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बंगाल SIR पर बवाल: 91% नाम फिर जुड़े, कांग्रेस ने उठाए वोट कटने पर सवाल

पश्चिम बंगाल SIR पर RTI के बाद विवाद बढ़ा। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 82,782 अपीलों में 91% नाम मतदाता सूची में बहाल किए गए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 27 Aug 2026 11:34:51

बंगाल SIR पर बवाल: 91% नाम फिर जुड़े, कांग्रेस ने उठाए वोट कटने पर सवाल

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है। चुनाव आयोग की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक निपटाई गई 82,782 अपीलों में से 75,443 मामलों में मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में बहाल किए गए हैं। यह कुल निपटाए गए मामलों का करीब 91 प्रतिशत है। वहीं, 7,339 दावे खारिज किए गए हैं।

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए और बाद में अपील के जरिए उन्हें फिर से सूची में शामिल किया गया।

SIR के दौरान कितने नाम हटे?

RTI से मिले जवाब का हवाला देते हुए कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान 27,28,500 लोगों को अयोग्य घोषित किया गया था। इसके बाद कुल 38,10,620 अपीलें दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई। कांग्रेस सांसद ने इन आंकड़ों के बीच करीब 10,82,120 अपीलों के अंतर पर सवाल उठाया है।

चौधरी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अतिरिक्त अपीलें उन मतदाताओं के नाम हटाने के लिए दाखिल की गईं, जिन्होंने इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में मतदान किया था।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप

कांग्रेस ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में SIR के जरिए मतदाताओं के नाम हटाए गए और बाद में उनमें से बड़ी संख्या में नाम फिर से वोटर लिस्ट में शामिल किए गए।

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से भी इस मुद्दे को उठाया और इसे 'वोट चोरी' से जोड़ते हुए चुनाव आयोग तथा प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं।

ईशा खान चौधरी ने जताई चिंता

कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने कहा कि निपटाए गए मामलों में करीब 91 प्रतिशत नामों का दोबारा जुड़ना इस बात की ओर इशारा करता है कि शुरुआत में वास्तविक और योग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए थे।

उन्होंने दावा किया कि इससे प्रभावित नागरिकों के बीच डर और अनिश्चितता की स्थिति बनी और उन्हें सरकारी योजनाओं तथा रोजगार से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला

SIR प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले कांग्रेस नेता प्रसेनजित बोस ने भी आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, हटाए गए करीब 27 लाख मतदाताओं में से केवल लगभग 7 लाख लोग ही स्वयं अपील कर सके।

बोस का दावा है कि बाकी अपीलें चुनाव आयोग या अन्य लोगों की ओर से सामूहिक रूप से दाखिल की गईं। उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरणों का उद्देश्य वास्तविक रूप से हटाए गए मतदाताओं को वापस सूची में शामिल करना था।

कांग्रेस ने आगामी कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनावों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से इन अपीलों के निपटारे के लिए समय सीमा तय करने का अनुरोध किया है।

अलग-अलग जिलों में क्या स्थिति रही?

उपलब्ध आंकड़ों में जिलों के बीच भी अंतर दिखाई देता है। मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा 7,47,305 अपीलें दर्ज की गईं। वहां अब तक निपटाए गए मामलों में 434 नाम बहाल किए गए, जबकि 53 दावे खारिज हुए।

मालदा में 5,31,149 अपीलों में से निपटाए गए 1,471 मामलों में सभी नाम बहाल किए गए। उत्तर 24 परगना में 3,58,872 अपीलों में से निपटाए गए 277 मामलों में सभी नाम मतदाता सूची में वापस जोड़े गए।

दक्षिण 24 परगना में 3,21,332 अपीलें दर्ज हुईं। इनमें 20,107 नाम बहाल किए गए और 24 दावे खारिज हुए। हुगली में 19,528 मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल किए गए।

दार्जिलिंग में 50,712 अपीलों में से निपटाए गए मामलों में 159 नाम बहाल हुए और सिर्फ एक दावा खारिज किया गया।

91 प्रतिशत बहाली के आंकड़े ने बढ़ाई राजनीतिक बहस

चुनाव आयोग के आंकड़ों में 82,782 निपटाए गए मामलों में से 75,443 नामों की बहाली का आंकड़ा सामने आने के बाद SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस इसे मतदाता सूची से नाम हटाने और बाद में बहाल किए जाने के मुद्दे के रूप में उठा रही है। वहीं, उपलब्ध सामग्री में चुनाव आयोग की ओर से इन कांग्रेस आरोपों पर कोई अलग प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।

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