उम्र बढ़ने के साथ त्वचा की जरूरत भी बदलती जाती है। 20 की उम्र में जहां मुंहासे, अतिरिक्त ऑयल और पिग्मेंटेशन जैसी परेशानियां ज्यादा देखने को मिल सकती हैं, वहीं 30 के बाद फाइन लाइन्स और सन डैमेज पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। 40 और 50 की उम्र में त्वचा में रूखापन, संवेदनशीलता, झुर्रियां और कसाव कम होने जैसी समस्याएं अधिक दिखाई दे सकती हैं। इसलिए हर उम्र में एक जैसा स्किन केयर रूटीन अपनाने के बजाय त्वचा की बदलती जरूरत के अनुसार इसे बदलना ज्यादा उपयोगी है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ नियमित सन प्रोटेक्शन, मॉइस्चराइजिंग और त्वचा की जरूरत के मुताबिक प्रोडक्ट चुनना अहम है।
20 की उम्र में कैसी हो स्किन केयर?20 की उम्र में स्किन केयर का सबसे बड़ा लक्ष्य त्वचा को स्वस्थ रखना और आगे होने वाले नुकसान से बचाना होना चाहिए। इस उम्र में बहुत सारे प्रोडक्ट एक साथ इस्तेमाल करने की बजाय एक आसान और नियमित रूटीन ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।
सुबह चेहरे को अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार माइल्ड क्लींजर से साफ करें। अगर त्वचा ऑयली या मुंहासे वाली है तो ऐसा क्लींजर चुना जा सकता है जो अतिरिक्त तेल को साफ करे, जबकि ड्राई स्किन के लिए हाइड्रेटिंग क्लींजर बेहतर हो सकता है। AAD के अनुसार चेहरे को जरूरत के मुताबिक साफ करना और पसीना आने के बाद चेहरा धोना उपयोगी है।
इस उम्र में सनस्क्रीन को स्किन केयर का स्थायी हिस्सा बनाना खास तौर पर जरूरी है। बाहर निकलते समय ब्रॉड-स्पेक्ट्रम SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। ऑयली या मुंहासे वाली त्वचा के लिए नॉन-कॉमेडोजेनिक यानी पोर्स को बंद न करने वाला विकल्प चुना जा सकता है।
अगर मुख्य समस्या डार्क स्पॉट, मुंहासे या असमान त्वचा है तो जरूरत के मुताबिक किसी एक्टिव इंग्रीडिएंट वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। AAD के अनुसार विटामिन C और रेटिनॉयड जैसे ingredients कुछ खास त्वचा संबंधी चिंताओं में उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन इन्हें त्वचा की जरूरत के अनुसार चुनना चाहिए।
30 की उम्र में किन बातों पर दें ध्यान?30 के आसपास कई लोगों को फाइन लाइन्स, असमान स्किन टोन या पहले से हुए सन डैमेज के निशान नजर आने लगते हैं। इस समय स्किन केयर का फोकस केवल चेहरे को साफ रखने तक सीमित न रखकर सन प्रोटेक्शन और त्वचा की नमी बनाए रखने पर भी होना चाहिए।
सुबह माइल्ड क्लींजर के बाद जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजर और फिर सनस्क्रीन लगाया जा सकता है। रात में चेहरा साफ करने के बाद मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करें। अगर कोई एक्टिव प्रोडक्ट रूटीन में शामिल करना है तो एक साथ कई नए प्रोडक्ट शुरू करने के बजाय त्वचा की जरूरत के अनुसार धीरे-धीरे शामिल करना बेहतर है।
रेटिनॉयड का इस्तेमाल फाइन लाइन्स, मुंहासों और कुछ तरह के डार्क स्पॉट के लिए किया जाता है। हालांकि यह हर व्यक्ति की त्वचा के लिए जरूरी नहीं है और इससे जलन या रूखापन हो सकता है। इसलिए खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इसके इस्तेमाल से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।
इस उम्र में एक और गलती से बचना जरूरी है—हर नए सोशल मीडिया ट्रेंड को अपनी त्वचा पर आजमाना। AAD के अनुसार जरूरत से ज्यादा exfoliation त्वचा की protective barrier को नुकसान पहुंचा सकता है और जलन बढ़ा सकता है।
40 की उम्र में बदलें स्किन केयर का तरीका40 के बाद त्वचा में नमी बनाए रखने की क्षमता कम हो सकती है और फाइन लाइन्स, झुर्रियां तथा असमान रंगत ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे सकती है। इस समय स्किन केयर में ज्यादा प्रोडक्ट जोड़ने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि बेसिक रूटीन लगातार सही तरीके से किया जाए।
