चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका यात्रा के दौरान दो जायंट पांडा अमेरिका भेजने का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि नर पांडा पिंग पिंग और मादा पांडा फू शुआंग को जल्द ही अटलांटा जू भेजा जाएगा। शी ने इन दोनों पांडा को चीन और अमेरिका के लोगों के बीच दोस्ती का दूत बताया। हालांकि, दोनों पांडा अटलांटा कब पहुंचेंगे, इसकी तारीख अभी सामने नहीं आई है।
अटलांटा जू को मिलेंगे पिंग पिंग और फू शुआंग
दोनों पांडा को अमेरिका भेजने की योजना अप्रैल में चाइना वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन एसोसिएशन (CWCA) और अटलांटा जू के बीच हुए नए रिसर्च एग्रीमेंट का हिस्सा है। इस समझौते के तहत CWCA, चेंगदू रिसर्च बेस ऑफ जाइंट पांडा ब्रीडिंग से नर पांडा पिंग पिंग और मादा पांडा फू शुआंग को अटलांटा भेजेगा।
शी जिनपिंग ने कहा कि इन पांडा के जरिए दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और दोस्ती को आगे बढ़ाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य चीन और अमेरिका के बीच सहयोग बढ़ाना और दोनों देशों के लोगों की भलाई को बढ़ावा देना है।
शी ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर ईमानदारी से सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, अमेरिका और चीन के हित एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं और दोनों देशों के बीच साथ मिलकर काम करने की काफी गुंजाइश है।
1972 से दोस्ती का प्रतीक हैं जायंट पांडा
अमेरिका और चीन के बीच संबंधों में जायंट पांडा का खास प्रतीकात्मक महत्व रहा है। इसकी शुरुआत 1972 में हुई थी, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने चीन का दौरा किया था। इस दौरान चीनी प्रीमियर झोउ एनलाई ने अमेरिका को लिंग-लिंग और ह्सिंग-ह्सिंग नाम के दो पांडा दिए थे।
इन पांडा को वाशिंगटन डीसी के नेशनल जू में रखा गया था। दोनों लंबे समय तक वहां के प्रमुख आकर्षण बने रहे और 1990 के दशक में अपनी मौत तक लोगों का ध्यान खींचते रहे। पांडा के इस आदान-प्रदान ने आगे चलकर जिस परंपरा को जन्म दिया, उसे 'पांडा डिप्लोमेसी' यानी 'पांडा कूटनीति' कहा गया।
अटलांटा जू और चीन के बीच पांडा को लेकर पहले भी सहयोग रहा है। इससे जुड़ा एक अलग समझौता 2024 में समाप्त हुआ था, जिसके बाद अटलांटा जू में मौजूद पांडा की एक जोड़ी को चीन वापस भेज दिया गया था।
ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच भी हुई बातचीत
पांडा भेजने का ऐलान ऐसे समय हुआ है जब डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच भी बैठक हुई। बैठक के दौरान ट्रंप ने अमेरिका और चीन के संबंधों को लेकर कहा कि दोनों देशों के रिश्ते 'पहले से कहीं बेहतर' हैं। उन्होंने शी के साथ दोनों देशों के आपसी संबंधों की समीक्षा की।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन मिलकर ऐसा रिश्ता बना सकते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए खुशहाली और सुरक्षा को बढ़ावा दे।
वहीं, शी जिनपिंग ने कहा कि चीन-अमेरिका संबंध एक और ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि ट्रंप के साथ उनकी बातचीत ईमानदार और गहरी रही तथा कई मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच सहमति बनी। शी के मुताबिक, इस बातचीत से रणनीतिक स्थिरता वाले चीन-अमेरिका के रचनात्मक संबंधों को मजबूती मिली और दोनों देशों के रिश्तों को नई रणनीतिक दिशा मिली।
158 साल पुराने रिश्तों और द्वितीय विश्व युद्ध का भी जिक्र
बैठक के दौरान ट्रंप और शी ने अमेरिका-चीन के ऐतिहासिक संबंधों को भी याद किया। ट्रंप ने करीब 158 साल पहले बोस्टन पहुंचे पहले चीनी राजनयिकों की यात्रा का उल्लेख किया।
इसके जवाब में शी जिनपिंग ने जॉर्ज वॉशिंगटन के पास मौजूद चीनी पोर्सिलेन यानी चीनी मिट्टी के बर्तनों के बड़े संग्रह का जिक्र किया। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका और चीन के बीच हुए सहयोग को भी याद किया।
इस बीच दो पांडा को अटलांटा भेजने की घोषणा ने दोनों देशों के रिश्तों में पांडा कूटनीति की पुरानी परंपरा को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।













