असहनीय दर्द का अहसास करवाता हैं बालतोड़, इन देसी नुस्खों से मिलेगा आराम

अक्सर शरीर पर छोटे-छोटे फोड़े या दाने निकल आते हैं। कई बार लोग इसे सामान्य फोड़े-फुंसी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। मगर हो सकता है यह बालतोड़ हो। एक ऐसी समस्या, जो फुंसी से फोड़ा बन जाती है और इतनी तकलीफ देती है कि कई बार दर्द असहनीय हो जाता है। बैक्टीरियल इन्फेक्शन और फंगल इन्फेक्शन जैसे इन्फेक्शन के कारण हेयर फॉलिकल में सूजन बालतोड़ का कारण बनती है। सूजे हुए बालों के रोम को बालतोड़ के रूप में जाना जाता है। शरीर के किसी भी हिस्से का जब बाल जड़ से टूट जाता है तो वहां एक गांठ बन जाती है, फिर वह फुंसी से फोड़ा बन जाता है और उसमें पस बनने लगता है, फिर इसमें इतना दर्द होता है कि आपको सहन करने में बहुत परेशानी होती है। एलोपैथी में दवाएं खाकर भी कभी-कभी इससे राहत नहीं मिलती। इसलिए आज इस कड़ी में हम आपके लिए लेकर आए हैं कुछ देसी नुस्खें जो बालतोड़ की समस्या में आराम दिलाने का काम करेंगे।

हल्दी

हल्दी प्राकृतिक रक्त शोधक होती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं। एक चम्मच हल्दी के पाउडर को एक गिलास दूध में घोलकर उबाल लें। इस हल्दी के दूध को दिन में तीन-चार बाद सेवन करें। हल्दी और अदरक को सामान मात्रा में मिलाकर पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को अपने फोड़े पर लगा लें और ऊपर से कपड़ा बांध लें।

प्याज

प्याज में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं। जो स्टेफिलोकोकस ऑरियस बैक्टीरिया से निपटने में काम आते हैं। इसके साथ ही इसमें पाया जाने वाला फेनोलिक एसिड किसी भी इंफेक्शन को बढ़ने से रोक देता है। इसके लिए आधा कटा प्याज को अच्छी तरह से पीस लें। इसके बाद इसमें शहद मिलाकर बालतोड़ में लगा लें। करीब 15-20 मिनट लगा रहने के बाद साफ पानी से धो लें।

मेंहदी

मेंहदी कई तरह की एलर्जी से निजात दिलाता है। इसके ठंडे गुण के कारण यह जलन को शांत कर देती है। अगर आपको बालतोड़ वाली जगह में ज्यादा जलन हो रही है तो आप मेंहदी का इस्तेमाल कर सकते है। मेंहदी भिगोकर उसका गाढ़ा लेप तैयार करें और लगाएं, राहत मिलेगी।

लहसुन

लहसुन में एलिसिन नामक तत्व पाया जाता है। जिमें अधिक मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो बालतोड़ के सबसे अहम जीवाणु स्टेफिलोकोकस ऑरियस को बढ़ने से रोकने का काम करते हैं। लहसुन का इस्तेमाल 2 तरह से किया जा सकता है। पहला कि लहसुन की कली को पीसकर इसका रस निकालकर प्रभावित जगह पर लगाए। इसके अलावा लहसुन की कली को पीसकर इसके पेस्ट को प्रभावित जगह पर लगाए। करीब 15 मिनट लगा रहने के बाद साफ पानी से धो लें। ऐसा दिन में 2 बार जरूर करें।

पान के पत्ते

बालतोड़ के इलाज के लिए पान के पत्ते बहुत कारगर साबित हो सकते है। इसके लिए पान के पत्ते को गर्म करके उसमें कैस्टर ऑयल लगाकर बालतोड़ पर रखकर कपड़े से बांध ले। 3-4 दिन में ही छुटकारा पाया जा सकता है।

नीम

नीम में एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं जो बालतोड़ की समस्या को जड़ से खत्म कर देता हैं। इसके साथ ही इंफेक्शन को आगे बढ़ने से रोकती हैं। इसके लिए नीम की कुछ पत्तियों को पीस लें। इसके बाद इसमें हल्दी पाउडर डालकर दोबारा पीस लें। फिर इसे प्रभावित जगह पर अच्छी तरह से लगा लें। सुख जाने के बाद साफ पानी से धो लें। ऐसा दिन में 1-2 बार जरूर करें।

टी ट्री ऑयल

टी ट्री ऑयल में एंटी-बैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज होती हैं। इसके नियमित इस्तेमाल से हीलिंग प्रोसेस तेज हो जाती है और दर्द कम होता है। साफ रुई को टी ट्री ऑयल में भिगोकर बालतोड़ पर रख दें। ऊपर से कपड़ा बांध लें। हर पांच घंटे में इस रुई को बदलते रहें। लाभ होगा।

अंडा

इसके लिए एक अंडे को उबालकर उसकी जर्दी अलग कर लें। अंडे का सफेद वाला हिस्सा इस तरह काटे की वह फोड़े को पूरा ढ़क ले। अंडे के भीगे वाले हिस्से को बालतोड़ पर लगाकर ऊपर से सफेद हिस्सा रखकर कपड़े से बांध लें। इस प्राकृतिक उपाय से फोड़ा ठीक हो जायेगा।

कलौंजी

कलौंजी किसी भी प्रकार के स्किन इंफेक्शन के लिए काफी प्रचलित औषधि है। इसमें मौजूद मेडिकल प्रॉपर्टीज दर्द को भी कम करती हैं। कलौंजी के कुछ बीजों को पीसकर पेस्ट बना लें। इसे प्रभावित एरिया में लगा लें। आप कलौंजी के तेल को भी बालतोड़ पर लगा सकते हैं। एक चम्मच कलौंजी के तेल को एक कप गर्म या ठंडे ड्रिंक में मिलाएं। कुछ दिनों तक इसे रोज दिन में दो बार पिएं।

अरंडी का तेल

अरंडी के तेल में रिसिनोलिक एसिड पाया जाता है जो एक एंटीइंफ्लेमेटरी की तरह काम करता है। साथ ही अरंडी के तेल में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो संक्रमण को बढ़ने से रोकते हैं। ऐसे में बालतोड़ के लिए इसका इस्तेमाल करना सबसे अच्छा माना जाता है।