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रामायण-महाभारत के कारण बच्चों में देखे जा रहे ये बदलाव

By: Priyanka Wed, 20 May 2020 1:56 PM

रामायण-महाभारत के कारण बच्चों में देखे जा रहे ये बदलाव

दूरदर्शन पर दिखाये गए धारावाहिक रामायण ने देश के करोड़ों लोगों की लाइफ को बदल दिया है। अब लोग सुबह उठते ही गुड मॉर्निंग की जगह राम-राम या प्रणाम बोलने लगे हैं। बच्चों में पुराने जमाने के गुरुकुलम को लेकर काफी उत्सुकता है। बच्चे जानना चाहते हैं कि उस युग में बिना कंप्यूटर के पढाई लिखाई कैसे होती थी। गुरुकुलम क्यों बंद कर दिये गये बगैरह-बगैरह। आइये जानते हैं कैसे।

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भाषा शैली

बच्चे नए शब्द सीख गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि बच्चे दैनिक जीवन में भी इन शब्दों को प्रयोग कर रहे हैं। बच्चे टीचर को गुरुजी, माता-पिता को माताजी और पिताजी, चाचा-चाची को काका और काकी, भाई को भ्राता, फूड को खाना और सुबह को भोर कहकर पुकार रहे हैं। वो इनके अलावा भी अन्य हिंदी शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।

घूमने का मन

घूमने-फिरने के शौकीन लोग तो रामायण-महाभारत देखने के बाद अब उन स्थानों पर घूमने का मन बना रहे हैं जिन का जिक्र इन धारावाहिकों में किया गया है। खास तौर पर भगवान राम ने वनवास के दौरान जहां-जहां दिन बिताए थे उन-उन स्थानों को देखने की योजना बनाने लगे हैं। भारत के लोगों में अयोध्या के अलावा, किष्किंधा, पंचवटी, चित्रकूट के अलावा महाभारतकालीन नगरों हस्तिनापुर, खाण्डव वन, कुरुक्षेत्र और इंद्रप्रस्थ के बारे में जानने और देखने की उत्सुकता बढ़ रही है। कुछ लोग तो के लोग श्रीलंका के साथ ही रामसेतु और रामेश्वरम देखने की योजना बना रहे हैं।

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टाइटल सांग

बच्चे तात, दाऊ, भ्राता, अनुज, माता और पिताश्री जैसे शब्दों को दैनिक जीवन में प्रयोग कर रहे हैं। बच्चे भोर, संध्या, प्रहर जैसे शब्दों को लेकर भी बच्चों में काफी उत्सुकता है। इतना ही नहीं संस्कृत के श्लोकों के साथ ही रवींद्र जैन, महेंद्र कपूर और अशोक भिमाणी की आवाज में रामायण और महाभारत के टाइटल सांग भी बच्चों की पहली पसंद बन चुके हैं।

बच्चों में बढ़ी जिज्ञासा


बच्चों में रामायण-महाभारत शब्दों को जानने की जिज्ञासा बढ़ी है। बच्चे राम, कृष्ण के बारे में पूछते हैं। अब वे सोशल मीडिया के स्लैंग लैंग्वेज के बजाय हिंदी के शब्द बोलने लगे हैं। भगवान राम, सीताजी और अन्य पात्रों से बहुत कुछ सीख रहे हैं। पूछते हैं कि जब वनवास सिर्फ श्रीराम को हुआ था तो सीताजी और लक्ष्मणजी साथ क्यों गए? हनुमानजी रामजी के इतने भक्त क्यों हैं? इन बातों के जवाब में ही उन्हें कई संस्कार मिल जाते हैं।

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