
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार की "वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट" (ODOP) योजना को घेरते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी टैरिफ़ नीति ने उत्तर प्रदेश के कारोबारियों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है, लेकिन सरकार इस पर बिल्कुल चुप है।
अखिलेश यादव का आरोप है कि यूपी के पारंपरिक उद्योग, जिनमें भदोही का कालीन उद्योग और मुरादाबाद का पीतल उद्योग प्रमुख हैं, इन सबका कारोबार टैरिफ़ बढ़ोतरी के कारण गहरे संकट से जूझ रहा है। कभी अमेरिका तक बड़े पैमाने पर निर्यात होने वाले इन उत्पादों की खपत अब प्रभावित हो चुकी है। उन्होंने सवाल किया कि जब व्यापारियों की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, तब सरकार उनकी सुध क्यों नहीं ले रही?
छोटे व्यापारियों के संकट पर सवाल
सपा अध्यक्ष ने कहा कि जिस "वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट" स्कीम को यूपी सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार बताया था और जिस पर करोड़ों का विज्ञापन किया गया था, उसी योजना की साख अब कसौटी पर है। दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में इस योजना के प्रचार में प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाकर बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए जाते थे। लेकिन आज वही व्यापारी असली संकट से जूझ रहे हैं और सरकार उनके साथ खड़ी नज़र नहीं आ रही।
अखिलेश ने कहा कि सवाल यह है कि भदोही, मुरादाबाद या कानपुर जैसे औद्योगिक केंद्रों को इस समय कौन सहारा देगा? अमेरिका के टैरिफ ने जिस तरह कारोबार की कमर तोड़ दी है, उससे निपटने के लिए सरकार की क्या रणनीति है, यह साफ नहीं है।
SIR पर भी केंद्र को घेरा
इस मौके पर अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर भी तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे केंद्र सरकार इस पर चर्चा करने से पहले ग्रह-नक्षत्र की स्थिति देख रही है।
उनका व्यंग्यात्मक बयान था— "एस्ट्रोलॉजी और एस्ट्रोनॉमी अलग-अलग विषय हैं, लेकिन सरकार शायद ज्योतिषीय गणना देखकर तय करेगी कि संसद में SIR पर बहस कब कराई जाए।" अखिलेश ने यह भी कहा कि संभव है सरकार वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा कर रही हो ताकि बहस के लिए 'सही समय' तय किया जा सके।














