कैंसर का एक बड़ा कारण बन रहे हैं ये संक्रमण, भारत में 1.9 लाख मामलों से जुड़ा चौंकाने वाला आंकड़ा

कैंसर को अक्सर तंबाकू, शराब, बढ़ते वजन, जीवनशैली या आनुवंशिक कारणों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन एक नए वैश्विक अध्ययन ने कैंसर और कुछ संक्रमणों के बीच संबंध को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने रखे हैं। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के अनुसार, भारत में 2024 के दौरान करीब 1.9 लाख नए कैंसर मामले ऐसे थे, जिन्हें कुछ वायरस और बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों से जोड़ा गया। यह अध्ययन 28 सितंबर 2026 को द लैंसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित हुआ।

यहां यह समझना जरूरी है कि 1.9 लाख का आंकड़ा किसी एक संक्रमण से होने वाले कैंसर का आंकड़ा नहीं है। शोधकर्ताओं ने 2024 में दर्ज नए कैंसर मामलों और अलग-अलग संक्रमणों से जुड़े कैंसर के अनुमानित हिस्से के आधार पर यह संख्या निकाली है। भारत में 2024 के दौरान करीब 15.62 लाख नए कैंसर मामलों का अनुमान था और संक्रमण से जुड़े मामले कुल कैंसर बोझ के लगभग 12 प्रतिशत के बराबर थे।

दुनिया में 23 लाख कैंसर मामले संक्रमण से जुड़े

अध्ययन के मुताबिक, 2024 में दुनियाभर में करीब 23 लाख नए कैंसर मामले संक्रमणों के कारण होने का अनुमान लगाया गया। यह उस साल दुनिया में सामने आए सभी नए कैंसर मामलों का लगभग 12 प्रतिशत है। शोधकर्ताओं ने 12 ऐसे संक्रामक कारकों का आकलन किया, जिन्हें IARC ने मनुष्यों में कैंसर पैदा करने वाले कारकों की श्रेणी में रखा है।

इनमें हेलिकोबैक्टर पाइलोरी, ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी HPV, हेपेटाइटिस बी और सी वायरस, एपस्टीन-बार वायरस, HIV समेत कई अन्य संक्रामक कारक शामिल हैं। अध्ययन में पाया गया कि संक्रमण से जुड़े कैंसर के अधिकांश मामलों के पीछे पांच प्रमुख संक्रमणों की भूमिका थी।

दुनियाभर में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी से करीब 7.6 लाख कैंसर मामले जुड़े थे। इसके बाद HPV से लगभग 7.5 लाख, हेपेटाइटिस बी वायरस से 3.6 लाख, एपस्टीन-बार वायरस से 2.6 लाख और हेपेटाइटिस सी वायरस से करीब 1.6 लाख मामलों का अनुमान लगाया गया।

भारत में HPV सबसे बड़ा संक्रमण संबंधी कारण

भारत में संक्रमण से जुड़े कैंसर मामलों में HPV का हिस्सा सबसे बड़ा पाया गया। अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार, देश में एक लाख से अधिक कैंसर मामले HPV संक्रमण से जुड़े थे। इसका बड़ा संबंध सर्वाइकल यानी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से है।

HPV के सभी प्रकार कैंसर का कारण नहीं बनते, लेकिन कुछ उच्च जोखिम वाले प्रकार लंबे समय तक बने रहने पर कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। IARC के अनुसार, लगातार बने रहने वाला उच्च जोखिम वाला HPV संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है।

HPV से जुड़े कैंसर के खतरे को कम करने के लिए टीकाकरण और सर्वाइकल कैंसर की जांच महत्वपूर्ण रोकथाम उपायों में शामिल हैं। हालांकि, केवल टीकाकरण को सभी प्रकार के HPV से जुड़े कैंसर से पूर्ण सुरक्षा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और उम्र तथा व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार जांच और चिकित्सकीय सलाह भी महत्वपूर्ण रहती है।
एच. पाइलोरी से जुड़े करीब 47 हजार मामले

