
जोधपुर की एक युवती ने नई दिल्ली से लेह-लद्दाख तक की यात्रा अपने परिजनों व मित्रों के साथ हवाई जहाज से करने के इरादे से एक एयरलाइंस के ऑनलाइन टिकट बुक कराए, लेकिन प्लेन से उन्हें उतारा गया और अगले दिन भी ऐसा ही रवैया दोहराया गया, जिसे जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग जोधपुर द्वितीय के अध्यक्ष डॉ. श्यामसुंदर लाटा, सदस्य अनुराधा व्यास व आनंदसिंह सोलंकी पीठ ने सेवा में त्रुटि व मानसिक प्रताड़ना मानते हुए गो एयरलाइंस को 35 हजार रुपए परिवादी महिला को चुकाने के आदेश दिए।
परिवादिनी मोनिका गहलोत की ओर से अधिवक्ता पीके पूनिया ने एक परिवाद दायर कर आयोग को बताया कि उसने अपने रिश्तेदारों व मित्रों सहित 15 व्यक्तियों के लिए नई दिल्ली से लेह तक के 15 जून 2014 को गो एयरलाइंस इंडिया लिमिटेड की फ्लाइट के ई-टिकट बुक करवाए तथा सभी कन्फर्म टिकट थे। सभी 15 जून को प्लेन में आवंटित सीट पर बैठ गए। कुछ देर बाद परिवादिनी को बताया गया कि उनके टिकट कैंसिल हो गए हैं।
अगले दिन 16 जून के नए टिकट आवंटित किए गए। वे फिर जाकर प्लेन में बैठे तो उनके टिकट दुबारा कैंसिल होना बताकर नीचे उतारा गया। अन्य फ्लाइट से उन्हें यात्रा करवाई गई। परिवादी ने मानसिक प्रताड़ना के 10 लाख रुपए दिलाने का आग्रह किया। एयरलाइंस ने कोई जवाब नहीं दिया गया। इस पर पीठ ने 10 हजार रुपए तथा शारीरिक, मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति के 20 हजार रुपए व परिवाद व्यय पेटे 5 हजार रुपए कुल 35 हजार रुपए चुकाने के आदेश दिए।














