
शेखावटी अंचल में ठंड के साथ-साथ प्रदूषण का असर अब केवल आम लोगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मंदिरों में होने वाले भगवान के श्रृंगार और सेवा-पूजन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सीकर सहित पूरे इलाके में कड़ाके की सर्दी पड़ने से भक्तों और पुजारियों ने अपने आराध्य देवों की देखभाल के लिए खास इंतजाम शुरू कर दिए हैं। मंदिरों में भगवान की प्रतिमाओं को ठंड से बचाने के लिए ऊनी वस्त्र पहनाए जा रहे हैं और गर्म तासीर वाले भोग अर्पित किए जा रहे हैं।
सीकर शहर के प्राचीन श्री कल्याण धाम और राधा दामोदर मंदिर समेत कई ठाकुरजी के मंदिरों में भगवान को स्वेटर पहनाए गए हैं। कहीं शॉल ओढ़ाई जा रही है तो कहीं रजाई से ढककर प्रतिमाओं को सर्द हवा से सुरक्षित किया जा रहा है। ठंड के इस मौसम में मंदिरों का माहौल भी बदल गया है, जहां सुबह-शाम की आरती के साथ भगवान के आराम और तापमान का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
भगवान के लिए हीटर तक की व्यवस्था
सर्दी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए कई मंदिरों में भगवान के लिए हीटर भी लगाए गए हैं, ताकि गर्भगृह में ठंड का असर कम रहे। पूजा-पाठ के साथ-साथ भोग में भी बदलाव किया गया है। इन दिनों गुड़, तिल के लड्डू, बाजरे की खिचड़ी, गजक, रेवड़ी और केसर मिला गर्म दूध भगवान को अर्पित किया जा रहा है। इसके अलावा बढ़ते प्रदूषण से बचाने के लिए भगवान की प्रतिमाओं पर मास्क भी लगाए जा रहे हैं, जो एक नई और अनोखी तस्वीर पेश कर रहे हैं।
दरअसल, शेखावटी क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। भिवाड़ी में एयर क्वालिटी इंडेक्स 294 तक पहुंच चुका है, अलवर में 231, चूरू में 284, दौसा में 233 और श्रीगंगानगर में 271 दर्ज किया गया है। वहीं कोटा में AQI 180, सीकर में 196, टोंक में 186, उदयपुर में 157, आबू में 158 और अजमेर में 143 रिकॉर्ड हुआ है। इसी वजह से भक्त भगवान को भी प्रदूषण से बचाने का भाव व्यक्त कर रहे हैं।
आस्था के साथ जुड़ी परंपरा
श्रद्धालुओं का मानना है कि जैसे इंसान सर्दी और प्रदूषण से प्रभावित होता है, वैसे ही भगवान की प्रतिमाओं को भी मौसम का असर महसूस होता है। इसी भावना के साथ भक्त सर्दियों में भगवान के श्रृंगार और भोग में विशेष सावधानी बरतते हैं। यह परंपरा न सिर्फ धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि भक्त और भगवान के बीच गहरे भावनात्मक संबंध को भी उजागर करती है।
पुजारियों ने बताई व्यवस्था की वजह
सीकर के प्राचीन राधा दामोदर मंदिर के पुजारी नंदकिशोर शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में ठंड बढ़ते ही भगवान की प्रतिमाओं को ऊनी कपड़े पहनाए जाते हैं। सर्दी के मौसम में गजक, रेवड़ी और केसरयुक्त गर्म दूध का भोग लगाया जाता है, ताकि भगवान को भी गर्माहट मिल सके।
वहीं प्राचीन श्री कल्याण जी मंदिर के पुजारी बनवारी लाल ने बताया कि जैसे ही कड़ाके की ठंड शुरू होती है, भगवान के लिए खास इंतजाम किए जाते हैं। दूध और गर्म चीजों का भोग चढ़ाने के साथ-साथ प्रतिमाओं को शॉल और रजाई ओढ़ाई जाती है। कई मंदिरों में हीटर भी लगाए गए हैं, ताकि भगवान को भी इंसानों की तरह सर्दी से राहत मिल सके।














