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सोनभद्र हत्याकांड: जानिए, नरसंहार की घटना में अब तक क्या-क्या हुआ?

By: Pinki Fri, 19 July 2019 4:31 PM

सोनभद्र हत्याकांड: जानिए, नरसंहार की घटना में अब तक क्या-क्या हुआ?

सोनभद्र कांड सीधे-सीधे उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहा है। 10 लोगों की गोली मारकर हत्‍या करने के सनसनीखेज मामले पर सियासत गरमा गई है। 32 ट्रैक्टरों पर सवार होकर करीब 250 से ज्यादा लोग गांव में घुसे और स्थानीय ग्रामीणों पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। किसी के हाथ में गोली लगी तो किसी की टांग में गोली लगी। किसी का सिर फूटा और इस हत्याकांड ने 10 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने बाद पूरे उत्तर प्रदेश में माहौल पैदा कर दिया। यूपी में हुए इस खून खराबे ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। सवाल उठते हैं कि आखिर सोनभद्र में क्यों ताबड़तोड़ गोलियां चलीं? क्यों दर्जनों लोगों को लहूलुहान कर दिया गया? ये सब कैसे, कब और क्यों हुआ? पुलिस क्या कर रही थी? योगी सरकार क्या कर रही थी? विधानसभा में जहां विपक्ष योगी सरकार के कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रही हैं तो वहीं सूबे के मुख्यमंत्री का कहना है कि सोनभद्र की घटना के लिए कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार है। सीएम योगी ने कहा कि 1955 में आदर्श सोसायटी के नाम पर ज़मीन करने का फैसला संदिग्ध और अवैध था जो कांग्रेस की सरकार ने लिया था।

पुलिस ने सोनभद्र हत्याकांड में ग्राम ग्राम प्रधान समेत 11 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। नरसंहार में इस्तेमाल किए गए हथियारों को पुलिस ने बरामद कर लिया है। हालांकि गोलियां बरसाने वाला ग्राम प्रधान अभी फरार है, जबकि ग्राम प्रधान के भतीजे समेत 24 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

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फिलहाल सोनभद्र में जिस जगह घटना हुई थी वहां धारा 144 लगा दी गई है। योगी आदित्यनाथ का कहना है, 'दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सोनभद्र में हुई हत्या की जांच कमिटी करेगी। जो भी दोषी हैं उनको छोड़ा नहीं जाएगा।' वही इस बीच सोनभद्र हत्याकांड के पीड़ितों से मिलने जा रहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के काफीले को शुक्रवार को रोक दिया गया। प्रियंका के इस काफिले को नारायणपुर पुलिस स्टेशन के पास रोका गया। जिसके बाद प्रियंका कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गईं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस घटना में अब तक क्या-क्या हुआ

विधानसभा में हुआ जमकर हंगामा

शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में सोनभद्र हत्याकांड पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष योगी सरकार की कानून व्यवस्था फेल होने की बात कही। विपक्ष ने सरकार पर दवाब बनाया कि जल्द से जल्द इस मामले में कार्रवाई करे। आज विपक्षी दलों ने एक स्वर में बीजेपी के खिलाफ माहौल खड़ा कर दिया। सदन में इन लोगों की नारेबाजी के कारण विधानसभा की कार्यवाही शुरु होने के बाद से ही संकट में फंस गई।

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कांग्रेस जिम्मेदार : योगी आदित्यनाथ

सोनभद्र की घटना पर सदन में बोलते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अपर मुख्य सचिव राजस्व के नेतव में 3 सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। नरसंहार के बोलते हुए कहा कि मुख्य आरोपी सहित 29 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। सीएम ने कहा कि जांच के बाद जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सोनभद्र नरसंहार पर सीएम योगी ने विधानसभा में इस घटना के लिए कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि 1955 में आदर्श सोसायटी के नाम पर ज़मीन करने का फैसला संदिग्ध और अवैध था। आज़ादी के पहले से ही आदिवासी,वनवासी उस जमीन पर खेती करते थे। आदिवासी,वनवासी आदर्श सोसायटी और कुछ लोगो को लगान भी देते थे। 2017 में ये ज़मीन ग्राम प्रधान ने खरीदी और वनवासियों को खेती के एवज़ में पैसा देना बंद कर दिया। 1955 में कांग्रेस सरकार के दौरान आदर्श सोसायटी के गठन में ज़मीन ली गई। 1955,1989 में ये किया गया।

उन्होंने कहा कि अपर मुख्य सचिव राजस्व की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है। ये कमेटी 10 दिन में 1955 से लेकर अबतक की गड़बड़ियों की रिपोर्ट देगी। गड़बड़ी पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

5 लाख का मुआवजा देने का एलान

पीड़ितों के परिजनों को जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए किसान सर्वहित बीमा योजना के अनुसार दिया जाएगा। मृतकों के परिजनों की मांग के अनुसार शासन को जनपद राबर्ट्सगंज, ओबरा एवं घोरावल के विधायक तथा ज़िला पंचायत अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर के साथ एक पत्र शासन को भेजा गया है, जिसमें मृतकों के परिजनों को 10 बीघा ज़मीन और 5 लाख रुपए नक़द तथा घायलों को 5 लाख रूपये नक़द एवं 5 बीघा ज़मीन देने की मांग की गयी है। इसके अलावा जिस मृतक परिवार में कोई कमाने वाला सदस्य न हो उसके एक सदस्य को सफ़ाई कर्मी की नौकरी देने की अनुशंसा की गई है।

