अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के गबन के मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस प्रकरण में अयोध्या थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। प्रारंभिक जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिन पर कथित तौर पर चढ़ावे की राशि में हेराफेरी करने और इस पूरे घटनाक्रम में सहयोग देने का आरोप है। अब तक इस मामले में कुल 8 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 6 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज की जांच में कुछ कर्मचारी कथित रूप से नकदी के साथ अनियमितता करते हुए दिखाई दिए हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर ट्रस्ट ने कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। बताया जा रहा है कि नामजद आरोपियों में टिन्नू यादव समेत छह कैशियर भी शामिल हैं। वहीं हिरासत में लिए गए लोगों में लवकुश मिश्र, अनुकल्प मिश्र और नकदी गिनने वाले चार अन्य कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं।
किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य श्री कृष्ण मोहन द्वारा दी गई लिखित शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश और एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में की गई संस्तुति के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने इस प्रकरण में बीएनएस की धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) को शामिल किया है।
बीएनएस की धारा 316(5): यदि कोई लोक सेवक, बैंककर्मी, व्यापारी, एजेंट, दलाल या वकील अपने पद अथवा पेशे का दुरुपयोग करते हुए किसी संपत्ति या धन के संबंध में विश्वासघात करता है, तो उसके खिलाफ अधिकतम 10 वर्ष की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
बीएनएस की धारा 317(4): यह धारा चोरी के सामान की आदतन खरीद-फरोख्त या उसके व्यापार से जुड़ी है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर बार-बार चोरी के माल का लेनदेन करता है, तो इसे गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना जाता है।
बीएनएस की धारा 317(5): इस प्रावधान के तहत यदि कोई व्यक्ति चोरी की गई संपत्ति को जानबूझकर छिपाने, सुरक्षित रखने, ठिकाने लगाने या एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में सहायता करता है, तो उसे तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
बीएनएस की धारा 61: यह धारा आपराधिक षड्यंत्र (Criminal Conspiracy) से संबंधित है और पहले लागू भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B के समान मानी जाती है।
बीएनएस की धारा 3(5): यह धारा पूर्व आईपीसी की धारा 34 के अनुरूप 'साझा आपराधिक आशय' (Common Intention) को परिभाषित करती है। यदि कई लोग मिलकर एक ही आपराधिक मंशा के साथ अपराध को अंजाम देते हैं, तो प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।
एफआईआर में किन लोगों के नाम शामिल?
राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में की गई सिफारिशों और मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद ट्रस्ट ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, कुल 8 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। एफआईआर में जिन नामों की पुष्टि हुई है, उनमें रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमा शंकर मिश्र और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, पैसा गिनने वाली टीम के प्रभारी के रूप में सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इनके अलावा नकदी की गणना करने वाले छह कर्मचारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में ये कर्मचारी कथित तौर पर धन के गबन की गतिविधियों में शामिल दिखाई दे रहे हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि टिन्नू यादव का भतीजा मनीष यादव भी नकदी गिनने की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था और उसका नाम भी एफआईआर में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त अनुकल्प मिश्र को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि एफआईआर के आधार पर विस्तृत जांच आगे बढ़ाई जाएगी और विवेचना के दौरान जिन अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके नाम भी मामले में जोड़े जाएंगे तथा उनके विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।













