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राम मंदिर निर्माण लागत 800 से 2200 करोड़ पहुंचने पर उठे सवाल, पूर्व लेखा प्रभारी का चंपत राय के खिलाफ SIT को लेटर

राम मंदिर निर्माण लागत 800 करोड़ से बढ़कर 2200 करोड़ रुपये होने पर पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने चंपत राय समेत कई लोगों पर आरोप लगाते हुए एसआईटी को शिकायत और दस्तावेज सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 04 Aug 2026 8:42:28

राम मंदिर निर्माण लागत 800 से 2200 करोड़ पहुंचने पर उठे सवाल, पूर्व लेखा प्रभारी का चंपत राय के खिलाफ SIT  को लेटर

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक मामलों को लेकर विशेष जांच दल (SIT) के समक्ष विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मंदिर निर्माण की अनुमानित लागत 800 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 2200 करोड़ रुपये होने पर सवाल उठाते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने पूर्व महासचिव चंपत राय समेत कुछ अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज और लिखित जानकारी एसआईटी को सौंप दी है।

एसआईटी ने मांगे थे लिखित साक्ष्य

महिपाल सिंह ने बताया कि उनके पहले लगाए गए आरोपों के बाद एसआईटी ने उनसे लिखित रूप में साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा था। 26 जुलाई को लखनऊ मंडल के आयुक्त और एसआईटी के प्रमुख विजय विश्वास पंत की ओर से उन्हें ई-मेल भेजकर आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और विस्तृत शिकायत प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।

इसके बाद उन्होंने करीब 20 बिंदुओं पर विस्तृत शिकायत तैयार कर एसआईटी को भेजी। शिकायत में उन्होंने पूर्व महासचिव चंपत राय, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, कुछ बैंक कर्मचारियों तथा अन्य संबंधित लोगों के नाम भी शामिल किए हैं। उन्होंने एसआईटी से अनुरोध किया है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

पहले भी उठ चुके हैं आरोप

गौरतलब है कि इससे पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी राम मंदिर परिसर के लिए जमीन खरीद में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए एसआईटी को दस्तावेज सौंप चुके हैं। उस शिकायत में भी चंपत राय के खिलाफ कई आरोप लगाए गए थे। अब महिपाल सिंह की शिकायत के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

निर्माण लागत में बढ़ोतरी पर उठाए सवाल

महिपाल सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है कि शुरुआत में राम मंदिर निर्माण की अनुमानित लागत करीब 800 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन समय के साथ यह बढ़कर लगभग 2200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर का स्वरूप, डिजाइन और निर्माण योजना पहले से तय थी, तो लागत में इतनी बड़ी वृद्धि किन कारणों से हुई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान कई ऐसे स्थायी कार्य कराए गए, जिनकी तत्काल आवश्यकता नहीं थी और जिन्हें अस्थायी व्यवस्था के माध्यम से भी पूरा किया जा सकता था। उनके अनुसार इन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जिसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

कम खर्च दिखाकर अधिक भुगतान का आरोप

पूर्व लेखा प्रभारी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी थीं और वे मंदिर परिसर में प्रभावी भूमिका निभा रहे थे। शिकायत के अनुसार कई मामलों में वास्तविक खर्च कम था, लेकिन रिकॉर्ड में अधिक राशि दर्शाकर भुगतान किया जाता था। उन्होंने दावा किया कि इन भुगतानों का पर्याप्त सत्यापन भी नहीं किया जाता था।

चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर भी लगाए आरोप

महिपाल सिंह ने अपनी शिकायत में चढ़ावे की राशि के प्रबंधन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से तय संख्या से अधिक नकदी की गड्डियां परिसर से बाहर भेजी जाती थीं। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में उन्होंने कई बार चंपत राय को शिकायत दी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाद में अनिल मिश्रा ने उन्हें इस जिम्मेदारी से हटाकर किसी अन्य व्यक्ति को यह दायित्व सौंप दिया। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जानकारी एसआईटी को देने का फैसला किया।

विवादित संपत्तियों की खरीद का भी लगाया आरोप

महिपाल सिंह का आरोप है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से मंदिर के आसपास कुछ ऐसी संपत्तियां खरीदी गईं, जो विवादित थीं और जिनसे जुड़े मामले अदालतों में लंबित हैं। उनके अनुसार इन खरीद-फरोख्त से ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने इन सभी मामलों की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

चांदी के झूले और चढ़ावे को लेकर भी सवाल

अपनी शिकायत में उन्होंने यह भी दावा किया कि 150 किलोग्राम चांदी का झूला बनवाने का आदेश दिया गया था, लेकिन निर्माण में केवल 85 किलोग्राम चांदी का उपयोग किया गया। उन्होंने इस मामले में भी संभावित अनियमितता की आशंका जताई है।

इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि चंपत राय के निवास 'भारत कुटी' में बिना रसीद के चढ़ावा लिया जाता था। वहीं कारसेवकपुरम स्थित विश्व हिंदू परिषद कार्यालय में आयोजित कुछ कार्यक्रमों का खर्च भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के धन से वहन किए जाने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने इन मामलों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सीसीटीवी फुटेज और निर्माण गुणवत्ता पर भी उठाए सवाल


महिपाल सिंह ने दावा किया कि मंदिर परिसर के कुछ सीसीटीवी फुटेज हटाए गए थे, जिन्हें बाद में रिकवर किया गया और उनमें कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि मंदिर निर्माण में तकनीकी और वास्तु संबंधी कमियां हैं तथा निर्माण कार्य अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं हुआ।

उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा है कि उनके द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह सत्य है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई घटनाएं पुरानी होने के कारण सभी आरोपों के प्रत्यक्ष दस्तावेज या साक्ष्य अब उनके पास उपलब्ध नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि राम मंदिर में चढ़ावे और कथित अनियमितताओं को लेकर सबसे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को सवाल उठाए थे। इसके बाद 9 जून को महिपाल सिंह ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से कई आरोप सार्वजनिक किए। बाद में एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत की ओर से उन्हें ई-मेल भेजकर विस्तृत शिकायत और उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया, जिसके बाद उन्होंने लिखित रूप में अपना पक्ष जांच एजेंसी के समक्ष रखा।

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