उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्म और जातीय समीकरण लंबे समय से चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं। ऐसे में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। शास्त्री ने अपने बयान पर सफाई देते हुए माफी मांग ली है, लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अब चर्चा इस बात की भी हो रही है कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में इस विवाद का कितना राजनीतिक असर पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। यहां यादव समुदाय को समाजवादी पार्टी का महत्वपूर्ण समर्थक वर्ग माना जाता है। श्रीकृष्ण को यादव समुदाय से जोड़कर देखे जाने के कारण धार्मिक टिप्पणी का राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ भी चर्चा में आ गया है। हालांकि, इस विवाद का चुनावी नतीजों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी।
करैरा की रामकथा में धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा था?
पूरा मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित रामकथा से जुड़ा है। 29 अक्टूबर को कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए कहा था कि श्रीराम सीधे हैं, जबकि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े होकर खड़े होते हैं।
उन्होंने श्रीकृष्ण की त्रिभंग मुद्रा, बांसुरी बजाने की शैली और वृंदावन का उल्लेख किया। इसके साथ ही अयोध्या और वृंदावन की तुलना करते हुए भी टिप्पणी की। उनके बयान में राम के सीधे स्वरूप और कृष्ण की टेढ़ी मुद्रा के बीच अंतर बताने की कोशिश की गई थी।
इस टिप्पणी का वीडियो सामने आने के बाद मथुरा-वृंदावन के संतों और कृष्ण भक्तों ने आपत्ति जताई। उनका विरोध इस बात को लेकर था कि भगवान राम और श्रीकृष्ण दोनों ही श्रद्धालुओं के आराध्य हैं और उनके बीच इस तरह तुलना करना उचित नहीं है।
विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मांगी माफी
विरोध बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वीडियो संदेश जारी कर अपनी बात स्पष्ट की और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी भक्ति परंपरा और ब्रज की प्रेमपूर्ण अभिव्यक्ति के संदर्भ में थी। उनका उद्देश्य भगवान राम और श्रीकृष्ण के बीच कोई भेद पैदा करना या किसी का अपमान करना नहीं था।
शास्त्री ने कहा कि भगवान राम और श्रीकृष्ण एक ही परम सत्ता के स्वरूप हैं। उन्होंने खुद को श्रीकृष्ण का भक्त बताते हुए कहा कि वह भागवत कथा भी करते हैं और उनकी कृष्ण भक्ति में पूरी आस्था है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी बात से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए क्षमा मांगते हैं।
अपने स्पष्टीकरण में उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बात को पूरा संदर्भ देखे बिना समझा जा रहा है। उनके मुताबिक, यह टिप्पणी एक प्रचलित पद और भक्ति परंपरा की व्याख्या के दौरान की गई थी, न कि दोनों देवताओं में अंतर बताने के उद्देश्य से।
यादव वोट बैंक क्यों है यूपी की राजनीति में अहम?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों का प्रभाव काफी पुराना है। यहां धार्मिक पहचान के साथ-साथ सामाजिक और जातीय समीकरण भी चुनावी रणनीति तय करने में भूमिका निभाते हैं। श्रीकृष्ण को यादव समुदाय के आराध्य के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि भगवान कृष्ण से जुड़ी टिप्पणी को लेकर उठे विवाद का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।
उत्तर प्रदेश सोशल जस्टिस कमेटी की 2001 की रिपोर्ट के मुताबिक, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की आबादी में यादव समुदाय की हिस्सेदारी 19.4 प्रतिशत आंकी गई थी। यह आंकड़ा उस समय के अनुमान पर आधारित है, न कि किसी हालिया जाति जनगणना पर।
समाजवादी पार्टी की राजनीति में यादव समुदाय की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव ने यादव और मुस्लिम मतदाताओं के गठजोड़ के जरिए सपा का मजबूत राजनीतिक आधार तैयार किया था। अखिलेश यादव भी इसी राजनीतिक आधार को आगे बढ़ा रहे हैं।
दूसरी ओर, भाजपा भी लंबे समय से यादव समुदाय में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी की रणनीति में कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ यादव समुदाय से आने वाले नेताओं को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाना शामिल रहा है।
चुनावी आंकड़े क्या बताते हैं, भाजपा के लिए क्यों अहम है यह विवाद?
