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2.1 KM पर नहीं टूटा था विक्रम से ISRO का संपर्क, ये ग्राफ है सबूत

By: Pinki Wed, 11 Sept 2019 12:36 PM

2.1 KM पर नहीं टूटा था विक्रम से ISRO का संपर्क, ये ग्राफ है सबूत

7 सितंबर को इसरो (ISRO) के मून मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) के विक्रम लैंडर की चांद पर लैंडिंग की तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर से इस बात का पता चला है कि इसरो सेंटर का विक्रम लैंडर (Vikram Lander) से संपर्क 335 मीटर की ऊंचाई पर टूटा था न कि 2.1 किमी की ऊंचाई पर। तस्वीर पर नजर डाले तो हम देखेंगे जिस समय विक्रम लैंडिंग कर रहा था, उसकी डिटेल इसरो के मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स (MOX) की स्क्रीन पर एक ग्राफ के रूप में दिख रही थी। अगर आप देखेंगे इस ग्राफ में तीन रेखाएं दिखाई गई है। बीच वाली रेखा पर ही चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर अपना रास्ता तय कर रहा था। यह लाइन लाल रंग की थी। यह लाइन इसरो द्वारा तय किया गया पूर्व निर्धारित मार्ग था। विक्रम लैंडर इसी लाइन पर चल रहा था। जो हरे रंग की लाइन में दिख रहा रहा है। यह हरी लाइन पहले से तय लाल लाइन के ऊपर ही बन रही थी। सबकुछ सही चल रहा था लेकिन जैसे ही लैंडर 4.2 किमी के ऊपर था उसके रास्ते में थोड़ा बदलाव हुआ था लेकिन बात में वह वापिस ठीक हो गया था। लेकिन जैसे ही लैंडर 2.1 किमी की ऊंचाई पर पहुंचा वह अलग दिशा में चलने लगा। इस समय यह चांद की सतह की तरफ 59 मीटर प्रति सेकंड (212 किमी/सेकंड) की गति से नीचे आ रहा था। 400 मीटर की ऊंचाई तक आते-आते विक्रम लैंडर की गति लगभग उस स्तर पर पहुंच चुकी थी, जिस गति से उसे सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी। इसी ऊंचाई पर वह चांद की सतह के ऊपर हेलिकॉप्टर की तरह मंडरा रहा था। ताकि सॉफ्ट लैंडिंग वाली जगह की स्कैनिंग कर सके। तय किया गया था कि 400 मीटर से 10 मीटर की ऊंचाई तक विक्रम लैंडर 5 मीटर प्रति सेकंड की गति से नीचे आएगा। 10 से 6 मीटर की ऊंचाई तक 1 या 2 मीटर प्रति सेकंड की गति से नीचे लाया जाएगा। फिर इसकी गति जीरो कर दी जाएगी।

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चांद की सतह पर उतरने के लिए 15 मिनट के तय कार्यक्रम के दौरान विक्रम लैंडर की गति को 1680 मीटर प्रति सेकंड यानी 6048 किमी प्रति घंटा से घटाकर जीरो मीटर प्रति सेकंड करना था। 13वें मिनट में मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स की स्क्रीन पर सब रुक गया। तब विक्रम लैंडर की गति 59 मीटर प्रति सेकंड थी। चांद की सतह से 335 मीटर की ऊंचाई पर हरे रंग का एक डॉट बन गया और विक्रम से संपर्क टूट गया। इसके बाद विक्रम लैंडर चांद की सतह से टकरा गया। हालांकि, इसरो वैज्ञानिक अब तक उम्मीद नहीं हारे हैं विक्रम से संपर्क साधने में लगे हैं।

बता दे, इसरो ने बताया कि चांद की सतह पर हार्ड लैंडिंग के बाद चंद्रयान-2 (Chandrayan-2) के लैंडर 'विक्रम' (Vikram Lander) को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। और कोई भी टूट-फूट नहीं हुई है। इसरो के एक अधिकारी ने कहा कि हम लैंडर के साथ संचार को फिर से स्थापित करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसरो लैंडर के साथ फिर से संपर्क स्थापित करने की हर संभव कोशिश कर रहा है। उम्मीद है कि इसरो जल्द ही विक्रम से संपर्क स्थापित करने में कामयाब होगा।

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