने मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान कर उन्हें खत्म करने का अभियान तेज किया है।
बारिश के बाद क्यों बढ़ता है डेंगू का खतरा?डेंगू वायरस संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। बारिश के बाद घरों और आसपास के इलाकों में जमा पानी इन मच्छरों के प्रजनन के लिए जगह उपलब्ध करा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक डेंगू फैलाने वाले मच्छर दिन के समय भी सक्रिय रहते हैं, इसलिए केवल रात में मच्छरों से बचाव करना पर्याप्त नहीं है।
घर के कूलर, गमले, पानी की टंकियों, पुराने टायरों और ऐसे दूसरे बर्तनों में पानी जमा होने पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। भारत के NCVBDC की सलाह है कि कूलर और छोटे पानी जमा करने वाले कंटेनरों का पानी कम से कम सप्ताह में एक बार निकालकर उन्हें साफ किया जाए।
डेंगू से बचने का सही तरीकाडेंगू की रोकथाम में सबसे महत्वपूर्ण कदम मच्छरों के काटने से बचना और उनके प्रजनन की जगह खत्म करना है। WHO और NCVBDC की सलाह के अनुसार घर के आसपास पानी जमा न होने दें, पानी रखने वाले बर्तनों और टंकियों को ढककर रखें तथा कूलर और दूसरे कंटेनरों को नियमित रूप से खाली और साफ करें।
मच्छरों से बचने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना, रिपेलेंट का इस्तेमाल करना और जरूरत के अनुसार मच्छरदानी का उपयोग करना भी मददगार है। दिन में सोने वाले लोगों के लिए भी मच्छरदानी की सलाह दी जाती है, क्योंकि डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर दिन में सक्रिय रहते हैं।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करेंडेंगू में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतली, उल्टी और त्वचा पर दाने जैसे लक्षण हो सकते हैं। WHO के अनुसार कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
बुखार कम होने के बाद पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, खून की उल्टी या मल में खून, अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। ये गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत हो सकते हैं।
डेंगू की आशंका होने पर जांच और उपचार के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डेंगू के इलाज के लिए फिलहाल कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है और बीमारी की स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय देखभाल जरूरी होती है।