भारत में संक्रमण से जुड़े कैंसर मामलों में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी दूसरा प्रमुख कारण रहा। अध्ययन के अनुसार, इस बैक्टीरिया से करीब 47,000 कैंसर मामले जुड़े थे।

हेलिकोबैक्टर पाइलोरी मुख्य रूप से पेट में संक्रमण पैदा करता है। लंबे समय तक बना रहने वाला संक्रमण पेट की अंदरूनी परत में लगातार सूजन और बदलाव से जुड़ा हो सकता है और इससे गैस्ट्रिक यानी पेट के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

IARC के वैश्विक अनुमान में भी एच. पाइलोरी संक्रमण सबसे बड़ा संक्रमण संबंधी कैंसर कारक था और 2024 में इससे करीब 7.6 लाख कैंसर मामले जुड़े थे।

हेपेटाइटिस बी और सी से भी कैंसर का संबंध

अध्ययन में हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस को भी भारत में संक्रमण से जुड़े कैंसर के महत्वपूर्ण कारणों में शामिल किया गया है। भारत में करीब 10,000 कैंसर मामलों का संबंध हेपेटाइटिस बी वायरस से और लगभग 5,300 मामलों का संबंध हेपेटाइटिस सी वायरस से था।

इन दोनों संक्रमणों का मुख्य संबंध लिवर कैंसर, खासकर हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा, से है। लंबे समय तक रहने वाले हेपेटाइटिस संक्रमण से लिवर को नुकसान पहुंच सकता है और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

एपस्टीन-बार वायरस से करीब 22 हजार मामले

एपस्टीन-बार वायरस यानी EBV से भारत में करीब 22,000 कैंसर मामले जुड़े पाए गए। यह वायरस कई प्रकार के कैंसर से संबंधित है। अध्ययन में EBV से जुड़े कैंसरों के आकलन में हाल में सामने आए कुछ अतिरिक्त संक्रमण-कैंसर संबंधों को भी शामिल किया गया है।

IARC के अनुसार, दुनिया में 2024 के दौरान EBV से जुड़े कैंसर मामलों की संख्या करीब 2.6 लाख थी। इनमें कुछ लिंफोमा, नासोफैरिंजियल कैंसर और पेट के कैंसर भी शामिल हैं।

संक्रमण से जुड़े कैंसर को कम करने में रोकथाम की भूमिका

अध्ययन के शोधकर्ताओं ने संक्रमणों को नियंत्रित करने को कैंसर की रोकथाम का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। उनके अनुसार, HPV और हेपेटाइटिस बी के खिलाफ टीकाकरण, HIV, H. pylori, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी की जांच तथा जरूरत के अनुसार उपचार जैसे उपाय संक्रमण से जुड़े कैंसर के बोझ को कम करने में मदद कर सकते हैं।

सर्वाइकल और कुछ HPV से जुड़े अन्य कैंसरों में कैंसर से पहले होने वाले बदलावों की जांच भी महत्वपूर्ण है। अध्ययन में सुरक्षित इंजेक्शन व्यवस्था और HIV संक्रमण से बचाव के उपायों को भी रोकथाम के हिस्से के रूप में बताया गया है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि संक्रमण से जुड़े कैंसर का बोझ निम्न और मध्यम आय वाले देशों में अधिक है। दुनिया के ऐसे देशों में 2024 के संक्रमण से जुड़े कैंसर मामलों का करीब 77 प्रतिशत हिस्सा था।

अध्ययन के शोधकर्ताओं ने संक्रमणों की रोकथाम और उपचार को कैंसर नियंत्रण की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है तथा विशेष रूप से HPV और हेपेटाइटिस बी के टीकाकरण, संक्रमण की जांच और उपचार तथा HPV से जुड़े कैंसरों की स्क्रीनिंग को वैज्ञानिक रूप से स्थापित उपायों में शामिल किया है।