पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका ने शनिवार को ईरान के खिलाफ लगातार दूसरे दिन सैन्य कार्रवाई करते हुए कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। यह हमला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकट पनामा के झंडे वाले एक तेल टैंकर पर हुए ड्रोन हमले के बाद किया गया। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान ने हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेवर और कड़े करते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरान अपनी गतिविधियां नहीं रोकता, तो उसके अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो सकता है।
युद्धविराम के बाद लगातार दूसरे दिन की सैन्य कार्रवाई
दो सप्ताह पहले हुए सीजफायर समझौते के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच टकराव थमता नजर नहीं आ रहा है। शनिवार को अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर सैन्य हमला किया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास एक तेल टैंकर पर हुए ड्रोन हमले के जवाब में की गई है। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर से चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां इसी तरह जारी रहीं, तो पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
तेल टैंकर पर ड्रोन हमले के बाद बढ़ा विवाद
अमेरिकी सेना के अनुसार शनिवार सुबह करीब 4:30 बजे पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एम/टी किकु (MT Kiku) को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकट ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया। बताया गया कि यह जहाज दो मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल लेकर गुजर रहा था। अमेरिका ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया और इसे युद्धविराम समझौते का गंभीर उल्लंघन बताया।
इस घटना के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी और सैन्य प्रतिक्रिया की तैयारी शुरू कर दी, जिसके बाद ईरान के कई ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की गई।
सेंटकॉम ने बताया कार्रवाई का कारण
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यह सैन्य अभियान चलाया गया। सेंटकॉम के मुताबिक, एक दिन पहले भी ईरान समर्थित गतिविधियों के जवाब में सीमित कार्रवाई की गई थी और ईरान को युद्धविराम का पालन करने का अवसर दिया गया था।
हालांकि, अमेरिकी दावे के अनुसार इसके बावजूद ईरानी बलों ने एक और ड्रोन हमला किया। इसी वजह से अमेरिका ने दूसरी बार सैन्य कार्रवाई करने का फैसला लिया। सेंटकॉम का कहना है कि यह अभियान पूरी तरह जवाबी कार्रवाई के तहत अंजाम दिया गया।
मिसाइल ठिकानों, ड्रोन डिपो और रडार स्टेशनों को बनाया निशाना
अमेरिकी सेना ने इस अभियान के दौरान ईरान के मिसाइल भंडारण केंद्रों, ड्रोन स्टोरेज सुविधाओं और तटीय रडार स्टेशनों पर सटीक हमले किए। अमेरिका का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल हालिया हमलों में किया जा रहा था और इन्हें निष्क्रिय करना आवश्यक था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी मीडिया ने दक्षिणी ईरान के सिरिक द्वीप पर जोरदार विस्फोटों की पुष्टि की है। यह क्षेत्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बेहद नजदीक स्थित है। इसके अलावा क़ेश्म द्वीप के एक गांव पर भी अमेरिकी मिसाइल हमले की खबर सामने आई है, जहां कई धमाकों की सूचना मिली।
ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी
सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बयान जारी कर ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी वायुसेना ने युद्धविराम समझौते के बार-बार उल्लंघन के जवाब में ईरान के मिसाइल भंडार, ड्रोन ठिकानों और रडार सिस्टम को निशाना बनाया है।
ट्रंप ने आगे कहा कि यदि ईरान ने अपनी आक्रामक गतिविधियां बंद नहीं कीं, तो अमेरिका इससे भी बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।"
दो सप्ताह पहले हुआ समझौता अब संकट में
लगातार दूसरे दिन हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और ईरान पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद दो सप्ताह पहले हुआ युद्धविराम समझौता अब खतरे में दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में एक बार फिर संघर्ष की आशंका बढ़ गई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में अब पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।













