
अक्सर निर्ममता के ऐसे कई मामले सामने आते हैं जब लोग नवजात बच्चों को बीच रास्ते में छोड़ जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया भीलवाडा से जहां जयपुर-कांकरोली स्टेट हाईवे पर बामणिया तिराहा के पास कपड़े की थैली में एक नवजात बिलखता मिला। सूचना पर पहुंची 108 एम्बुलेंस से नवजात बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसको जिला चिकित्सालय रैफर कर दिया गया। हाेली के महीने में मिलने पर बच्चे का नाम प्रहलाद दिया। स्वास्थ्य कार्यकर्ता विवेक टेलर व नीतू गर्ग ने बताया बालक का वजन 2 किलो 185 ग्राम, ब्लड ग्रुप बी पाॅजिटिव है। अभी सांस में तकलीफ होने से हालत गंभीर है।
जानकारी अनुसार शाहपुरा मार्ग पर बामणिया तिराहा के पास एक ईंट भट्टे पर काम करने वाले मनीष नायक व सांवर सिंह सोमवार सुबह 10 बजे जंगल में शौच करके आ रहे थे। इस दौरान नवजात के रोने की आवाज सुनी तो आसपास तलाश की। बरसाती नाले के ऊपर स्थित पेड़ के तने में एक कपड़े की थैली में नवजात बिलखता मिला। दोनों ने भट्टे के मालिक मुकेश कुमार व उपखंड मुख्यालय पर 108 एम्बुलेंस व थाना पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची 108 एम्बुलेंस के स्टाफ ने बच्चे को चिकित्सालय पहुंचाया, जहां पर डाॅ. उपासना मीणा ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला चिकित्सालय रैफर कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर नवजात की माता की तलाश शुरू की है।
बाल कल्याण समिति ने बच्चे का नाम प्रहलाद दिया है। एमजी अस्पताल की शिशु राेग विशेषज्ञ डाॅ. इंदिरा सिंह व स्वास्थ्य कार्यकर्ता रेहाना बानू ने शिशु का स्वास्थ्य परीक्षण कर इलाज शुरू किया। बाल कल्याण समिति अध्यक्ष गिरीश कुमार पांडेय के निर्देश पर सदस्य चन्द्रकला ओझा, फारुख खान पठान व सीमा त्रिवेदी पहुंची बच्चे के स्वाथ्य की जानकारी ली।














