28 सितंबर को देश की महानतम सुर साधिका लता मंगेशकर की जयंती होती है और इस खास अवसर को भावनाओं से सराबोर करते हुए फिल्म '120 बहादुर' के निर्माताओं ने एक अनूठा अंदाज चुना है। इस दिन फिल्म का दूसरा टीज़र रिलीज़ किया गया, जो केवल एक प्रचार सामग्री नहीं बल्कि स्वर कोकिला को एक सजीव श्रद्धांजलि है। इसमें पृष्ठभूमि में बजते हैं वे सुर, जो आज भी हर देशभक्त के हृदय में गूंजते हैं—‘ऐ मेरे वतन के लोगों’। यह वही गीत है, जो कभी लता जी ने अपने स्वरों से भारत के वीर सपूतों को समर्पित किया था, और जो आज भी लोगों की आंखें नम कर देता है।
फिल्म ‘120 बहादुर’ की कहानी 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान लड़े गए रेजांग ला के वीरगाथा पर आधारित है। फरहान अख्तर द्वारा साझा किए गए इस टीज़र की शुरुआत गोलीबारी और धुएं के बीच जूझते भारतीय जवानों के दृश्यों से होती है, जहां हर पल मातृभूमि के लिए जान कुर्बान करने की जद्दोजहद दिखाई देती है। इसी बीच बैकग्राउंड में 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की धुन धीरे-धीरे गूंजती है, और भावनाएं जैसे पराक्रम में ढल जाती हैं।
फरहान अख्तर की आवाज़ में सुनाई देती एक मार्मिक पंक्ति—तुम सब किसान के बेटे हो... जमीन के लिए लड़ना तुम्हारे खून में है... और अब बात सिर्फ जमीन की नहीं, हमारे सरज़मीन की है—सुनते ही दिल में एक झटका सा लगता है। यह संवाद केवल एक स्क्रिप्ट नहीं बल्कि हर उस सैनिक की आत्मा की प्रतिध्वनि है, जो सीमा पर अपने वजूद को मिटाकर देश को सुरक्षित रखता है।
‘120 बहादुर’ केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि 13 कुमाऊं रेजिमेंट के उन 120 वीरों की अमर गाथा है, जिनका नेतृत्व किया था मेजर शैतान सिंह भाटी ने। फरहान अख्तर इस फिल्म में उसी ऐतिहासिक किरदार को निभा रहे हैं। इस युद्ध के दौरान लद्दाख की बर्फीली चोटियों पर हुए संघर्ष को कैमरे में बेहद संवेदनशीलता से उतारा गया है, जो दर्शकों को न सिर्फ युद्ध का यथार्थ दिखाता है, बल्कि सैनिकों के साहस, बलिदान और आत्मबल को भी महसूस कराता है।
1962 का भारत-चीन युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि यह उस समय के राजनीतिक, कूटनीतिक और रणनीतिक असंतुलनों की भी एक कड़ी याद दिलाता है। अक्साई चीन पर सड़क निर्माण और सीमाओं की अस्पष्टता ने जिस तरह से हालात को युद्ध में बदला, वह इतिहास में दर्ज है। ऐसे में ‘120 बहादुर’ उस इतिहास के अंधेरे कोनों में झांकती है, जहां वीरता की लौ अब भी टिमटिमा रही है।
और इसी वीरता को स्वर देती है लता मंगेशकर की वो अमर आवाज़, जिसने 'ऐ मेरे वतन के लोगों' को जन-जन का गीत बना दिया। आज जब यह गीत दोबारा सुनाई देता है, वह भी ऐसे मौके पर, तो लगता है जैसे एक युग खुद को फिर से दोहरा रहा हो—सम्मान, श्रद्धा और राष्ट्रप्रेम के सुरों में लिपटा हुआ।