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नौसेना दिवस पर जानिए भारतीय नौसेना का इतिहास

आधुनिक भारतीय नौसेना की नींव 17वीं शताब्दी में रखी गई थी

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Mon, 03 Dec 2018 3:07:09

नौसेना दिवस पर जानिए भारतीय नौसेना का इतिहास

नौसेना दिवस प्रत्येक वर्ष 4 दिसम्बर को मनाया जाता है। यह 1971 की जंग में भारतीय नौसेना की पाकिस्तानी नौसेना पर जीत की याद में मनाया जाता है। 4 दिसंबर, 1971 को नौसेना ने कराची स्थित पाकिस्तान नौसेना हेडक्वार्टर पर पहला हमला किया था। एम्‍यूनिशन सप्‍लाई शिप समेत कई जहाज नेस्‍तनाबूद कर दिए गए थे। इस दौरान पाक के ऑयल टैंकर भी तबाह हो गए। दरहसल, 3 दिसंबर को भारतीय सेना पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाक सेना के ख़िलाफ़ जंग की शुरुआत कर चुकी थी। जिसके तहत 4 दिसंबर, 1971 को भारतीय नौसेना ने कराची नौसैनिक अड्डे पर भी हमला बोल दिया था। इस यु्द्ध में पहली बार जहाज पर मार करने वाली एंटी शिप मिसाइल से हमला किया गया था। भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन का नाम ट्राइडेंट रखा था। भारतीय सेना की तरफ से किए गए जवाबी हमले में 4 पाकिस्तानी जहाज और कराची बंदरगाह का फ्यूल टैंक पूरी तरह से बर्बाद हो गया था। इस हमले में 500 पाकिस्तानी नौसैनिक भी शहीद हो गए थे। यह हमला एक घंटे से अधिक समय तक चला था। भारत ने कुल छह मिसाइलों को दागा था। भारतीय नौसेना ने न केवल 4 पाकिस्तानी जहाजों को डुबोया था, बल्कि अपने सभी नौसैिकों को सुरक्षित लेकर घर लौटे थे। भारतीय पक्ष पर कोई हताहत न होने के कारण, यह अभियान द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के आधुनिक नौसैनिक इतिहास में सबसे सफल माना जाता था।

भारतीय नौसेना का इतिहास

भारतीय जल सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रही भारतीय नौसेना की शुरुआत वैसे तो 5 सितंबर 1612 को हुई थी, जब ईस्ट इंडिया कंपनी के युद्धपोतों का पहला बेड़ा सूरत बंदरगाह पर पहुंचा था और 1934 में 'रॉयल इंडियन नेवी' की स्थापना हुई थी, लेकिन हर साल चार दिसंबर को 'भारतीय नौसेना दिवस' मनाए जाने की वजह इसके गौरवमयी इतिहास से जुड़ी हुई है।

भारतीय नौसेना की नींव 17वीं शताब्दी में रखी गई थी

आधुनिक भारतीय नौसेना की नींव 17वीं शताब्दी में रखी गई थी, जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक समुद्री सेना के बेड़े रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की। यह बेड़ा 'द ऑनरेबल ईस्ट इंडिया कंपनीज मरीन' कहलाता था। बाद में यह 'द बॉम्बे मरीन' कहलाया। पहले विश्व युद्ध के दौरान नौसेना का नाम 'रॉयल इंडियन मरीन' रखा गया।

26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र बना और इसी दिन भारतीय नौसेना ने अपने नाम से 'रॉयल' को त्याग दिया। उस समय भारतीय नौसेना में 32 नौ-परिवहन पोत और लगभग 11,000 अधिकारी और नौसैनिक थे। 15 अगस्त 1947 में भारत को जब देश आजाद हुआ था, तब भारत के नौसैनिक बेड़े में पुराने युद्धपोत थे।

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आईएनएस 'विराट' को 1986 में शामिल किया गया

आईएनएस 'विक्रांत' भारतीय नौसेना पहला युद्धपोतक विमान था, जिसे 1961 में सेना में शामिल किया गया था। बाद में आईएनएस 'विराट' को 1986 में शामिल किया गया, जो भारत का दूसरा विमानवाही पोत बन गया। आज भारतीय नौसेना के पास एक बेड़े में पेट्रोल चालित पनडुब्बियां, विध्वंसक युद्धपोत, फ्रिगेट जहाज, कॉर्वेट जहाज, प्रशिक्षण पोत, महासागरीय एवं तटीय सुरंग मार्जक पोत (माइनस्वीपर) और अन्य कई प्रकार के पोत हैं।

आईएनएस 'गरुड़' का शामिल होना

इसके अलावा भारतीय नौसेना की उड्डयन सेवा कोच्चि में आईएनएस 'गरुड़' के शामिल होने के साथ शुरू हुई। इसके बाद कोयम्बटूर में जेट विमानों की मरम्मत व रखरखाव के लिए आईएनएस 'हंस' को शामिल किया गया।

भारतीय नौसेना ने जल सीमा में कई बड़ी कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनमें प्रमुख है जब 1961 में नौसेना ने गोवा को पुर्तगालियों से स्वतंत्र करने में थल सेना की मदद की। इसके अलावा 1971 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ा तो नौसेना ने अपनी उपयोगिता साबित की। भारतीय नौसेना ने देश की सीमा रक्षा के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा शांति कायम करने की विभिन्न कार्यवाहियों में भारतीय थल सेना सहित भाग लिया। सोमालिया में संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्रवाई इसी का एक हिस्सा थी।

देश के अपने स्वयं के पोत निर्माण की दिशा में आरंभिक कदम उठाते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने बंबई (मुंबई) के मजगांव बंदरगाह को 1960 में और कलकत्ता (कोलकाता) के गार्डन रीच वर्कशॉप (जीआरएसई) को अपने अधिकार में लिया। वर्तमान में भारतीय नौसेना का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है और यह मुख्य नौसेना अधिकारी 'एडमिरल' के नियंत्रण में होता है।

भारतीय नौ सेना तीन क्षेत्रों की कमान (पश्चिम में मुंबई, पूर्व में विशाखापत्तनम और दक्षिण में कोच्चि) के तहत तैनात की गई है, जिसमें से प्रत्येक का नियंत्रण एक फ्लैग अधिकारी द्वारा किया जाता है।

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