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नौसेना दिवस: नवीनतम तकनीक और विध्‍वंसक क्षमता से लैस इंडियन नेवी के शीर्ष 15 युद्धपोत

'भारतीय नौसेना दिवस' मनाए जाने की वजह इसके गौरवमयी इतिहास से जुड़ी हुई है। किसी भी देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए जहाजों अर्थात पोतों की आवश्‍यकता होती है

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Mon, 03 Dec 2018 4:03:39

नौसेना दिवस: नवीनतम तकनीक और विध्‍वंसक क्षमता से लैस इंडियन नेवी के शीर्ष 15 युद्धपोत

भारतीय जल सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रही भारतीय नौसेना की शुरुआत वैसे तो 5 सितंबर 1612 को हुई थी, जब ईस्ट इंडिया कंपनी के युद्धपोतों का पहला बेड़ा सूरत बंदरगाह पर पहुंचा था और 1934 में 'रॉयल इंडियन नेवी' की स्थापना हुई थी, लेकिन हर साल चार दिसंबर को 'भारतीय नौसेना दिवस' मनाए जाने की वजह इसके गौरवमयी इतिहास से जुड़ी हुई है। किसी भी देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए जहाजों अर्थात पोतों की आवश्‍यकता होती है जो नवीनतम तकनीक और विध्‍वंसक क्षमता से लैस होते हैं। इन्‍हीं पोतों की शक्ति पर ही सेना की हार या जीत निर्भर करती है। भारतीय नौसेना के पास आईएनएस निर्भीक, आईएनएस गोदावरी और आईएनएस विक्रांत सेना के मुख्‍य पोत है। यह पोत विमान वाहक तो हैं ही साथ ही मिसाइल ले जाने और उसमें लगे सयंत्रों के माध्‍यम से चालित करने के कारण विध्‍वंसक भी होते हैं। इन्‍हीं पोतों की शक्ति के कारण भारत की नौसेना विश्‍व की सबसे मजबूत नौसेनाओं में से एक है। आधुनिक भारतीय नौसेना की नींव 17वीं शताब्दी में रखी गई थी, जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक समुद्री सेना के बेड़े रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की। यह बेड़ा 'द ऑनरेबल ईस्ट इंडिया कंपनीज मरीन' कहलाता था। बाद में यह 'द बॉम्बे मरीन' कहलाया। पहले विश्व युद्ध के दौरान नौसेना का नाम 'रॉयल इंडियन मरीन' रखा गया।

26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र बना और इसी दिन भारतीय नौसेना ने अपने नाम से 'रॉयल' को त्याग दिया। उस समय भारतीय नौसेना में 32 नौ-परिवहन पोत और लगभग 11,000 अधिकारी और नौसैनिक थे। 15 अगस्त 1947 में भारत को जब देश आजाद हुआ था, तब भारत के नौसैनिक बेड़े में पुराने युद्धपोत थे।

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आईएनएस निर्भीक

आईएनएस निर्भीक भारतीय नौसेना की वीर श्रेणी का पोत है। इसका कुल भार 455 टन है। इसकी रफ्तार 59 किमी प्रतिघंटे है। इसकी लम्‍बाई 56 मीटर और चौड़ाई 10।5 मीटर है। 11 जनवरी, 2018 को मुंबई स्थित नौसैनिक पोतगाह पर आयोजित एक औपचारिक समारोह में INS निर्भीक को सेवामुक्त कर दिया गया।

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आईएनएस गोदावरी (एफ20)

आईएनएस गोदावरी(एफ20) एक स्‍वदेशी पोत है जिसका निर्माण मुंबई में किया गया था। इसे 10 दिसम्‍बर 1983 में नौसेना में शामिल किया गया था।

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आईएनएस कुठार

आईएनएस कुठार पोत में 14,400 हार्सपावर के दो डीजल इंजिन लगे होते है। इसकी लम्‍बाई 91।1 मीटर है और चौड़ाई 10।5 मीटर है। इसकी रफ्तार 50 किमी प्रति घंटे है। 1998 तक आईएनएस कुठार पश्चिमी नौसेना कमान का हिस्सा था। बाद में इसे पूर्वी नौसेना कमान का हिस्सा बनने के लिए ले जाया गया। 15 जुलाई, 2016 को यह पोत एक मिशन के दौरान दुर्घटना में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। मिशन को पूरा करने के बाद यह बंदरगाह पर लौट आया।

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आईएनएस तलवार (एफ 40)