उत्तर प्रदेश में पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के नतीजे बताते हैं कि राज्य में राजनीतिक मुकाबला लगातार चुनौतीपूर्ण होता गया है।
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 403 में से 312 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की थी। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी को केवल 47 सीटें मिली थीं। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 255 सीटों के साथ सत्ता में लौटी, जबकि समाजवादी पार्टी ने 111 सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की। सपा का वोट शेयर 2022 में लगभग 32.06 प्रतिशत रहा था।2024 के लोकसभा चुनाव में भी उत्तर प्रदेश के नतीजे भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण रहे। राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीतीं। इस तरह INDIA गठबंधन के खाते में कुल 43 सीटें गईं, जबकि भाजपा को 33 सीटें मिलीं।
इन नतीजों से साफ है कि विपक्ष ने राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की है। ऐसे में भाजपा के सामने यादव समुदाय के साथ-साथ दूसरे पिछड़े वर्गों के मतदाताओं को भी अपने साथ जोड़ने की चुनौती है। राम-कृष्ण विवाद को इसी चुनावी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। हालांकि, केवल एक कथावाचक के बयान से यादव मतदाताओं का रुख बदल जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं होगा। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि राजनीतिक दल इस मुद्दे को किस तरह उठाते हैं और मतदाता इसे कितना महत्व देते हैं।
यादव नेताओं की सक्रियता से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
इस विवाद में अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। वहीं, भाजपा पहले भी यादव समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए बड़े कार्यक्रमों का सहारा लेती रही है। मार्च 2024 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लखनऊ में आयोजित यादव महाकुंभ में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने यादव समाज को किसी एक राजनीतिक परिवार तक सीमित मानने की सोच पर सवाल उठाए थे। उन्होंने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के राजनीतिक दावों को भी चुनौती दी थी। भाजपा की ओर से मोहन यादव को यादव समुदाय के बीच एक प्रमुख चेहरे के तौर पर पेश करने की कोशिश को इसी रणनीति से जोड़कर देखा गया था। अयोध्या में राम मंदिर और मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मुद्दे भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में संवेदनशील रहे हैं। ऐसे में भगवान राम और श्रीकृष्ण को लेकर हुई टिप्पणी का राजनीतिक विमर्श में शामिल होना स्वाभाविक है।
अखिलेश यादव ने माफी को भी नहीं किया स्वीकार
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की माफी के बावजूद अखिलेश यादव ने इस मामले में अपना विरोध जारी रखा। 2 नवंबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए इसे सनातन समाज की एकता को तोड़ने की कोशिश बताया था। उन्होंने मामले की गहराई से जांच कराने की मांग भी उठाई।
इसके बाद 3 नवंबर को अखिलेश यादव ने धीरेंद्र शास्त्री का एक दूसरा वीडियो साझा किया। इस वीडियो में कथावाचक भगवान राम के पिता को लेकर टिप्पणी करते सुनाई दे रहे हैं। अखिलेश ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले भगवान श्रीकृष्ण को लेकर विवादित वीडियो सामने आया और अब भगवान राम के पिता के बारे में अभद्रता की बात प्रसारित हो रही है। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के सभी कार्यक्रम रद्द करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में कार्रवाई की मांग की। अखिलेश यादव ने एक अन्य प्रतिक्रिया में इस टिप्पणी को ईशनिंदा बताते हुए कहा कि मानवीय भूल के लिए माफी दी जा सकती है, लेकिन ईशनिंदा के लिए नहीं। उन्होंने कथावाचक पर आजीवन प्रतिबंध लगाने और उनके कार्यक्रमों को अनुमति नहीं देने की मांग भी की।
तेजस्वी यादव ने भाजपा पर उठाए सवाल
राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। 2 नवंबर को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी को अशोभनीय, अक्षम्य और अमर्यादित बताया। तेजस्वी ने लिखा कि राम और कृष्ण एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पहले इंसानों को बांटते थे और अब भगवान को बांटने लगे हैं। उन्होंने भाजपा नेताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में सामने आकर माफी मांगने की मांग की। तेजस्वी ने अपनी पोस्ट में धीरेंद्र शास्त्री का नाम सीधे तौर पर नहीं लिखा था, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया इसी विवाद के संदर्भ में आई थी।
