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Womens Day Special : अर्जुन पुरस्कार और पद्‌मश्री से सम्मानित 400 मीटर दौड़ में चैंपियन वालसम्मा का परिचय

उनका पहला पदक 1979 में उन्हें मिला, जब उन्होंने अन्तर-विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में 100 मीटर बाधा दौड़ में विजय पाई ।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Mon, 05 Mar 2018 4:01:00

Womens Day Special : अर्जुन पुरस्कार और पद्‌मश्री से सम्मानित 400 मीटर दौड़ में चैंपियन वालसम्मा का परिचय

एम.डी वालसम्मा को उनके परिचित ‘वाल्सु’ नाम से पुकारते हैं । वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक पाने वाली तृतीय भारतीय खिलाड़ी थीं । उनके पूर्व 1974 में कमलजीत संधू ने 400 मीटर दौड़ में एशियाई स्वर्ण पदक जीता था । इन दोनों खिलाड़ियों ने विदेशी धरती पर एशियाई पदक जीता था, जब कि वालसम्मा ने भारत में दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में बेहतरीन प्रदर्शन करके स्वर्ण पदक हासिल किया । वे उस बार बाधा दौड़ में पहली बार एशियाई खेलों में सम्मिलित की गई थीं ।

एम.डी. वालसम्मा का जन्म केरल के केन्नौर जिले के ओटाथाई गांव में हुआ था । उनका एथलेटिक कैरियर स्कूली जीवन से ही आरम्भ हो गया था । कॉलेज तक आते-आते वह खेलों के प्रति अधिक गम्भीर हो गईं । उन्होंने मर्सी कॉलेज, पालघाट से उच्च शिक्षा ग्रहण की । उनका पहला पदक 1979 में उन्हें मिला, जब उन्होंने अन्तर-विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में 100 मीटर बाधा दौड़ में विजय पाई ।

उन्होंने दक्षिण रेलवे में नौकरी करते हुए ऐ.के. कुट्टी से कोचिंग ली । उन्होंने सुर्खियों में स्थान तब पाया जब 1981 में अन्तर-राज्य मीट, बंगलौर में उन्होंने 5 स्वर्ण पदक जीते । ये पदक उन्होंने 100 मीटर बाधा दौड़, 400 मीटर बाधा दौड़, 400 मीटर दौड़ तथा 100 व 400 मीटर रिले दौड़ में जीते । उनके इस सराहनीय प्रदर्शन से उन्हें रेलवे तथा राष्ट्रीय टीम में स्थान मिल गया । 1982 में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतते हए 400 मीटर बाधा दौड़ में राष्ट्रीय चैंपियनशिप हासिल की, साथ ही नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया जो पिछले एशियाई रिकॉर्ड से बेहतर था |

982 के दिल्ली में हुए एशियाई खेलों में वालसम्मा ने 400 मीटर बाधा ‘दौड़ में 58.47 सेकंड का नया राष्ट्रीय व एशियाई रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता | उनके इसी श्रेष्ठ प्रदर्शन के कारण उन्हें 1982 में ‘अर्जुन अवार्ड’ प्रदान किया गया तथा 1983 में उन्हें ‘पद्‌मश्री’ से सम्मानित किया गया । उन्हें केरल सरकार द्वारा ‘जी.वी. राजा’ पुरस्कार प्रदान किया गया ।

वह भारतीय टीम के सदस्य के रूप में ‘मलेशिया ओपन’ में भाग लेने गईं और 400 मीटर के लिए रजत पदक प्राप्त किया और 4 * 400 मीटर रिले दौड़ में स्वर्ण पदक प्राप्त किया | उन्होंने 1983 के मास्को खेलों में भी भाग लिया । 1983 के साउथ एशियन फैडरेशन (सैफ) खेल, इस्लामाबाद में वालसम्मा ने 100 मीटर दौड़ में रजत पदक, 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक प्राप्त किया ।

1990 में बीजिंग में हुए एशियाई खेलों में वालसम्मा ने 4 * 400 मीटर रिले तथा 4 * 400 मीटर रिले दौड़ में रजत पदक प्राप्त किया ।

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एम.डी. वालसम्मा का कैरियर लगभग 15 वर्ष का रहा जिसमें उन्होंने अनेक विश्व कप प्रतियोगिता में हिस्सा लिया जैसे हवाना, टोकियो, लंदन आदि । उन्होंने अनेक बार एशियाई खेलों में भी भाग लिया जैसे 1982,1986,1990,1994 के एशियाई खेल | वालसम्मा ने कई एशियन ट्रैक एंड फील्ड मीट तथा सैफ खेलों में भी भाग लिया | उनके खेल की विशेषता यह रही कि उन्होंने अपने सभी प्रदर्शनों में अपनी छाप छोड़ी और कोई न कोई पुरस्कार अवश्य प्राप्त किया।

उपलब्धियां :

वालसम्मा ने 1979 में अन्तर विश्वविद्यालय चैंपियनशिप में 100 मीटर बाधा दौड़ में पदक जीता |
1981 में अन्तर-राज्य मीट, बंगलौर में उन्होंने 5 स्वर्ण पदक जीते |
1982 में वालसम्मा ने नया रिकार्ड बनाते हुए 400 मीटर दौड़ में चैंपियनशिप हासिल की |
मलेशिया ओपन में उन्होंने 400 मीटर दौड़ में रजत तथा 4 * 400 मीटर रिले दौड़ में स्वर्ण पदक प्राप्त किया |
1982 में दिल्ली में हुए एशियाई खेलों में उन्होंने 400 मीटर बाधा दौड़ में नया एशियाई रिकार्ड (58.47 सेकंड) बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता | उन्होंने 4 * 400 मीटर रिले दौड़ में रजत पदक प्राप्त किया |
1983 के सैफ खेलों ( इस्लामाबाद) में उन्होंने 100 मीटर दौड़ में कांस्य, 400 मीटर दौड़ में रजत तथा 4 * 400 मीटर रिले दौड़ में स्वर्ण पदक जीते |
1990 के बीजिंग एशियाई खेलों में वालसम्मा ने 4 * 400 मीटर तथा 4 * 400 मीटर रिले दौड़ों में रजत पदक जीता ।
उन्हें 1982 में ‘अर्जुन पुरस्कार’ प्रदान किया गया |
उन्हें 1983 में ‘पद्‌मश्री’ से सम्मानित किया गया ।
केरल सरकार ने उन्हें जी. वी. राजा अवॉर्ड प्रदान किया |

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