
राजस्थान में पिछले दो दिनों के भीतर हुए भीषण सड़क हादसों ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है। अलग-अलग जिलों में हुई इन दुर्घटनाओं में अब तक 40 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जयपुर, फलोदी और अलवर में दर्दनाक हादसे
रविवार को जोधपुर के फलोदी इलाके में श्रद्धालुओं से भरी एक बस ट्रेलर से टकरा गई, जिसमें 15 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे के कुछ घंटे बाद ही एक और सड़क दुर्घटना में 4 लोगों की जान चली गई। सोमवार दोपहर जयपुर के हरमाड़ा इलाके में हुए एक भीषण एक्सीडेंट में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 10 से अधिक लोग घायल हो गए। जयपुर के जिला कलेक्टर जितेंद्र सोनी ने इन हादसों की पुष्टि की।
शनिवार रात को भी अलवर जिले के सदर थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली दुर्घटना हुई, जिसमें शादी समारोह से लौट रहे एक परिवार की थार गाड़ी से टक्कर हो गई। इस हादसे में परिवार के चार सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा, राज्य के अन्य हिस्सों में भी कई सड़क हादसे हुए हैं जिनमें पांच से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई। कुल मिलाकर, 48 घंटों में 40 से ज्यादा मौतें राज्य की सड़कों पर दर्ज की गई हैं।
गहलोत ने जताई गहरी चिंता, की सख्त कार्रवाई की मांग
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सड़क सुरक्षा के प्रति प्रशासनिक लापरवाही अब असहनीय हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जो अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “देश में हर साल करीब डेढ़ लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। इनमें से लगभग दस हजार मौतें सिर्फ राजस्थान में होती हैं। दुख की बात यह है कि इनमें से अधिकतर लोगों की कोई गलती नहीं होती — वे सिर्फ किसी और की लापरवाही का शिकार बन जाते हैं।”
एसआईटी गठित करने की दी सलाह
गहलोत ने कहा कि सड़क सुरक्षा सिर्फ एक विभाग का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसमें कई एजेंसियों — जैसे कि लोक निर्माण विभाग (PWD), परिवहन विभाग और पुलिस — की जिम्मेदारी समान रूप से जुड़ी है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को एक विशेष जांच टीम (SIT) बनानी चाहिए जो सड़क हादसों के कारणों की गहराई से जांच करे और सुरक्षा सुधार के उपाय सुझाए।
गहलोत ने आगे कहा, “सरकार को चाहिए कि सड़क सुरक्षा नियमों के पालन में लापरवाही बरतने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करे और साथ ही आम जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्यव्यापी अभियान शुरू करे। जब तक नागरिक और प्रशासन दोनों मिलकर सजग नहीं होंगे, तब तक इन हादसों पर रोक लगाना मुश्किल रहेगा।”
उन्होंने अंत में यह भी कहा कि बढ़ते सड़क हादसे केवल संख्या नहीं, बल्कि कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ रहे हैं। “राज्य को अब यह समझना होगा कि सड़क सुरक्षा कोई औपचारिक नीति नहीं, बल्कि जीवन बचाने की जिम्मेदारी है,” गहलोत ने कहा।














