कॉकरोच का दूध कैसे निकाला जाता है? क्यों चर्चा में हैं इसके प्रोटीन क्रिस्टल, जानिए पूरी कहानी

कॉकरोच का नाम सुनते ही आमतौर पर गंदगी और कीड़े का ख्याल आता है, लेकिन कॉकरोच की एक खास प्रजाति ऐसी है जो अपने विकसित हो रहे बच्चों को दूध जैसा पोषक तरल देती है। इसका वैज्ञानिक नाम Diploptera punctata है, जिसे Pacific beetle cockroach कहा जाता है। सितंबर 2026 में इसी कॉकरोच के दूध पर हुए वैज्ञानिक शोध को 2026 Ig Nobel Chemistry Prize मिलने के बाद यह विषय फिर चर्चा में आया।

कौन सा कॉकरोच दूध बनाता है?

यह आम घरों में मिलने वाला कॉकरोच नहीं है। Diploptera punctata एक ऐसी प्रजाति है जो अंडे देने के बजाय जीवित बच्चों को जन्म देती है। इसके भ्रूण मां के शरीर के अंदर एक brood sac में विकसित होते हैं और उन्हें मां की ओर से पोषक तरल मिलता है।

इस तरल को ही आम तौर पर “कॉकरोच मिल्क” कहा जाता है। हालांकि, यह गाय या भैंस के दूध की तरह अलग से निकाला और जमा किया जाने वाला दूध नहीं है।

कॉकरोच का दूध कैसे निकाला जाता है?

इसकी प्रक्रिया काफी अलग और मुश्किल है। मादा Diploptera punctata के शरीर में विकसित हो रहे भ्रूण इस पोषक तरल को ग्रहण करते हैं। तरल बाद में भ्रूण की midgut यानी आंत में प्रोटीन-समृद्ध क्रिस्टल का रूप ले लेता है। वैज्ञानिकों ने इन्हीं क्रिस्टलों को निकालकर उनका अध्ययन किया है।

पुराने शोध में कॉकरोच के brood sac से निकलने वाले दूध जैसे स्राव को भी एकत्र किया गया था। 1977 के अध्ययन में इसे सुखाकर इसकी संरचना की जांच की गई थी। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा पाए गए थे।

इसलिए सोशल मीडिया या इंटरनेट पर दिखने वाली ऐसी तस्वीरों से यह समझना सही नहीं है कि कॉकरोच को गाय की तरह रखकर उसका दूध निकाला जाता है। वैज्ञानिक अध्ययन मुख्य रूप से उसके शरीर में बनने वाले पोषक स्राव और उससे बने क्रिस्टलों पर केंद्रित रहे हैं।
इसमें ऐसा क्या खास है?

शोध में पाया गया कि इन क्रिस्टलों में दूध के प्रोटीन से जुड़े लिपिड यानी वसा भी मौजूद होते हैं। ये प्रोटीन और वसा को बेहद सघन रूप में स्टोर करने में मदद करते हैं। 2016 के संरचनात्मक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इन क्रिस्टलों की परमाणु स्तर तक संरचना का अध्ययन किया था।

वैज्ञानिकों के अनुसार, एक क्रिस्टल में समान मात्रा के कई स्तनधारी दूध की तुलना में तीन गुने से अधिक ऊर्जा होने का अनुमान लगाया गया था। इसका कारण यह है कि कॉकरोच के भ्रूण के लिए यह पोषण एक बेहद सघन रूप में जमा होता है।

1977 के अध्ययन में कॉकरोच के दूध के सूखे नमूने में लगभग 45 प्रतिशत प्रोटीन, 25 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट और 16 से 22 प्रतिशत लिपिड पाए गए थे।

क्या कॉकरोच का दूध इंसानों के लिए हेल्दी है?


यहीं सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत है। इसके पोषक तत्वों और ऊर्जा घनत्व को लेकर वैज्ञानिक रुचि जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे इंसानों के लिए साबित तौर पर हेल्दी फूड माना गया है।

2026 की चिकित्सकीय समीक्षा के अनुसार, कॉकरोच मिल्क को नियमित मानव भोजन या सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल करने की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसे इकट्ठा करने, प्रोसेस करने, स्टोर करने और मानव उपभोग के लिए सुरक्षित बनाने की कोई व्यापक मानक व्यवस्था भी स्थापित नहीं है।

इसके अलावा, कीटों से जुड़े उत्पादों में एलर्जी और संभावित माइक्रोबियल संक्रमण जैसे सुरक्षा सवाल भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए केवल ज्यादा प्रोटीन या ऊर्जा होने के आधार पर इसे मानव स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद बताना सही नहीं होगा।

फिर वैज्ञानिक इसमें इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहे हैं?


इस शोध की खासियत सिर्फ यह नहीं है कि कॉकरोच “दूध” बनाता है। वैज्ञानिक यह समझना चाहते हैं कि एक जीव इतने कम आकार में प्रोटीन, वसा और ऊर्जा को इतनी सघन क्रिस्टल संरचना में कैसे जमा करता है।

2016 के अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इन क्रिस्टलों की संरचना का एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी से अध्ययन किया था। 2026 में इसी वैज्ञानिक काम को Ig Nobel Chemistry Prize मिलने से यह शोध एक बार फिर चर्चा में आया।