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केदारनाथ में फर्जी साधुओं पर शिकंजा, ‘ऑपरेशन कालनेमि’ से होगी पहचान; धाम की गरिमा बचाने की पहल तेज

केदारनाथ धाम में फर्जी साधुओं की पहचान के लिए प्रशासन ने ‘ऑपरेशन कालनेमि’ शुरू किया है। साथ ही भिक्षावृत्ति पर नियंत्रण और कचरा प्रबंधन को लेकर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि धाम की पवित्रता और व्यवस्था बनी रहे।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 28 Apr 2026 7:53:33

केदारनाथ में फर्जी साधुओं पर शिकंजा, ‘ऑपरेशन कालनेमि’ से होगी पहचान; धाम की गरिमा बचाने की पहल तेज

केदारनाथ धाम की पवित्रता और अनुशासन को बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने सोमवार को पुलिस को विशेष अभियान “ऑपरेशन कालनेमि” चलाने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत साधु-संतों का वेश धारण कर धाम में आने वाले संदिग्ध लोगों की पहचान की जाएगी। इसके साथ ही मंदिर परिसर के सामने बैठने वाले साधुओं को निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित करने का फैसला भी लिया गया है, ताकि व्यवस्था बेहतर बनी रहे।

जिलाधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में धाम की व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया गया है और जहां-जहां कमियां मिलीं, उन्हें सुधारने की दिशा में काम किया गया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि वास्तविक साधु-संतों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें उचित सम्मान के साथ सुविधाएं मिलें। इसी क्रम में पुलिस को लिखित आदेश जारी कर दिए गए हैं कि जो लोग साधु का रूप धारण कर अनुचित गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, उनकी पहचान कर कार्रवाई की जाए।

भिक्षावृत्ति पर नियंत्रण, साधुओं के लिए तय किए गए स्थान

प्रशासन ने यह भी देखा कि मंदिर के ठीक सामने कई लोग साधु के वेश में बैठकर भिक्षावृत्ति कर रहे हैं, जो धाम की गरिमा के अनुकूल नहीं है। इसी वजह से उन्हें वहां से हटाकर अन्य निर्धारित स्थानों पर बैठने के निर्देश दिए गए हैं। इससे श्रद्धालुओं के बीच बेहतर संदेश जाएगा और धार्मिक स्थल की मर्यादा बनी रहेगी।

केदारनाथ में तैनात इंस्पेक्टर कुलदीप पंत के अनुसार, साधुओं को भीम शिला के पास तय स्थान पर बैठाया गया है और पुलिस लगातार संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर बनाए हुए है। अभियान के तहत ऐसे लोगों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

चारधाम यात्रा के साथ बढ़ती कचरे की समस्या

चारधाम यात्रा के आरंभ होते ही एक और बड़ी चुनौती सामने आ रही है—कचरा प्रबंधन। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ कूड़े का बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है, जो हिमालयी पर्यावरण के लिए चिंता का विषय बन गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल यात्रा के शुरुआती दिनों में ही कचरे की मात्रा पिछले वर्षों के मुकाबले काफी अधिक देखी गई है। वर्तमान में चारों धामों को मिलाकर प्रतिदिन लगभग 350 कुंतल कचरा निकल रहा है।

अगर अलग-अलग धामों की बात करें तो बदरीनाथ में रोजाना करीब 1700 किलो कचरा एकत्र किया जा रहा है। नगर पंचायत बदरीनाथ अब तक लगभग साढ़े तीन टन कचरा इकट्ठा कर चुकी है, जिसमें प्लास्टिक का हिस्सा सबसे ज्यादा है। यहां सफाई के लिए 79 पर्यावरण मित्र तैनात हैं।

केदारनाथ में प्रतिदिन करीब 350 किलो कचरा निकल रहा है, जिसमें 150 किलो धाम परिसर से और 200 किलो पैदल मार्ग से एकत्र होता है। यहां सुलभ इंटरनेशनल के 200 और नगर पंचायत के 55 सफाईकर्मी लगातार काम कर रहे हैं। गंगोत्री में अब तक 5.50 टन कचरा जमा हो चुका है, जबकि यमुनोत्री में यात्रा शुरू होने के बाद करीब 10 टन कचरा एकत्र किया गया है।

पर्यावरण पर बढ़ता दबाव और नियमों की अनदेखी

बढ़ते कचरे के बीच एक बड़ा सवाल कॉर्पोरेट जिम्मेदारी को लेकर भी उठ रहा है। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के अनुसार, प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को उसके निस्तारण की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल का कहना है कि यात्रा मार्गों पर बिखरे प्लास्टिक रेनकोट, स्नैक्स के पैकेट और पानी की बोतलें केवल गंदगी ही नहीं फैलाते, बल्कि आने वाले समय के लिए गंभीर खतरे का संकेत हैं।

प्रशासन के दावे बनाम जमीनी हकीकत

सरकारी स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि कचरा प्रबंधन पहले की तुलना में ज्यादा व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है। बदरीनाथ में कंपैक्टर प्लांट, कंपोस्ट पिट और ऑर्गेनिक वेस्ट कनवर्टर जैसी सुविधाएं सक्रिय हैं। केदारनाथ में भी आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी ऊंचाई (करीब 11 से 12 हजार फीट) पर बड़े पैमाने पर कचरे का पूरी तरह निस्तारण करना आसान नहीं है। प्रशासन का दावा है कि केदारनाथ में लगभग 80% कचरे का निपटान हो रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।

कुल मिलाकर, एक ओर जहां धाम की पवित्रता बनाए रखने के लिए “ऑपरेशन कालनेमि” जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ता कचरा प्रशासन और पर्यावरण दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है।

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