यह पोत भारतीय नौसेना की तलवार श्रेणी का पोत है। इसका निर्माण रूस में किया गया था। 18 जून, 2003 को इसे भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। शामिल किये जाने के बाद से ही इस पोत को कई नौसैनिक आपरेशन में शामिल किया गया है। इसकी लम्बाई 124.8 मीटर तथा चौड़ाई 15.2 मीटर है। आईएनएस तलवार (एफ़40) की रफ़्तार 30 नोट्स (56 कि.मी. प्रति घण्टा) है।

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आईएनएस मैसूर (डी60)

आईएनएस मैसूर (डी60) भारतीय नौसेना का मिसाइल वाहक पोत है जो कि अभी सेवा में है। यह एक स्‍वदेशी पोत है। जिसका निर्माण मुंबई में किया गया था। आईएनएस मैसूर (डी60) 1999 से भारतीय नौसेना में शामिल है। यह पोत एक साथ दो 'सी किंग' (Sea King) हेलिकॉप्टर ले जाने की क्षमता रखता है।

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आईएनएस विक्रांत (आर 11)

आईएनएस 'विक्रांत' भारतीय नौसेना पहला युद्धपोतक विमान था, जिसे 1961 में सेना में शामिल किया गया था। इस पोत ने 1971 में भारत और पाकिस्‍तान के युद्ध में पूर्वी पाकिस्‍तान में समुद्री नाकेबन्‍दी में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारत ने इसे 1957 में यूनाइटेड किंगडम से खरीदा था।

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आईएनएस ताबार ( एफ44)

आईएनएस ताबार (एफ44) भारतीय नौसेना की तलवार श्रेणी का तीसरा पोत है। यह रूस निर्मित एक पोत है। यह कई मिसाइलों से लैस पोत है।

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आईएनएस तरंगिनी

आईएनएस तरंगिनी भारतीय नौसेना का एक बड़ा पोत है। इसे 1997 में सेना में शामिल किया गया था। इसका निर्माण गोवा में किया गया था। इसका डिजाइन ब्रिटिश नौसेना के आकिटेक्‍ट कोलिन मूडी ने तैयार किया था।

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आईएनएस विराट ( आर 22)

यह प्रशांत महासागर में सक्रिय विमान वाहक पोत है। यह आईएनएस ज्‍योति के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा पोत है। इसे 1959 में रॉयल नौसेना के लिए बनाया गया था और 1986 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।

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आईएनएस ज्‍योति

आईएनएस ज्‍योति भारतीय नौसेना का अत्‍याधुनिक पोत है। जो विमान वाहक पोत है।

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आईएनएस रनवीर ( डी54)

आईएनएस रनवीर ( डी54) आईएनएस रनवीर ( डी54) भारतीय नौसेना की राजपूत श्रेणी का विध्‍वंसक विमान है। इसे 28 अक्‍टूबर 1986 को सेना में शामिल किया गया था।

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आईएनएस करमुक (पी64)

आईएनएस करमुक (पी64) आईएनएस करमुक( पी64) पोत ने अन्‍य नौसेना पोत जैसे कि आईएनएस(ए57) और आईएनएस राना पोत के साथ मिलकर जापानी नौसेना के साथ एडमिरल पी अजित सिंह के नेतृत्‍व में अभ्‍यास में भाग लिया था।

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आईएनएस दर्शक

आईएनएस दर्शक इसका निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में किया गया था और सन 2001 में एस।एस। कार्निक के कमांड में नौसेना में शामिल किया गया था। देश में निर्मित पहला आईएनएस दर्शक सबसे पहले 1964 में सेना में शामिल किया गया था।

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आईएनएस शिवालिक ( एफ47)

आईएनएस शिवालिक ( एफ47) इस पोत का नाम शिवालिक पर्वत श्रेणियों के नाम पर दिया गया है। इसका भारत 6200 टन है। इसकी लम्‍बाई 468 फीट और चौड़ाई 58 फीट है। इस युद्धपोत में आधुनिकतम नियंत्रण प्रणालियां और रेडार की पकड़ में आने से बचने की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ऐसे युद्धपोत बनाने की क्षमता रखने वाले अन्य देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, चीन, जापान और इटली शामिल हैं।

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स्‍वदेशी आईएनएस विक्रांत

स्‍वदेशी आईएनएस विक्रांत देश के पहले स्‍वदेशी युद्धपोत आईएनएस विक्रांत को 12 अगस्‍त 2013 को समुद्र में उतरा गया। आईएनएस विक्रांत को देश के रक्षामंत्री एके एंटनी ने अपनी पत्‍नी एलिजाबेथ के साथ कोच्चि में लॉन्‍च किया। विक्रांत का भारत 37,500 टन है, जो अमेरिका, यूके, रूस और फ्रांस के युद्धपोतों को टक्‍कर देगा।

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