
शिवसिंहपुरा जेल में इन दिनाें निरक्षर बंदियाें काे A,B,C और क,ख,ग सिखा रहे हैं। इसके पीछे उद्देश्य है कि अनपढ़ बंदी जब अपनी सजा पूरी कर घर जाए ताे साक्षरता की मदद से वे जीवन काे बेहतर दिशा दे सकें। इसके लिए जेल में राेज दाे घंटे की क्लास लगती है। जिनमें विचाराधीन निरक्षर बंदियाें काे जेल का स्टाफ या फिर बाकी पढे़-लिखे बंदी आखर ज्ञान कराते हैं। शिवसिंहपुरा जेल के डिप्टी जेलर अभिषेक ओला ने बताया कि वर्तमान में करीब 350 बंदी जेल में हैं।
इनमें 27 बंदी ऐसे हैं, जाे अपना नाम भी नहीं लिखा सकते। डीजी ने निर्देश दिए कि ऐसे बंदियाें काे साक्षर करना है। प्लान बनाकर इनकाे पढ़ाने की जिम्मेदारी जेल के स्टाफ व कुछ पढ़े-लिखे बंदियाें काे साैंपी। गुजरे दिनाें में 27 में से पांच-छह ऐसे बंदी हैं, जिनकाे अपना नाम लिखना आ गया है और वे थाेड़ा बहुत पढ़ भी लेते हैं।
बंदियाें काे पढ़ाने के लिए शुरुआत में जेल में पडे़ कबाड़ से उनके लिए लिखने का बाेर्ड बनाया। पाइप जाेड़कर उसकाे स्टेंड पर खड़ा किया। अब कुछ भामाशाह से इनके लिए स्लेट, बड़ते और पेन काॅपी जुटाने की व्यवस्था करवाई। अब जिला शिक्षा अधिकारी से बात की है ताे उन्हाेंने स्टेशनरी और नाेट बुक की सुविधा जुटाकर देने की बात कही है।