चेहरे को साफ करने के लिए बहुत कठोर साबुन या स्क्रब की जगह माइल्ड क्लींजर इस्तेमाल करें। AAD गर्म पानी की बजाय गुनगुने पानी से चेहरा धोने और त्वचा को जोर से स्क्रब न करने की सलाह देता है।
इस उम्र में मॉइस्चराइजर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ त्वचा अधिक ड्राई हो सकती है और मॉइस्चराइजर त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है। अगर त्वचा पहले की तुलना में ज्यादा रूखी महसूस हो रही है तो हल्के लोशन के बजाय ज्यादा मॉइस्चराइजिंग क्रीम की जरूरत हो सकती है।
सनस्क्रीन भी उतना ही जरूरी है। वर्षों तक जमा हुआ UV damage झुर्रियों, असमान रंगत और age spots के रूप में दिखाई दे सकता है। इसलिए 40 की उम्र में सनस्क्रीन शुरू करने के बजाय इसे रोज की आदत बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है।
50 की उम्र में त्वचा को चाहिए ज्यादा नमी50 के आसपास और खासकर मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव त्वचा को ज्यादा ड्राई और संवेदनशील बना सकते हैं। AAD के अनुसार इस दौरान त्वचा पतली और शुष्क हो सकती है तथा झुर्रियां और ढीलापन ज्यादा दिखाई दे सकता है।
ऐसे में बहुत ज्यादा एक्टिव प्रोडक्ट इस्तेमाल करने के बजाय gentle skin care पर ध्यान देना उपयोगी है। माइल्ड क्लींजर, नियमित मॉइस्चराइजर और रोजाना सनस्क्रीन इस उम्र के बेसिक रूटीन का हिस्सा हो सकते हैं।
अगर त्वचा बहुत ड्राई रहती है तो क्रीम आधारित मॉइस्चराइजर उपयोगी हो सकता है। AAD के अनुसार उम्र बढ़ने पर त्वचा नमी कम बनाए रखती है और 50 या उससे अधिक उम्र में कई लोगों को क्रीम-बेस्ड मॉइस्चराइजर की जरूरत पड़ सकती है।
मेनोपॉज के दौरान कुछ महिलाओं में त्वचा अधिक संवेदनशील हो सकती है। ऐसे में खुशबू वाले या जलन पैदा करने वाले प्रोडक्ट से परेशानी बढ़ सकती है। AAD संवेदनशील त्वचा के लिए fragrance-free moisturizer की सलाह देता है।
हर उम्र में सनस्क्रीन सबसे जरूरी20 हो या 50, सनस्क्रीन को उम्र के हिसाब से बदलने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसे नियमित रूप से इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक UV exposure त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है और झुर्रियों व age spots के साथ त्वचा कैंसर का जोखिम भी बढ़ाता है।
AAD रोजाना बाहर निकलने पर ब्रॉड-स्पेक्ट्रम SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल करने की सलाह देता है। केवल चेहरे पर ही नहीं, बल्कि कपड़ों से बाहर रहने वाली त्वचा पर भी सनस्क्रीन लगाना चाहिए।
उम्र चाहे कोई भी हो, ये गलती न करेंउम्र के अनुसार प्रोडक्ट बदलना जरूरी हो सकता है, लेकिन कुछ बेसिक आदतें हर उम्र में समान रहती हैं। त्वचा को जरूरत से ज्यादा स्क्रब करना, एक साथ कई नए एक्टिव प्रोडक्ट लगाना और जलन होने के बावजूद किसी प्रोडक्ट को जारी रखना सही तरीका नहीं है। AAD के अनुसार लगातार नए प्रोडक्ट बदलने से त्वचा में irritation हो सकती है और जरूरत से ज्यादा exfoliation skin barrier को नुकसान पहुंचा सकता है।
इसी तरह उम्र बढ़ने के साथ त्वचा पर दिखने वाले हर दाग को सिर्फ age spot मान लेना भी ठीक नहीं है। NIA के अनुसार उम्र के साथ age spots आम हो सकते हैं, लेकिन त्वचा पर किसी नए या बदलते हुए निशान को लेकर संदेह हो तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
कुल मिलाकर, 20 की उम्र में बेसिक स्किन केयर और सन प्रोटेक्शन पर जोर देना, 30 में शुरुआती signs of aging और uneven skin tone पर ध्यान देना, 40 में मॉइस्चराइजिंग और UV protection को मजबूत करना और 50 में बढ़ते रूखेपन व संवेदनशीलता के अनुसार रूटीन को बदलना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है। त्वचा की समस्या लगातार बनी रहती है या किसी नए बदलाव को लेकर चिंता हो तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।