
जयपुर के विद्याधर नगर स्थित अस्पताल में को-वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल किया जा रहा हैं जिसमें रविवार तक कुल ट्रायल संख्या 300 पहुंच गई हैं। जयपुर के अलावा अन्य जिलों से पहुंचे लोगों का वैक्सीनेशन किया गया। डॉक्टर्स और आमजन के लिए राहत की बात यह है कि किसी भी मरीज में कोई साइड इफेक्ट सामने नहीं आया और आगे की ट्रायल के लिए तैयारियां की जा रही हैं।
30 दिसम्बर तक सभी ट्रायल के बाद उन सभी पर एक महीने तक मोबाइल से नजर रखी जाएगी और उसके बाद सभी के सही होने की स्थिति की रिपोर्ट भी आईसीएमआर को दी जाएगी। इसके बाद वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया के बारे में सहमति पर चर्चा की जाएगी। फरवरी-मार्च के अंत तक स्वदेशी को-वैक्सीन आना शुरू होगी।
यह ऑब्जर्व कर रहे डॉक्टर्स
जो भी “सब्जेक्ट” क्लीनिकल ट्रायल के लिए आ रहे हैं, डॉक्टर्स उन पर नजर रखे हुए हैं। उनसे हर घंटे बॉडी टेम्परेचर, शरीर में होने वाले बदलाव और अन्य सभी जानकारियां ली जा रही हैं। यदि किसी व्यक्ति को बुखार भी आता है तो उसके लिए टीम दवाइयां बताती है और उसके बाद लगातार पूछताछ की जाती है। यदि किसी को अधिक परेशानी होने की स्थिति में इमरजेंसी तैयार रहती है। हालांकि अभी तक किसी भी सब्जेक्ट को ऐसी परेशानी नहीं हुई है।
एक करोड़ का है इंश्योरेंस
जिन भी सब्जेक्ट का ट्रायल हो रहा है, यदि उनकी तबीयत खराब होती है तो उसका पूरा खर्च कंपनी उठाएगी। अस्पताल लाने के लिए एंबुलेंस से लेकर आईसीयू और सभी प्रकार की दवाओं का खर्चा कंपनी ही वहन करेगी। यहां तक कि यदि कोई केजुअलटी होती है तो उस सब्जेक्ट का एक करोड़ का इंश्योरेंस होता है। ऐसे में वह राशि परिजनों को दी जाएगी।
अभी तक परफेक्ट है रिजल्ट
क्लीनिकल ट्रायल के प्रिंसीपल इंवेस्टीगेटर डॉ। मनीष जैन बताते हैं कि अभी तक की ट्रायल में किसी सब्जेक्ट को काेई परेशानी नहीं हुई है। फ़र्स्ट और सैकेण्ड फेज क्लीयर हैं और जिस तरह से थर्ड फेज में रेस्पांस मिल रहा है, उसके बाद लग रहा है कि ट्रायल पूरा होने के बाद वैक्सीन को क्लीयरेंस मिल जाएगी।














