उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने दीपावली से पहले राज्य के लाखों कर्मचारियों को बोनस का तोहफा दिया है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 30 दिन का तदर्थ बोनस देने का शासनादेश जारी कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के करीब 14.82 लाख अराजपत्रित कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। पात्र नियमित कर्मचारियों को अधिकतम 6,908 रुपये बोनस मिलेगा। वहीं, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए अधिकतम 1,184 रुपये की राशि निर्धारित की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद वित्त विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार (तृतीय) ने गुरुवार, 5 नवंबर को संबंधित विभागों के लिए शासनादेश जारी किया। आदेश में बोनस की पात्रता, गणना और भुगतान का तरीका स्पष्ट किया गया है। इसके तहत बोनस की 75 प्रतिशत राशि कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) खाते में जमा होगी, जबकि बाकी 25 प्रतिशत रकम नकद दी जाएगी।
किन कर्मचारियों को मिलेगा 30 दिन के बोनस का लाभ?
शासनादेश के मुताबिक, पूर्णकालिक अराजपत्रित राज्य कर्मचारी इस बोनस के पात्र होंगे। इसके अलावा सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, सहायता प्राप्त प्राविधिक शिक्षण संस्थानों, स्थानीय निकायों, जिला पंचायतों और राजकीय विभागों में कार्यरत कार्यभारित कर्मचारियों को भी इस योजना के दायरे में रखा गया है। बोनस का लाभ वेतन मैट्रिक्स के लेवल-8 तक के पदों पर काम करने वाले पात्र अराजपत्रित कर्मचारियों को मिलेगा। पुराने वेतनमान के हिसाब से यह सीमा 4,800 रुपये तक के ग्रेड-पे वाले पदों के बराबर है। कर्मचारियों के बोनस की गणना के लिए मासिक परिलब्धियों की अधिकतम सीमा 7,000 रुपये तय की गई है। इस योजना का लाभ लेने के लिए कर्मचारी को 31 मार्च 2026 तक कम से कम एक साल की लगातार सेवा पूरी करनी जरूरी है। यानी केवल पद पर कार्यरत होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निर्धारित सेवा अवधि की शर्त भी पूरी करनी होगी।
नियमित कर्मचारियों को अधिकतम 6,908 रुपये मिलेंगे
योगी सरकार ने 30 दिन के तदर्थ बोनस के लिए अधिकतम मासिक परिलब्धि 7,000 रुपये निर्धारित की है। इसी आधार पर गणना करने पर पात्र नियमित कर्मचारियों को अधिकतम 6,908 रुपये मिलेंगे। यह राशि हर कर्मचारी के लिए एक जैसी नहीं होगी। वास्तविक भुगतान संबंधित कर्मचारी की पात्रता और निर्धारित गणना के आधार पर किया जाएगा। बोनस के लिए 2025-26 वित्तीय वर्ष को आधार बनाया गया है। जिन कर्मचारियों ने 31 मार्च 2026 तक कम से कम एक वर्ष की निरंतर सेवा पूरी की है, वे निर्धारित शर्तों के अनुसार इसका लाभ ले सकेंगे।
हालांकि, कुछ कर्मचारियों को इस बोनस से बाहर रखा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मुकदमे में दंडित कर्मचारियों को बोनस नहीं दिया जाएगा। जिन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई या आपराधिक मामला लंबित है, उनकी बोनस राशि का भुगतान फिलहाल रोक दिया जाएगा। ऐसे मामलों में कर्मचारी के दोषमुक्त होने के बाद ही रुकी हुई राशि देने का प्रावधान है।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी मिलेगा बोनस
सरकार ने तदर्थ बोनस के दायरे में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी शामिल किया है। हालांकि, इस श्रेणी के कर्मचारियों के लिए सेवा और काम के दिनों से जुड़ी अलग शर्तें रखी गई हैं। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को 31 मार्च 2026 तक लगातार तीन साल की सेवा पूरी करनी होगी। इसके साथ ही छह दिवसीय कार्य सप्ताह वाले कार्यालयों में हर साल कम से कम 240 दिन काम करना जरूरी है। वहीं, पांच दिवसीय कार्य सप्ताह वाले कार्यालयों में प्रति वर्ष कम से कम 206 दिन काम करने की शर्त रखी गई है। दैनिक वेतनभोगियों के बोनस की गणना के लिए अधिकतम मासिक परिलब्धि 1,200 रुपये तय की गई है। इस आधार पर पात्र कर्मचारियों को 30 दिन के बोनस के रूप में अधिकतम 1,184 रुपये मिल सकेंगे। इस तरह सरकार ने नियमित कर्मचारियों के साथ दैनिक वेतनभोगियों को भी त्योहार से पहले आर्थिक लाभ देने का फैसला किया है।
बोनस की 75 प्रतिशत रकम PF खाते में होगी जमा
शासनादेश में बोनस के भुगतान का तरीका भी तय किया गया है। पात्र कर्मचारियों को मिलने वाली कुल राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा उनके भविष्य निधि यानी PF खाते में जमा किया जाएगा। बाकी 25 प्रतिशत रकम नकद दी जाएगी। जिन कर्मचारियों का सामान्य भविष्य निधि (GPF) खाता नहीं है, उनके हिस्से की बचत राशि राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) या लोक भविष्य निधि (PPF) में जमा कराई जाएगी। इस व्यवस्था के तहत बोनस का बड़ा हिस्सा बचत के रूप में सुरक्षित रहेगा, जबकि एक चौथाई रकम कर्मचारियों को नकद मिलेगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी पात्र कर्मचारी को अधिकतम 6,908 रुपये बोनस मिलता है, तो उसका 75 प्रतिशत हिस्सा PF में जमा होगा और शेष 25 प्रतिशत नकद भुगतान के रूप में दिया जाएगा।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पूरी राशि नकद मिलेगी
सरकार ने सेवानिवृत्त हो चुके और जल्द सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था की है। 31 मार्च 2026 के बाद सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को बोनस की पूरी राशि नकद दी जाएगी। इसी तरह 30 अप्रैल 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को भी पूरी बोनस राशि नकद मिलेगी। इन कर्मचारियों के मामले में 75 प्रतिशत रकम PF खाते में जमा करने का नियम लागू नहीं होगा। उन्हें पात्रता के अनुसार मिलने वाला पूरा बोनस नकद दिया जाएगा। इस फैसले से राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, स्थानीय निकायों, जिला पंचायतों और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। शासनादेश में बोनस की अधिकतम राशि, पात्रता की शर्तें और भुगतान का तरीका स्पष्ट कर दिया गया है।