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प्रियंका गांधी को लिया गया हिरासत में

सोनभद्र में हुए नरसंहार के मृतकों के परिजनों से मिलने जा रहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को रास्ते में रोक लिया गया। इसके विरोध में प्रियंका गांधी मिर्जापुर में ही धरने पर बैठ गई हैं। धरने पर बैठीं प्रियंका गांधी ने कहा, 'हम बस पीड़ित परिवार से मिलना चाहते हैं। मैं तो यहां तक कहा कि मेरे साथ सिर्फ 4 लोग होंगे। फिर भी प्रशासन हमें वहां जाने नहीं दे रहा है। उन्हें हमें बताना चाहिए कि हमें क्यों रोका जा रहा है। हम यहां शांति से बैठे रहेंगे।' बाद में पुलिस ने प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया गया। हिरासत में लेने के बाद प्रियंका गांधी को चुनार गेस्ट हाउस ले जाया गया। इस दौरान कांग्रेस महासचिव ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि कहां ले जाया जा रहा है, लेकिन वे जहां ले जाएंगे हम जाने को तैयार हैं। लेकिन झुकेंगे नहीं।'

चुनार गेस्ट हाउस भेजा गया


हिरासत में लेने के बाद प्रियंका गांधी को चुनार गेस्ट हाउस ले जाया गया। इस दौरान कांग्रेस महासचिव ने कहा, ''मुझे नहीं पता कि कहां ले जाया जा रहा है, लेकिन वे जहां ले जाएंगे हम जाने को तैयार हैं। लेकिन झुकेंगे नहीं।'' हालांकि चुनार गेस्ट हाउस में प्रियंका गांधी फिर धरने पर बैठ गईं और कहा कि जब तक उन्हें पीड़ित परिवारों से नहीं मिलने दिया जाता है तब तक वह वापस नहीं जाएंगी। इससे पहले प्रियंका गांधी ने वाराणसी के ट्रामा सेंटर में सोनभद्र की घटना में घायलों से मुलाकात की। इस दौरान सोनभद्र हत्याकांड के घायलों के परिनजनों ने प्रियंका गांधी से आपबीती सुनाई।

ST/SC आयोग ने लिया संज्ञान, जांच के लिए बनाई दो सदस्यीय टीम

उधर, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में हुई गोलीबारी की घटना पर संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आयोग ने गुरूवार को घटना की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम बनाई। आयोग ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि उपाध्यक्ष मनीराम कौल के नेतृत्व वाली आयोग की टीम में रामसेवक खारवार भी सदस्य हैं। टीम घटनास्थल पर जाकर आदिवासियों और घायलों से मुलाकात करेगी और अपनी रिपोर्ट अध्यक्ष बृजलाल को सौंपेगी। विज्ञप्ति में कहा गया कि आयोग ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, गांव में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात कर आदिवासियों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए और प्रकरण की भलीभांति जांच कराई जाए। आयोग ने कहा कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो। दोषियों पर गैंगस्टर एक्ट लगाया जाना चाहिए ताकि वे जमानत ना पा सकें।

क्या है मामला?

बुधवार को उत्तर प्रदेश के सोनभद्र के मूर्तिया गांव में जमीन विवाद को लेकर 10 लोगों की हत्या कर दी गई थी। इसमें 28 लोग घायल भी हो गए थे। बताया जा रहा है कि मूर्तिया गांव के बाहरी इलाके में सैकड़ों बीघा खेत है, जिस पर कुछ ग्रामीण पुश्तैनी तौर पर खेती करते आ रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक इस जमीन का एक बड़ा हिस्सा ग्राम प्रधान यज्ञदत्त के नाम है। ग्राम प्रधान ने एक आईएएस अधिकारी से 100 बीघा जमीन खरीदी थी। जब बुधवार सुबह 11 बजे ग्राम प्रधान यज्ञदत्त गुर्जर ने इस जमीन पर कब्जे करने के लिए करीब 200 लोगों और 32 ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे और जमीन जोतने की कोशिश की, तो विवाद हो गया। विरोध करने पर उसकी तरफ के लोगों ने स्थानीय ग्रामीणों पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। इस वारदात में नौ लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी। एक घायल ने बाद में दम तोड़ दिया। 18 अन्य जख्मी हो गए। प्रशासनिक अधिकारी गुरुवार शाम लगभग पांच बजे मृतकों के शव लेकर उभ्भा गांव पहुंचे। शवों को देखते ही पूरे गांव में कोहराम मच गया। शवों को दफ़नाने के स्थान को लेकर प्रशासन एवं ग्रामीणों में विवाद की स्थिति पैदा हो गई। गांव वालों की मांग थी कि जहां गोली चली है, शवों को उसी ज़मीन में दफ़नाया जाए जबकि प्रशासन का कहना था कि परम्परागत स्थान पर ही दफ़नाया जाएगा।

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