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'बाहुबली' : जिसके कंधों पर बैठकर भारत पूरा करेगा मिशन 'चंद्रयान-2', जाने इसकी खासियत

By: Pinki Mon, 22 July 2019 08:51 AM

'बाहुबली' : जिसके कंधों पर बैठकर भारत पूरा करेगा मिशन 'चंद्रयान-2', जाने इसकी खासियत

भारत के मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) का काउंटडाउन शुरू हो गया है। दोपहर 2:43 बजे इसे लॉन्च किया जाएगा। भारत के मिशन चंद्रयान-2 में रोबोटिक रोवर को चांद की सतह पर उतारा जाएगा। जिस GSLV Mk3 रॉकेट से चंद्रयान-2 को लॉन्च किया जाना है। पहले इस रॉकेट के जरिए चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को तड़के 2:51 बजे लॉन्च किया जाना था लेकिन लॉन्चिंग से एक घंटे पहले इसमें तकनीकी खराबी का पता चलने के बाद इसे रोक दिया गया। अब 22 जुलाई को दोपहर 2:43 बजे इसे लॉन्च किया जाएगा।

इसके बड़े आकार के चलते नाम दिया गया है 'बाहुबली'

चंद्रयान मिशन-2 में रोबोटिक रोवर को चांद पर ले जाने वाले रॉकेट को उसके विशालकाय आकार की वजह से बाहुबली (Rocket Bahubali) नाम दिया गया है। दरअसल इसका नाम जियोसिंक्रोनस स्टैडिंग सेटेलाइट लॉन्च व्हिकल मार्क 3 यानी GSLV Mk3 है। इसरो के वैज्ञानिक इसे बाहुबली कह रहे हैं। बाहुबली का वजन करीब 640 टन है। इसकी ऊंचाई 15 स्टोरी बिल्डिंग के बराबर है। बाहुबली रॉकेट करीब 3.8 टन वजनी सेटेलाइट को चांद पर ले जाएगा। भारत के सबसे भारी-भरकम लॉन्च पैड से ये तीसरा लॉन्च होगा। इस मिशन की सबसे बड़ी बात ये है कि ये पूरी तरह से स्वदेशी है। इस मिशन की कामयाबी के बाद भारत चांद की सतह पर लैंड करने वाला चौथा देश बन जाएगा। इसके पहले अमेरिका, रुस और चीन अपने यान को चांद की सतह पर भेज चुके हैं। लेकिन अब तक किसी ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास कोई यान नहीं उतारा है।

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बाहुबली की खासियत

- अब तक का सबसे शक्तिशाली और भारीभरकम लॉन्चर है। जिसे पूरी तरह से देश में बनाया गया है।
- इसका वजन 640 टन है। इसकी ऊंचाई 15 स्टोरी बिल्डिंग के बराबर है।
- बाहुबली रॉकेट करीब 3.8 टन वजनी सेटेलाइट को चांद पर ले जाएगा। लो अर्थ ऑर्बिट में ये 10 टन वजनी सेटेलाइट ले जा सकता है।
- ये चंद्रायन मिशन-2 के सेटेलाइट को उसके ऑर्बिट में स्थापित करेगा।
- इसमें S200 रॉकेट बूस्टर लगे हैं जो रॉकेट को इतनी शक्ति देगा कि वो आसमान में छलांग लगा सके। S200 को विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में बनाया गया है।
- इसमें सबसे शक्तिशाली क्रायोजेनिक इंजन C25 लगा है जिसे CE-20 पावर देगा।
- GSLV Mk 3 के अलग-अलग मॉडल का अब तक तीन बार सफल प्रक्षेपण हो चुका है।

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बता दे, इस पूरे प्रोजेक्ट में इसरो को 11 साल लग गए हैं। चंद्रयान 2 भारत का दूसरा मून मिशन है। भारत पहली बार चांद की सतह पर लैंडर और रोवर उतारेगा। जो वहां के विकिरण और तापमान का अध्ययन करेगा। मिशन का प्राथमिक उद्देश्य चांद की सतह पर सुरक्षित उतरना या कहे कि धीरे-धीरे आराम से उतरना (सॉफ्ट-लैंडिंग) और फिर सतह पर रोबोट रोवर संचालित करना है। इसका मकसद चांद की सतह का नक्शा तैयार करना, खनिजों की मौजूदगी का पता लगाना, चंद्रमा के बाहरी वातावरण को स्कैन करना और किसी न किसी रूप में पानी की उपस्थिति का पता लगाना होगा। दक्षिणी सतह पर पहुंचने के बाद लैंडर (विक्रम) का दरवाजा खुलेगा और रोवर (प्रज्ञान) उससे बाहर निकलेगा। इस प्रक्रिया में चार घंटे का वक्त लगेगा। रोवर के सतह पर आने के 15 मिनट बाद ISRO को वहां की तस्वीर मिलनी शुरू हो जाएगी।

भारत ने अपना पहला मून मिशन चंद्रयान-1 2008 में लॉन्च किया था। उस वक्त इस प्रोजेक्ट में करीब 450 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। इस बार इसरो का प्रोजेक्ट 1 हजार करोड़ रुपए का है। चांद पर भारत के कदम बस पड़ने ही वाले हैं। बस कुछ ही दिनों में हम चांद की धरती फतह कर लेंगे।

बता दें कि इससे पहले 15 जुलाई को चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण तकनीकी खामी आ जाने पर रोक दिया गया था। प्रक्षेपण को तय समय से करीब 1 घंटे पहले टाल दिया गया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ट्वीट किया था, 'तकनीकी गड़बड़ी के कारण 15 जुलाई, 2019 को रोका गया चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण अब भारतीय समय के अनुसार सोमवार, 22 जुलाई, 2019 को दोपहर 2:43 बजे तय किया गया है।' सोमवार को इसरो चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान को चांद पर भेजने के लिए पूरी तरह से तैयार है। रविवार को इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) चीफ के सिवन ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को लेकर सभी तैयारी कर ली गई है। पहले की लॉन्चिंग के समय जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (जीएसएलवी मार्क-3) में आई तकनीकी खराबी दूर कर ली गई है।

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