भाजपा ने भी किया पलटवार
विपक्षी नेताओं की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बाद भाजपा की तरफ से भी जवाब दिया गया। भाजपा प्रवक्ता नवीन श्रीवास्तव ने अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव की प्रतिक्रियाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की याद आने लगी है। उन्होंने अखिलेश यादव के राम मंदिर को लेकर पुराने राजनीतिक रुख का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि क्या वह मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि जाएंगे और क्या कृष्ण जन्मभूमि मंदिर आंदोलन का समर्थन करते हैं। इस तरह भाजपा ने विवाद के जवाब में विपक्ष के धार्मिक और राजनीतिक रुख को ही मुद्दा बनाने की कोशिश की।
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला भी चर्चा में
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या राम मंदिर से जुड़े मुद्दे भी लगातार चर्चा में रहे हैं। इसी बीच मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित हेरफेर का मामला भी सामने आया है। 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की स्वतंत्र जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में विशेष जांच दल (SIT) आरोपपत्र दाखिल कर चुका है, इसलिए अब आरोपियों के खिलाफ स्थानीय अदालत में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट का संज्ञान लिया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि SIT की जांच में चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कथित हेरफेर का पता चला है। उनके मुताबिक, जांच में सामने आया कि कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर चोरी की रकम से संपत्तियां खरीदीं, जबकि कुछ ने इसे बैंक खातों में जमा कराया। उन्होंने यह भी बताया कि जांचकर्ताओं ने बैंक लेन-देन का पता लगाया है और संपत्ति की खरीद से जुड़े दस्तावेजों में घोषित कीमत तथा वास्तविक कीमत के बीच अंतर मिला है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाओं का निपटारा करते समय उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को स्थानीय न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष मामले की सुनवाई में सहायता करने की अनुमति दी है। अदालत ने निर्देश दिया कि आगे की कार्रवाई कानून के मुताबिक की जाए। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह सहित कई याचिकाकर्ताओं ने पहले सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की थी।
कुल मिलाकर, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक भावनाओं, यादव समुदाय के राजनीतिक समीकरण और भाजपा-सपा के बीच चुनावी आरोप-प्रत्यारोप से जुड़ गया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजनीतिक दल इस मुद्दे को कितना आगे बढ़ाते हैं और इसका मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है।
FAQs :
Q1. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण को लेकर क्या बयान दिया था?
उन्होंने करैरा की रामकथा में भगवान राम को सीधा और श्रीकृष्ण को तीन जगह से टेढ़ा होकर खड़े होने वाला बताया था। उन्होंने अयोध्या और वृंदावन की तुलना भी की थी।
Q2. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने बयान पर माफी क्यों मांगी?
उनकी टिप्पणी पर मथुरा-वृंदावन के संतों और कृष्ण भक्तों ने आपत्ति जताई थी। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य भगवान राम और श्रीकृष्ण में भेद करना नहीं था।
Q3. अखिलेश यादव ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ क्या मांग की है?
अखिलेश यादव ने उनके सभी कार्यक्रम रद्द करने, नए कार्यक्रमों की अनुमति नहीं देने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने उनकी टिप्पणी को ईशनिंदा भी बताया।
Q4. उत्तर प्रदेश में यादव समुदाय का राजनीतिक महत्व कितना है?
यादव समुदाय राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2001 की उत्तर प्रदेश सोशल जस्टिस कमेटी के अनुमान के अनुसार, OBC आबादी में यादव समुदाय की हिस्सेदारी 19.4 प्रतिशत थी।
Q5. 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा और भाजपा को कितनी सीटें मिली थीं?
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 255 सीटें जीती थीं, जबकि समाजवादी पार्टी को 111 सीटें मिली थीं। सपा का वोट शेयर लगभग 32.06 प्रतिशत था।













