Aamir Khan ने ‘कॉरपोरेट बुकिंग’ पर तोड़ी चुप्पी, बोले – “आख़िर में सच्चाई सामने आ ही जाती है, ये सब बेकार है”

बॉलीवुड में बीते कुछ समय से ‘कॉरपोरेट बुकिंग’ यानी फिल्म निर्माताओं द्वारा खुद ही बड़ी संख्या में टिकट खरीदने की प्रवृत्ति को लेकर काफी चर्चा रही है। इसका उद्देश्य फिल्म को हिट दिखाना और दर्शकों के बीच उसकी फर्जी लोकप्रियता का माहौल बनाना होता है। हालांकि यह चलन कई बार उल्टा भी पड़ा है और आलोचनाओं का शिकार बना है। अब इस मुद्दे पर बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।

फिल्म समीक्षक कोमल नाहटा के साथ एक बातचीत में आमिर खान ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी फिल्मों के असली बॉक्स ऑफिस आंकड़ों में यकीन करते हैं और फेक कलेक्शन देने की प्रवृत्ति को “बिल्कुल बेकार” मानते हैं।

आमिर ने कहा, जब मेरी फिल्म रिलीज़ होती है, मैं चाहता हूँ कि असली आंकड़े ही सामने जाएं। मैं अपनी टीम से कहता हूँ कि हम कभी झूठे कलेक्शन न दें। बिज़नेस के नजरिए से देखें तो ये बहुत ही बेवकूफी है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह मानवीय स्वभाव है कि कोई भी नहीं चाहता कि उसके बारे में कहा जाए कि उसकी फिल्म नहीं चल रही है। लोगों को लगता है कि अगर वो फिल्म को सुपरहिट बताएं तो निवेशक उसमें पैसा लगाएंगे। आमिर ने कहा, ये सब बहुत ही अल्पकालिक फायदे हैं, क्योंकि अंत में सच्चाई बाहर आ ही जाती है।

आमिर खान ने यह भी कहा कि भले ही पब्लिक को आप एक-दो बार भ्रमित कर लें, लेकिन इंडस्ट्री के अंदरूनी लोगों को बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। सभी को पता होता है कि सच्चाई क्या है। आमिर ने दो टूक कहा मेरे अनुसार, इसका कोई मतलब नहीं है, लेकिन बहुत सारे लोग ऐसा करते हैं। वे एक झूठी छवि गढ़ने की कोशिश करते हैं।

कुछ दिनों पहले कोमल नाहटा ने इसी मुद्दे पर प्रोड्यूसर बोनी कपूर से भी सवाल किया था, जिस पर उन्होंने कहा था कि OTT और सैटेलाइट डील्स इस ‘सेल्फ-बायिंग’ के पीछे बड़ी वजह बन गई हैं। बोनी कपूर के अनुसार, कई डील्स में फिल्म के कलेक्शन पर बोनस रकम तय होती है — जैसे अगर फिल्म ₹100 करोड़ पार कर जाती है, तो निर्माता को अतिरिक्त ₹5 करोड़ मिलते हैं। ₹120 करोड़ पार करने पर और ₹5 करोड़ दिए जाते हैं। इसलिए फिल्म निर्माताओं को कलेक्शन बढ़ा-चढ़ा कर बताने की लालच होती है।

हालांकि आमिर खान जैसे अभिनेता इस तरह की मानसिकता को खारिज करते हैं और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। उनका यह बयान न सिर्फ एक साहसिक स्टैंड है, बल्कि इंडस्ट्री के अन्य कलाकारों और निर्माताओं के लिए भी एक सोचने का विषय है कि क्या झूठे आंकड़ों के सहारे बनाई गई सफलता वाकई किसी काम की है?