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चीन में मकड़ी जैसे दिखने वाले जीव से फैल रहा ये नया वायरस, जाने इससे जुड़े 7 सवाल और उनके जवाब

चीन में एक नई संक्रामक बीमारी ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। इस संक्रमण से चीन में 7 लोगों की मौत हो चुकी है और 60 से अधिक लोग इससे संक्रमित हैं।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Fri, 07 Aug 2020 4:00:08

चीन में मकड़ी जैसे दिखने वाले जीव से फैल रहा ये नया वायरस, जाने इससे जुड़े 7 सवाल और उनके जवाब

चीन में एक नई संक्रामक बीमारी ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। इस संक्रमण से चीन में 7 लोगों की मौत हो चुकी है और 60 से अधिक लोग इससे संक्रमित हैं। इस वायरस का नाम SFTS वायरस है। यह बुन्या वायरस के नाम से भी जाना जाता है। यह मकड़ी जैसे दिखने वाले जीव टिक के काटने से फैलता है। टिक-जनित वायरस के कारण थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (एसएफटीएस) के साथ गंभीर बुखार ने चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता को बढ़ा दिया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक बड़ी संख्या में पूर्वी चीन के जियांग्सू और अनहुई प्रांतों में इस वायरस से लोग संक्रमित हुए हैं।

चीन में अब तक 60 लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और 7 की मौत हो चुकी। चीन की मीडिया के मुताबिक, पिछले 6 महीने में पूर्वी चीन के जिआंगसु प्रांत के 37 लोग SFTS वायरस से संक्रमित हुए हैं। इसके बाद पूर्वी चीन के अनहुई प्रांत में 23 लोग संक्रमित पाए गए।

शोधकर्ताओं की टीम ने समान लक्षणों वाले लोगों के एक समूह से प्राप्त रक्त के नमूनों की जांच करके वायरस की पहचान की थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, वायरस संक्रमित लोगों में 30% मरीजों की मौत हो सकती है। रोग नियंत्रण और रोकथाम के लिए चीन के सूचना प्रणाली के अनुसार, वर्तमान मामले में मृत्यु दर लगभग 16 से 30% के बीच है।

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मरीजों में ल्यूकोसाइट और ब्लड प्लेटलेट्स गिरे

जिआंगसु की राजधानी नानजिंग में एक महिला इस वायरस से संक्रमित हुई। उसमें बुखार और खांसी जैसे लक्षण दिखे। उसके शरीर में ल्यूकोसाइट और ब्लड प्लेटलेट्स में कमी भी देखी गई। एक महीने तक चले इलाज के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दी गई।

मरीज के ब्लड और पसीने से संक्रमण का खतरा

झेजियांग यूनिवर्सिटी के हॉस्पिटल में काम करने वाले डॉ। शेंग जिफांग का कहना है, इस वायरस का संक्रमण एक से दूसरे इंसान में फैल सकता है। संक्रमित मरीज के ब्लड और पसीने से SFTS वायरस फैलने की आशंका है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं, अभी स्थिति नियंत्रण में है।

SFTS वायरस नया नहीं

चीनी वायरस विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वायरस के मानव-से-मानव संक्रमण को खारिज नहीं किया जा सकता है। SARS-CoV-2 के विपरीत, यह पहली बार नहीं है जब SFTS वायरस ने लोगों को संक्रमित किया है। हालिया मामलों की स्थिति केवल बीमारी के फिर से उभरने का प्रतीक है। थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम वायरस (एसएफटीएसवी) के साथ गंभीर बुखार इस वायरस से संबंधित है और टिक काटने के बाद यह उससे मनुष्यों में पहुंच रहा है। वायरस की पहचान सबसे पहले चीन में शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक दशक पहले की थी। 2009 में हुबेई और हेनान प्रांतों के ग्रामीण क्षेत्रों में पहले ऐसे कुछ मामले सामने आए थे। 2011 में चीनी शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, बीमारी की शुरुआत अवधि सात और 13 दिनों के बीच कभी भी हो सकती है।

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बुन्या वायरस से 7 सवाल और उनके जवाब

क्या है यह वायरस?

यह वायरस सीवियर फीवर विद थ्रोम्बोसायटोपीनिया सिंड्रोम का कारण है। इसलिए इसका नाम SFTS वायरस है। बुन्या श्रेणी का होने की वजह से इसे बुन्या वायरस भी कहते हैं।

वायरस कैसे फैलता है?

बुन्या वायरस का कैरियर (वाहक) मकड़ी जैसा जीव टिक है। जब टिक इंसान को काटता है तो संक्रमण फैल जाता है।

इंसान से इंसान में संक्रमण होता है?

चीन के एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह संक्रमित इंसान के ब्लड और पसीने के जरिए दूसरे इंसान में फैल सकता है।

लक्षण क्या हैं?

वायरस से पीड़ित रोगियों को आमतौर पर कई लक्षण नजर आते हैं। पीड़ित होने के बाद मरीज बुखार, थकान, ठंड लगना, सिरदर्द, लिम्फैडेनोपैथी, एनोरेक्सिया, मतली, दस्त, उल्टी, पेट में दर्द, मसूड़ों से रक्तस्राव जैसी समस्या से ग्रस्त हो जाते हैं। इस वायरस की वजह से मरीज में कम प्लेटलेट काउंट और ल्यूकोसाइटोपेनिया की समस्या आती है। ज्यादा गंभीर मामलों में पीड़ित मरीज के शरीर में कई अंग काम करना बंद कर देता है। मरीज को रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होता है और तंत्रिका तंत्र पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। यह वायरस जापान, दक्षिण कोरिया सहित कई अन्य पूर्वी एशियाई देशों में भी मिल चुका है।

मौत का खतरा कितना?

चीन की स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी के मुताबिक, इससे मौत का खतरा 12% तक है।

क्या इसकी वैक्सीन है?

अब तक इसकी कोई वैक्सीन नहीं तैयार की जा सकी है।

बचाव कैसे करें?

संक्रमित लोगों से दूर रहें। जंगल और झाड़ी वाले इलाकों से न गुजरें। सबसे ज्यादा टिक इन्हीं इलाकों में पाए जाते हैं।

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