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गेंडे का सींग टूटने पर फिर से बढ़ जाता हैं, जानें इनसे जुड़े ऐसे ही कई अन्य रोचक तथ्य

By: Ankur Fri, 28 June 2019 06:41 AM

गेंडे का सींग टूटने पर फिर से बढ़ जाता हैं, जानें इनसे जुड़े ऐसे ही कई अन्य रोचक तथ्य

क्या आपने कभी जंगल सफारी की हैं तो वहाँ गेंडा अर्थात राइनो (Rhino) देखने को मिला होगा। नहीं तो आपने इसे टीवी में तो देखा ही होगा। विशालकाय शारीर वाला यह जानवर हाथी के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्तनपायी जानवर है। बढ़ते शिकार की वजह से इनकी संख्या में भी बहुत कमी आई हैं। आज हम आपको गेंडे से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों कि जानकारी देने जा रहे हैं जो आपको पसंद आएँगे। तो आइये जानते हैं गेंडे से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में।

- भारतीय गेंडे प्रमुख तौर पर आसाम राज्य के काजीरंगा नेशनल पार्क में पाए जाते हैं। भारतीय गेंडों की दो-तिहाई आबादी जो कि लगभग 2400 के आसपास है यहीं पर पाई जाती है।

- आसाम के सिवाए भारतीय गेंडे पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश के कुछ भागों और हिमालय की निचली पहाड़ियों पर भी पाए जाते है।

- भारत के बाहर भारतीय गेंडे पाकिस्तान, बर्मा, नेपाल और चीन के कुछ भागों में भी पाए जाते हैं।

- इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर पाए जाने वाले जावन गेंडो की संख्या महज 50 के आसपास बची है। यह प्रजाति देखने में ऐसी लगती है कि इसके शरीक को प्लेटों द्वारा ढक दिया गया है, लेकिन असल में यह त्वचा की परतें हैं।

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- सुमात्रन गेंडे इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर पाए जाते हैं। इनकी गिनती भी महज 275 के आसापास बची है।

- गैंडे को अंग्रेज़ी में राइनोसेरोस (Rhinoceros) जा संक्षिप्त रूप में राइनो (Rhino) कहा जाता है।

- गैंडे की ऊँचाई 6 फुट तक हो सकती है और लंबाई 11 फुट तक बढ़ सकती है।

- वज़न के लिहाज़ से गैंडे औसतन 2000 से 2700 किलो तक के हो सकते हैं। भारत में एक गेंडे का वज़न 3800 किलो भी रिकार्ड किया जा चुका है।

- गैंडे की जो पांच प्रजातियां पाई जाती हैं, उनके नाम हैं – (1) सफेद गैंडे (2) काला गेंडा (3) भारतीय गैंडे (4) जावन गेंडा (5) सुमात्रन गेंडा। पहले दो प्रकार के गैंडे अफ्रीका में जबकि बाकी के तीन दक्षिण ऐशिया के देशों में पाए जाते हैं।

- अफ्रीका में पाए जाने वाले सफेद गेंडे पूरी तरह से सफेद नहीं होते, बल्कि इनकी त्वचा का रंग कुछ भूरा सा होता है। काले गेंडो के मुकाबले इनका मुंह ज्यादा चौड़ा होता है।

- हालांकि कि सभी गेंडो की त्वचा मोटी होती है, लेकिन नरम होने के कारण सूर्य की रोशनी से इसे नुकसान पहुँच सकता है। अपनी चमड़ी को सुरक्षित रखने के लिए गेंडे इस पर कीचड़ मल लेते है जिससे सूर्य की तेज़ किरणों के सिवाए यह कीड़ों से भी बचे रहते हैं। कीचड़ में स्नान करने में इन्हें काफ़ी मज़ा भी आता है।

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- गेंडे शाकाहारी जानवर हैं और घास, झाड़ियां, पत्ते आदि खाकर अपना गुज़ारा करते हैं।

- गैंडे की थूथन के ऊपर जो सींग होता है, असल में वो सींग नहीं होता। यह हज़ारों मोटे और मज़बूत बालों का गुच्छा होता है। यह उसी पदार्थ कैटरीन से बना होता है जिससे हमारे नाखून बने होते हैं।

- इस जानवर का सींग अगर एक बार टूट जाए तो दुबारा बढ़ जाता है।

- गैंडे की पांचो प्रजातियों में से भारतीय और जावन गैंडे का एक सींग होता है जबकि सफेद, काले और सुमात्रन गैंडे के दो-दो सींग होते हैं।

- सबसे बड़े सींग की लंबाई 4 फुट 9 इंच तक मापी गई है।

- गैंडे 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकते है।

- इस जानवर की आंखो की रौशनी कुछ ख़ास अच्छी नहीं होती, लेकिन इनके पास गज़ब की सूंघने और सुनने की शक्ति होती है।

- गेंडों के झुंड को अंग्रेज़ी में क्रैश (Crash) कहा जाता है।

- काले गेंडे अक्सर एक दूसरे से लड़ते रहते हैं।

- 50% नर और 30% मादा गेंडों की मौत लड़ाई की वजह से होती है।

- गैंडे के बारे में एक हैरान कर देने वाली बात यह है कि यदि शिकारी उसे गोली मार दे तो वह और जानवरों की तरह टांगें फैलाकर नहीं पड़ा रहता। वह सीधा बैठे-बैठे ही मर जाता है, मानो वह सो रहा हो।

- मादा गेंडो का गर्भकाल 14 से 18 महीनों तक का होता है। दो से चार साल बाद नन्हां गेंडा अपनी मां का साथ छोड़ देता है।

- मादा एक बार में एक बच्चे को जन्म देती है। जन्म के समय गैंडे के बच्चे की थूथन पर सींग नहीं होता। यह उम्र बढ़ने के साथ ही बढ़ने लगता है।

- गेंडे 40 से 45 साल की उम्र तक जी सकते हैं।

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