संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। न्यूयॉर्क में हुई इस बैठक में भारत ने अमेरिका के नए रूस-ईरान प्रतिबंध कानून को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। दोनों नेताओं के बीच खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
रूस से तेल खरीद को लेकर भारत की चिंता
जयशंकर ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने Sanctioning Russia and Iran Act (SRIA) को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। अमेरिका में हाल ही में लागू हुए इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े आयातकों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता खुलता है। कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
हालांकि, इस कानून का मतलब यह नहीं है कि भारत पर सीधे 100 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया गया है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार देता है। भारत सरकार ने कानून के प्रावधानों और उसके संभावित प्रभावों की समीक्षा की बात कही है।
जयशंकर ने क्या कहा?
जयशंकर ने बैठक के बाद कहा कि उन्होंने रुबियो के साथ SRIA को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। उन्होंने खाड़ी और यूक्रेन की परिस्थितियों पर भी चर्चा की।
भारत की ओर से यह भी कहा गया है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तेल की खरीद के फैसले राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा के आधार पर लिए जाएंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत अपने आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।
रुबियो ने भारत-अमेरिका रिश्तों पर क्या कहा?
बैठक के बाद रुबियो ने सोशल मीडिया पर जयशंकर के साथ मुलाकात को लेकर कहा कि दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और प्रमुख क्षेत्रीय प्राथमिकताओं तथा आगामी बहुपक्षीय प्रयासों पर समन्वय कर रहे हैं। उनके सार्वजनिक बयान में रूस प्रतिबंध कानून का अलग से उल्लेख नहीं किया गया।
खाड़ी और यूक्रेन पर भी हुई बातचीत
रूस से जुड़े प्रतिबंधों के अलावा दोनों विदेश मंत्रियों ने खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव और रूस-यूक्रेन संघर्ष दोनों अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है रूस से तेल का मुद्दा?
रूस भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में बना हुआ है। रॉयटर्स के अनुसार, अगस्त 2026 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात करीब 2.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जो जुलाई की तुलना में 16.5 प्रतिशत कम था। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में यह करीब 1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान था।
इसी बीच भारतीय रिफाइनर अक्टूबर और नवंबर की आपूर्ति के लिए स्पॉट मार्केट से भी तेल खरीद रहे हैं। यह बदलाव ऐसे समय हो रहा है जब भारत रूस से तेल खरीद को लेकर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ के प्रभावों का आकलन कर रहा है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता भी अहम
जयशंकर और रुबियो की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच पहले हुई चर्चाओं में व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषय शामिल रहे हैं।














