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  • इस शख्स की सूझबूझ से टला परमाणु युद्ध, बची अरबों लोगों की जान, जीवन हो सकता था समाप्त

इस शख्स की सूझबूझ से टला परमाणु युद्ध, बची अरबों लोगों की जान, जीवन हो सकता था समाप्त

By: Ankur Mon, 22 July 2019 08:58 AM

इस शख्स की सूझबूझ से टला परमाणु युद्ध, बची अरबों लोगों की जान, जीवन हो सकता था समाप्त

विश्व के इतिहास में हुए कई हादसों के बारे में आपने पढ़ा ही होगा। इन्हीं में से थे प्रथम विश्वयुद्ध और द्वितीय विश्वयुद्ध जिसमें जान और माल दोनों की बहुत हानि हुई थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब तृतीय विश्वयुद्ध की स्थिति बनी थी और यह परमाणु युद्ध होता जो पूरे जीवन को तबाह कर देता। लेकिन एक शख्स की समझदारी और सूझबूझ की वजह से यह परमाणु युद्ध टल गया और अरबों लोगों की जान बच गई। हम बात कर रहे हैं रूस के कर्नल स्तेनिस्लाव पेत्रोव के बारे में जिनकी इस समझदारी के लिए संयुक्त राष्ट्र के द्वारा इन्हें शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

दरअसल, 1983 में शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और रूस के बीच तनाव काफी बढ़ चुका था। अमेरिकी हमले से निपटने के लिए रूस हर तरह से तैयार बैठा था। पेट्रोव 26 सितंबर 1983 को सोवियत संघ के सीक्रेट कमांड सेंटर में तैनात थे। पेट्रोव का काम था कि यूएस की द्वारा रूस पर छोड़े जाने वाली मिसाइल का पता लगाना। उस सीक्रेट वॉर रूम में एक बड़ी सी स्क्रीन लगी थी, जो यूएस के द्वारा मिसाइल छोड़ने की सूरत में रूस को सावधान करती थी।

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पेत्रोव की शिफ्ट खत्म होने में अभी कुछ वक्त बचा था कि तभी रडार स्क्रीन पर गलती से अलॉर्म बजने लगा और चेतावनी जारी की गयी कि अमेरिका रूस पर मिसाइलें दागने वाला है। लेकिन पेत्रोव ने होश खोने के बजाय सूझ-बूझ से काम लिया और उस सूचना को लोगों के साथ साझा करने से मना कर दिया। पेत्रोव को उस वक्त लगा कि वह सूचना गलत हो सकती है। कुछ सेकंड तक तो वह सोच में पड़ गए कि आखिर किया क्या जाए। इस पर उन्होंने अपने मन की आवाज सुनी और फैसला किया कि इस सूचना को बाकी लोगों व अपने सीनियरों के साथ साझा नहीं किया जाएगा।

इसके बाद पेत्रोव ने सैटलाइट रडार ऑपरेटरों को फोन करके अंदेशा जताया कि अर्ली वॉर्निंग सिस्टम में कुछ तकनीकी खामी है। लेकिन जब जांच की गयी तो यह अंदेशा सही साबित हुआ। वाकई सिस्टम में कुछ गड़बड़ी थी और उसी वजह से वह गलत अलार्म और सूचना स्क्रीन पर दिख रही थी। पेत्रोव ने समझदारी दिखायी और उसी का नतीजा है कि तीसरा विश्व युद्ध नहीं हुआ। उनकी वजह से दुनिया तबाह होने से बच गयी। यही वजह है कि पेत्रोव को 'Man Who Saved The World' के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन दुख की बात है कि दुनिया को बचाने वाले पेत्रोव 2017 में खुद ही इस दुनिया से चल बसे।

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घटना के कई सालों बाद पेट्रोव के इस फैसले के बारे में दुनिया को पता चला। जिसके बाद सभी ने उनकी तारीफ करते हुए सम्मानित किया, क्योंकि उनके इस फैसले ने पूरी दुनिया को परमाणु हमले के विनाश से बचा लिया था। साल 2014 की पेट्रोव पर एक शॉर्ट फिल्म 'द मैन हू सेव्ड द वर्ल्ड' रिलीज हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा कि हम कभी परमाणु युद्ध की संभावना तक नहीं पहुंचे थे।

निसल्व के इस कारनामे के बारे में लोगों को पहले नहीं पता था। लेकिन 1998 में आई एक किताब में यह सब सामने आया। उसके बाद उनको कई अवार्ड भी मिले। अमेरिका ने भी उनको सम्मानित किया था। 2014 में 'द मैन हू सेवड द वर्ल्ड' नाम की डॉक्यूमेंट्री ड्रामा भी बनी थी। गौरतलब है कि कर्नल स्तेनिस्लाव पेत्रोव 1984 में ही समय से काफी पहले रिटायरमेंट हो गए थे।

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