
राजस्थान के बूंदी ज़िले में इंसानियत और कर्तव्य भावना का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला। रोडवेज चालक रमेश बैरागी ने अपनी खराब तबीयत और तीव्र दर्द के बावजूद अपने दायित्व को आखिरी सांस तक निभाया। उदयपुर से लौटते वक्त रास्ते में उन्हें हार्ट अटैक आया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बस में बैठे 50 से ज़्यादा यात्रियों को सुरक्षित बूंदी बस स्टैंड तक पहुंचाने के बाद ही उनकी मृत्यु हो गई।
रास्ते में अचानक सीने में उठा दर्द
जानकारी के अनुसार, रमेश बैरागी उदयपुर से बूंदी की ओर बस चला रहे थे। बिजोलिया के पास अचानक उनके सीने में तेज़ दर्द उठा। उन्होंने तुरंत डिपो को फोन कर अपनी स्थिति बताई, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने बस रोकने की बजाय धीरे-धीरे रफ्तार कम कर यात्रा जारी रखी। लगभग 80 किलोमीटर की यात्रा उन्होंने हिम्मत और संयम के साथ पूरी की। बूंदी पहुंचते ही उन्होंने बस को सामान्य तरीके से स्टैंड पर खड़ा किया, यात्रियों को सुरक्षित उतारा, और कुछ ही पलों बाद चालक सीट पर गिर पड़े।
अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम
बस स्टैंड पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने बताया कि रमेश को गंभीर हार्ट अटैक आया था और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनका हृदय काम करना बंद कर चुका था। लंबे समय तक CPR देने के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
डिपो में छाई शोक की लहर
घटना की खबर मिलते ही बूंदी डिपो में शोक की लहर दौड़ गई। सहकर्मियों ने बताया कि रमेश बैरागी बेहद अनुशासित, शांत स्वभाव के और यात्रियों के प्रति जिम्मेदार चालक थे। वे हमेशा मुस्कुराकर काम करते थे और सभी के प्रिय थे। डिपो प्रबंधक ने कहा, “रमेश जी ने अपने कर्तव्य को अंत तक निभाया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की — यह सच्चे समर्पण और साहस की मिसाल है।”
अंतिम संस्कार से पहले पुलिस कार्रवाई
घटना की सूचना पर कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया। रोडवेज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने रमेश बैरागी को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।














